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फिर बंद हुआ यमुना पुल का निर्माण कार्य
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:42 AM IST
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लखनौती (सहारनपुर)। यमुना खादर में निर्माणाधीन पुल का निर्माण गत दो वर्षों से अधर में लटका पड़ा है। लोकसभा उपचुनाव के बाद पुल का निर्माण कार्य शुरू हो गया था। एक माह निर्माण कार्य चलने के बाद अधिकारियों की लापरवाही से काम फिर से बंद हो गया है। इससे ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीण और भाकियू ने सड़कों पर उतरकर आंदोलन की चेतावनी दी है।
बता दें कि यमुना नदी के दौलतपुर-शेरगढ़ टापू घाट पर इंटर स्टेट कनेक्टिविटी के तहत हरियाणा-यूपी को जोड़ने वाले पुल का निर्माण किया जा रहा है। पुल का निर्माण 2011 में शुरू किया गया था। निर्माण कार्य के बाद 24 माह की समयावधि दी गई थी, लेकिन सात वर्ष बीत जाने के बाद भी पुल का निर्माण पूरा नही हो सका। अभी तक केवल 60-70 प्रतिशत ही निर्माण हुआ है। भाकियू के देशपाल चौधरी, अरविंद कुमार, डा ओमपाल सिंह, जनेश्वर प्रसाद, फाजिल खान, तरसेम सिंह, अख्तर खान, लालू खान आदि ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनाने वाली कंपनी ने पुल के काम को धीमी गति से शुरू किया था। जिसके चलते निर्माण लागत बढ़ती चली गई और 29 करोड़ 30 लाख के बजट को पुन: करीब 52 करोड़ रुपये की लागत का बजट सरकार के सामने पेश किया गया। प्रदेश सरकार के बदलने और चुनाव के कारण लंबे समय तक फाइल केंद्र और राज्य सरकार में लटकी रही। जिस कारण पुल का निर्माण कार्य बंद हो गया।
स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुल का बजट तो पास कर लिया, लेकिन एक माह तक निर्माण कार्य चलने के बाद काम फिर से बंद हो गया है। जिससे क्षेत्रवासियों में सरकार के प्रति भारी रोष पनप रहा है। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी रामेश्वर सिंह का कहना कि बारिश के कारण काम बंद है, बरसात के बाद काम शुरू करा दिया जाएगा। गंगोह विधायक प्रदीप चौधरी का कहना है कि बरसात के मौसम को छोड़ कर किसी भी सूरत में पुल का काम बंद नही होने दिया जाएगा। निर्माण पूरा कराकर ही दम लेंगे।
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बता दें कि यमुना नदी के दौलतपुर-शेरगढ़ टापू घाट पर इंटर स्टेट कनेक्टिविटी के तहत हरियाणा-यूपी को जोड़ने वाले पुल का निर्माण किया जा रहा है। पुल का निर्माण 2011 में शुरू किया गया था। निर्माण कार्य के बाद 24 माह की समयावधि दी गई थी, लेकिन सात वर्ष बीत जाने के बाद भी पुल का निर्माण पूरा नही हो सका। अभी तक केवल 60-70 प्रतिशत ही निर्माण हुआ है। भाकियू के देशपाल चौधरी, अरविंद कुमार, डा ओमपाल सिंह, जनेश्वर प्रसाद, फाजिल खान, तरसेम सिंह, अख्तर खान, लालू खान आदि ग्रामीणों का कहना है कि पुल बनाने वाली कंपनी ने पुल के काम को धीमी गति से शुरू किया था। जिसके चलते निर्माण लागत बढ़ती चली गई और 29 करोड़ 30 लाख के बजट को पुन: करीब 52 करोड़ रुपये की लागत का बजट सरकार के सामने पेश किया गया। प्रदेश सरकार के बदलने और चुनाव के कारण लंबे समय तक फाइल केंद्र और राज्य सरकार में लटकी रही। जिस कारण पुल का निर्माण कार्य बंद हो गया।
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स्थानीय नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुल का बजट तो पास कर लिया, लेकिन एक माह तक निर्माण कार्य चलने के बाद काम फिर से बंद हो गया है। जिससे क्षेत्रवासियों में सरकार के प्रति भारी रोष पनप रहा है। उधर, लोक निर्माण विभाग के अधिकारी रामेश्वर सिंह का कहना कि बारिश के कारण काम बंद है, बरसात के बाद काम शुरू करा दिया जाएगा। गंगोह विधायक प्रदीप चौधरी का कहना है कि बरसात के मौसम को छोड़ कर किसी भी सूरत में पुल का काम बंद नही होने दिया जाएगा। निर्माण पूरा कराकर ही दम लेंगे।
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