{"_id":"5963ce164f1c1b23558b46c3","slug":"31499713046-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"भुगतान में फिसड्डी साबित हो रही सहकारी चीनी मिलें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भुगतान में फिसड्डी साबित हो रही सहकारी चीनी मिलें
Updated Tue, 11 Jul 2017 12:27 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भुगतान में फिसड्डी साबित हो रही सहकारी चीनी मिलें
सहारनपुर। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए की जा रही सरकार की कवायद कागजी साबित हो रही है। निजी क्षेत्र की मिलों से तो क्या सरकार सहकारी चीनी मिलों से भी बकाया गन्ना मूल्य का पूरा भुगतान नहीं करवा पाई हैं। जिले की दोनों चीनी मिलों पर करीब 70 करोड़ रुपये किसानों के बकाया हैं जबकि निजी क्षेत्र की गांगनौली पर 65 करोड़ और शेरमऊ चीनी मिल पर 71 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं।
मिल बंद हुए लगभग तीन महीने हो चुके हैं। लेकिन किसान अभी भी बकाया गन्ना मूल्य पाने के लिए तरस रहे हैं। निजी क्षेत्र की देवबंद शुगर मिल को छोड़कर जिले की किसी भी मिल ने पूरा भुगतान नहीं किया है। शेरमऊ चीनी मिल पर जहां किसानों का 71 लाख रुपये अवशेष हैं वहीं गांगनौली शुगर मिल पर अभी भी 65 करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। सहकारी क्षेत्र की नानौता शुगर मिल पर 44 करोड 73 लाख रुपये अधिक और सरसावा चीनी मिल पर 24 करोड 80 लाख रुपये से अधिक बकाया गन्ना मूल्य है। इसके चलते किसान आर्थिक रूप से भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। किसान नेता राजपाल सिंह और भाकियू नेता अरूण राणा का कहना है कि सरकार यदि सहकारी चीनी मिलों का बकाया भुुगतान नहीं करा पा रही है तो निजी क्षेत्र की मिलों से कैंसे पेमेंट करा पाएगी। प्रदेश सरकार को भुगतान कराने के लिए कड़ी कार्रवाई करनी होगी। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि बकाया भुगतान के लिए मिलों पर लगातार दबाव बनाया हुआ है। जल्द ही पूरा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाएगा।
विज्ञापन
सहारनपुर। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए की जा रही सरकार की कवायद कागजी साबित हो रही है। निजी क्षेत्र की मिलों से तो क्या सरकार सहकारी चीनी मिलों से भी बकाया गन्ना मूल्य का पूरा भुगतान नहीं करवा पाई हैं। जिले की दोनों चीनी मिलों पर करीब 70 करोड़ रुपये किसानों के बकाया हैं जबकि निजी क्षेत्र की गांगनौली पर 65 करोड़ और शेरमऊ चीनी मिल पर 71 लाख रुपये अभी भी बकाया हैं।
मिल बंद हुए लगभग तीन महीने हो चुके हैं। लेकिन किसान अभी भी बकाया गन्ना मूल्य पाने के लिए तरस रहे हैं। निजी क्षेत्र की देवबंद शुगर मिल को छोड़कर जिले की किसी भी मिल ने पूरा भुगतान नहीं किया है। शेरमऊ चीनी मिल पर जहां किसानों का 71 लाख रुपये अवशेष हैं वहीं गांगनौली शुगर मिल पर अभी भी 65 करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। सहकारी क्षेत्र की नानौता शुगर मिल पर 44 करोड 73 लाख रुपये अधिक और सरसावा चीनी मिल पर 24 करोड 80 लाख रुपये से अधिक बकाया गन्ना मूल्य है। इसके चलते किसान आर्थिक रूप से भारी किल्लत का सामना कर रहे हैं। किसान नेता राजपाल सिंह और भाकियू नेता अरूण राणा का कहना है कि सरकार यदि सहकारी चीनी मिलों का बकाया भुुगतान नहीं करा पा रही है तो निजी क्षेत्र की मिलों से कैंसे पेमेंट करा पाएगी। प्रदेश सरकार को भुगतान कराने के लिए कड़ी कार्रवाई करनी होगी। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि बकाया भुगतान के लिए मिलों पर लगातार दबाव बनाया हुआ है। जल्द ही पूरा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान हो जाएगा।
विज्ञापन