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आउटसोर्सिंग पर लगे कर्मचारी होंगे बाहर
Updated Mon, 25 Jun 2018 12:20 AM IST
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आउटसोर्सिंग पर लगे कर्मचारी होंगे बाहर
सहारनपुर। नगर निगम में आउट सोर्सिंग पर लगे कर्मचारियों को बाहर करने की तैयारी चल रही है। जिसके बाद नगर निगम के लिपिकों को कंप्यूटर खुद ही संचालित करने होंगे। कंप्यूटर सीखने के लिए लिपिकों को तीन महीने का समय दिया जाएगा।
नगर निगम में करीब डेढ़ दर्जन कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर रखे गए थे। ज्यादातर ये कर्मचारी कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहे हैं, जिन्हें छह से दस हजार रुपये तक मानदेय के रूप में दिए जाते हैं। आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को रखने का प्रचलन तब से आया है, जब से कंप्यूटर को इस्तेमाल में लाया गया है। साथ ही तमाम कार्य ऑनलाइन हुए हैं। नगर निगम में वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को कंप्यूटर ही चलाना नहीं आता है। ऐसे में उनकी मदद के लिए आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखे गए हैं, जिनका खर्च नगर निगम उठाता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रत्येक महीने डेढ़ लाख रुपये से अधिक आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों पर खर्च किया जाता है, जिन्हें अब बाहर करने की तैयारी की जा रही है। लिपिकों को कंप्यूटर पर खुद ही काम करना होगा। कंप्यूटर पर टाइप करने से लेकर मेल करने समेत तमाम कार्य सीखने के लिए लिपिकों को तीन महीने का समय दिया जाएगा। नगरायुक्त के ऐसे कदम से लिपिकों में हड़कंप की स्थिति है। गौरतलब है कि कई लिपिक ऐसे हैं, जिनके सेवानिवृत्त होने में एक या दो साल बचे हैं। ऐसे में उनके लिए कंप्यूटर सीख पाना टेढ़ी खीर है।
एसडीए से बाहर किए कर्मचारी
नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह पर एसडीए यानी सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का भी अतिरिक्त प्रभार है। तीन दिन पहले ही उन्होंने एसडीए का आर्थिक बोझ कम करने के लिए वहां लगे आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों को बाहर किया है। एसडीए में चर्चा है कि आउटसोर्सिंग पर एसडीए में लगे कई कर्मचारी विभाग की गोपनीय दस्तावेजों को भी लीक कर रहे थे। साथ ही कुछ जगहों पर अवैध निर्माणों में भी उनकी संलिप्तता थी। उनकी शिकायत अधिकारियों को मिल रही थी, जिसके चलते उन्हें बाहर किया गया है।
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नगर निगम में बड़ी संख्या में आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी लगे हैं। ज्यादातर कर्मचारी कंप्यूटर आपरेटर के रूप में काम कर रहे हैं, जिनसे नगर निगम पर आर्थिक बोझ बढ़ा हुआ है। जल्द ही ऐसे कर्मचारियों को बाहर किया जाएगा। कंप्यूटर सीखने के लिए लिपिकों केे तीन महीने का समय दिया जाएगा।
- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।
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सहारनपुर। नगर निगम में आउट सोर्सिंग पर लगे कर्मचारियों को बाहर करने की तैयारी चल रही है। जिसके बाद नगर निगम के लिपिकों को कंप्यूटर खुद ही संचालित करने होंगे। कंप्यूटर सीखने के लिए लिपिकों को तीन महीने का समय दिया जाएगा।
नगर निगम में करीब डेढ़ दर्जन कर्मचारी आउटसोर्सिंग पर रखे गए थे। ज्यादातर ये कर्मचारी कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहे हैं, जिन्हें छह से दस हजार रुपये तक मानदेय के रूप में दिए जाते हैं। आउटसोर्सिंग पर कर्मचारियों को रखने का प्रचलन तब से आया है, जब से कंप्यूटर को इस्तेमाल में लाया गया है। साथ ही तमाम कार्य ऑनलाइन हुए हैं। नगर निगम में वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों को कंप्यूटर ही चलाना नहीं आता है। ऐसे में उनकी मदद के लिए आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी रखे गए हैं, जिनका खर्च नगर निगम उठाता है। विभागीय सूत्रों की मानें तो प्रत्येक महीने डेढ़ लाख रुपये से अधिक आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों पर खर्च किया जाता है, जिन्हें अब बाहर करने की तैयारी की जा रही है। लिपिकों को कंप्यूटर पर खुद ही काम करना होगा। कंप्यूटर पर टाइप करने से लेकर मेल करने समेत तमाम कार्य सीखने के लिए लिपिकों को तीन महीने का समय दिया जाएगा। नगरायुक्त के ऐसे कदम से लिपिकों में हड़कंप की स्थिति है। गौरतलब है कि कई लिपिक ऐसे हैं, जिनके सेवानिवृत्त होने में एक या दो साल बचे हैं। ऐसे में उनके लिए कंप्यूटर सीख पाना टेढ़ी खीर है।
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एसडीए से बाहर किए कर्मचारी
नगरायुक्त ज्ञानेंद्र सिंह पर एसडीए यानी सहारनपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष का भी अतिरिक्त प्रभार है। तीन दिन पहले ही उन्होंने एसडीए का आर्थिक बोझ कम करने के लिए वहां लगे आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों को बाहर किया है। एसडीए में चर्चा है कि आउटसोर्सिंग पर एसडीए में लगे कई कर्मचारी विभाग की गोपनीय दस्तावेजों को भी लीक कर रहे थे। साथ ही कुछ जगहों पर अवैध निर्माणों में भी उनकी संलिप्तता थी। उनकी शिकायत अधिकारियों को मिल रही थी, जिसके चलते उन्हें बाहर किया गया है।
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नगर निगम में बड़ी संख्या में आउटसोर्सिंग पर कर्मचारी लगे हैं। ज्यादातर कर्मचारी कंप्यूटर आपरेटर के रूप में काम कर रहे हैं, जिनसे नगर निगम पर आर्थिक बोझ बढ़ा हुआ है। जल्द ही ऐसे कर्मचारियों को बाहर किया जाएगा। कंप्यूटर सीखने के लिए लिपिकों केे तीन महीने का समय दिया जाएगा।
- ज्ञानेंद्र सिंह, नगरायुक्त।