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भारत अतुलनीय कला एवं शिल्प की भूमि
Updated Sat, 25 Nov 2017 11:58 PM IST
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भारत अतुलनीय कला एवं शिल्प की भूमि
सहारनपुर। दोआब क्षेत्र की लोक कला व लोक शिल्प विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार मुन्नालाल एंड जयनारायण खेमका गर्ल्स पीजी कॉलेज में शनिवार से शुरू हुआ। पहले दिन वक्ताओं ने भारतीय कला और शिल्प के संबंध में अपनी बात रखी।
उद्घाटन सीसीएस यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. एनके तनेजा ने किया। इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स नई दिल्ली के निदेशक प्रो. प्रकृति रंजन गोस्वामी ने कहा कि भारत तुलनीय कला एवं शिल्प की भूमि है, जहां गांव दर गांव कोई न कोई कलाकार अपनी विधा को संवार रहा होता है। प्राचार्य डॉ. मधु जैन ने उत्तर प्रदेश में लोक कला एवं शिल्प की परंपरा का जिक्र किया। कॉलेज के ड्राइंग एंड पेंटिंग विभाग द्वारा आयोजित इस सेमिनार में 60 से अधिक डेलीगेट्स ने अपने लेख और शोध पत्र प्रस्तुत किए। सेमिनार का बीज संबोधन इतिहासकार ओसी हांडा ने दिया। भारत की परंपरागत कलाओं के बारे में विस्तार से बताया। सेमिनार में इमेज ऑफ इंडिया का आयोजन किया गया। क्योरेटर डॉ. वीरेंद्र बंगारू ने कहा कि अनेक ऐसी किताबें हैं, जिनमें भारतीय इतिहास में जीवंत शैली, भवन स्मारक, वाद्य यंत्र और अन्य वस्तुओं की विशद जानकारी है। सेमिनार में डॉ. रामशब्द सिंह, डॉ. रिचा काम्बोज, डॉ. राम निरंजन, डॉ. एके डिमरी, डॉ. अमिता अग्रवाल, डॉ. निशा शुक्ला आदि मौजूद रही।
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सहारनपुर। दोआब क्षेत्र की लोक कला व लोक शिल्प विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार मुन्नालाल एंड जयनारायण खेमका गर्ल्स पीजी कॉलेज में शनिवार से शुरू हुआ। पहले दिन वक्ताओं ने भारतीय कला और शिल्प के संबंध में अपनी बात रखी।
उद्घाटन सीसीएस यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. एनके तनेजा ने किया। इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स नई दिल्ली के निदेशक प्रो. प्रकृति रंजन गोस्वामी ने कहा कि भारत तुलनीय कला एवं शिल्प की भूमि है, जहां गांव दर गांव कोई न कोई कलाकार अपनी विधा को संवार रहा होता है। प्राचार्य डॉ. मधु जैन ने उत्तर प्रदेश में लोक कला एवं शिल्प की परंपरा का जिक्र किया। कॉलेज के ड्राइंग एंड पेंटिंग विभाग द्वारा आयोजित इस सेमिनार में 60 से अधिक डेलीगेट्स ने अपने लेख और शोध पत्र प्रस्तुत किए। सेमिनार का बीज संबोधन इतिहासकार ओसी हांडा ने दिया। भारत की परंपरागत कलाओं के बारे में विस्तार से बताया। सेमिनार में इमेज ऑफ इंडिया का आयोजन किया गया। क्योरेटर डॉ. वीरेंद्र बंगारू ने कहा कि अनेक ऐसी किताबें हैं, जिनमें भारतीय इतिहास में जीवंत शैली, भवन स्मारक, वाद्य यंत्र और अन्य वस्तुओं की विशद जानकारी है। सेमिनार में डॉ. रामशब्द सिंह, डॉ. रिचा काम्बोज, डॉ. राम निरंजन, डॉ. एके डिमरी, डॉ. अमिता अग्रवाल, डॉ. निशा शुक्ला आदि मौजूद रही।
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