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शिक्षा हासिल किए बिना किसी भी क्षेत्र में तरक्की पाना नामुमकिन: उलमा
Updated Wed, 02 May 2018 12:12 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम जकरिया में हुए कार्यक्रम में 542 छात्रों की दस्तारबंदी की गई। इस दौरान उलमा ने छात्रों से मेहनत और लगन के साथ तालीम हासिल कर पूरी दुनिया में शांति का संदेश फैलाने का आह्वान किया।
मंगलवार को सहारनपुर मुजफ्फरनगर मार्ग स्थित दारुल उलूम जकरिया में आयोजित हुए कार्यक्रम में संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने कहा कि तालीम के बिना किसी भी इंसान का जीवन अंधकारमय होता है। तालीम याफ्ता न होने से एक ओर जहां इंसान को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। वहीं उसका भविष्य भी अंधकार में हो जाता है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराए। इस दौरान उन्होंने बेटियों को शिक्षित करने पर भी जोर दिया। अध्यक्षता कर रहे शेखुल हदीस मौलाना समीउल्लाह कासमी ने कहा कि किसी भी कौम की तरक्की के लिए जरुरी है और वो कौम तालीम याफ्ता हो। तालीम हासिल करने से ही हम अच्छे डॉक्टर, वकील या इंजीनियर बनकर मुल्क की सेवा कर सकते हैं। उन्होंने दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम की अहमियत पर भी रोशनी डाली। कार्यक्रम में इफ्ता कक्षा के 44, अदब के 24, तजवीद के 12, हिफ्ज कुरआन के 12 और दौरा-ए-हदीस के 450 छात्रों की दस्तारबंदी की गई। अंत में मुफ्ती शरीफ खान ने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और आपसी भाईचारे के लिए दुआ कराई। इस मौके पर हाजी इमरान, डा. अहसान खां, मौ. फरीद, आफताब आलम, रिहान, अब्दुल हलीम आदि मौजूद रहे।
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मंगलवार को सहारनपुर मुजफ्फरनगर मार्ग स्थित दारुल उलूम जकरिया में आयोजित हुए कार्यक्रम में संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी ने कहा कि तालीम के बिना किसी भी इंसान का जीवन अंधकारमय होता है। तालीम याफ्ता न होने से एक ओर जहां इंसान को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। वहीं उसका भविष्य भी अंधकार में हो जाता है। इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को शिक्षा ग्रहण कराए। इस दौरान उन्होंने बेटियों को शिक्षित करने पर भी जोर दिया। अध्यक्षता कर रहे शेखुल हदीस मौलाना समीउल्लाह कासमी ने कहा कि किसी भी कौम की तरक्की के लिए जरुरी है और वो कौम तालीम याफ्ता हो। तालीम हासिल करने से ही हम अच्छे डॉक्टर, वकील या इंजीनियर बनकर मुल्क की सेवा कर सकते हैं। उन्होंने दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम की अहमियत पर भी रोशनी डाली। कार्यक्रम में इफ्ता कक्षा के 44, अदब के 24, तजवीद के 12, हिफ्ज कुरआन के 12 और दौरा-ए-हदीस के 450 छात्रों की दस्तारबंदी की गई। अंत में मुफ्ती शरीफ खान ने छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और आपसी भाईचारे के लिए दुआ कराई। इस मौके पर हाजी इमरान, डा. अहसान खां, मौ. फरीद, आफताब आलम, रिहान, अब्दुल हलीम आदि मौजूद रहे।
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