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जिले की चीनी मिलों पर किसानों का 310 करोड़ रुपये बकाया
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सहारनपुर। जनपद की चीनी मिलें किसानों के करीब 310 करोड़ रुपये दबाए बैठीं हैं। इनमें से पिछले पेराई सत्र के लगभग 65 करोड़ और मौजूदा सीजन के 245 करोड़ रुपये बकाया हैं।
समय पर गन्ना मूल्य भुगतान कराना हमेशा ही चुनौतीपूर्ण रहा है। गन्ना खरीद अधिनियम के अनुसार गन्ना मिल में सप्लाई होने के 14 दिन में भुगतान करना होता है। इसके बाद भुगतान होने पर बकाया पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का प्रावधान है। इसके बाद भी किसानों को न तो समय पर गन्ना मूल्य भुगतान मिलता है और न ही ब्याज प्राप्त होता है।
जनपद की गांगनौली, नानौता और सरसावा शुगर मिलों पर पिछले सत्र के करीब 65 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं, जबकि देवबंद, शेरमऊ और गागल हेड़ी चीनी मिल पिछले पेराई सीजन का पूरा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी हैं। मौजूदा पेराई सत्र में बकाया गन्ना मूल्य लगभग 245 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस सीजन में देवबंद, गागल हेड़ी और शेरमऊ ने ही अब तक गन्ना मूल्य भुगतान करना शुरू किया।
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भाकियू के महानगर अध्यक्ष चौधरी मुकेश तोमर ने कहा बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसानों में न सिर्फ रोष है बल्कि आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई है। शासन और प्रशासन को शुगर मिलों के साथ सख्ती कर बकाया गन्ना मूल्य का तत्काल भुगतान कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर 21 जनवरी को अधिकारियों का घेराव होगा।
जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया जल्द ही पिछले सत्र की बकाएदार गांगनौली, नानौता और सरसावा का पूरा बकाया भुगतान होने की उम्मीद है। नानौता और सरसावा की डिमांड बैंक में जा चुकी है। जबकि गांगनौली शुगर मिल चीनी बेचकर भुगतान करेगी। मौजूदा सत्र में देवबंद, गागलहेड़ी और शेरमऊ ने गन्ना मूल्य भुगतान करना शुरू किया। जल्द ही बकाया भुगतान कराने के लिए सभी शुगर मिलों पर दबाव बनाया है।
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समय पर गन्ना मूल्य भुगतान कराना हमेशा ही चुनौतीपूर्ण रहा है। गन्ना खरीद अधिनियम के अनुसार गन्ना मिल में सप्लाई होने के 14 दिन में भुगतान करना होता है। इसके बाद भुगतान होने पर बकाया पर 15 प्रतिशत की दर से ब्याज देने का प्रावधान है। इसके बाद भी किसानों को न तो समय पर गन्ना मूल्य भुगतान मिलता है और न ही ब्याज प्राप्त होता है।
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जनपद की गांगनौली, नानौता और सरसावा शुगर मिलों पर पिछले सत्र के करीब 65 करोड़ रुपये अभी भी बकाया हैं, जबकि देवबंद, शेरमऊ और गागल हेड़ी चीनी मिल पिछले पेराई सीजन का पूरा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी हैं। मौजूदा पेराई सत्र में बकाया गन्ना मूल्य लगभग 245 करोड़ रुपये पहुंच गया है। इस सीजन में देवबंद, गागल हेड़ी और शेरमऊ ने ही अब तक गन्ना मूल्य भुगतान करना शुरू किया।
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भाकियू के महानगर अध्यक्ष चौधरी मुकेश तोमर ने कहा बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से किसानों में न सिर्फ रोष है बल्कि आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई है। शासन और प्रशासन को शुगर मिलों के साथ सख्ती कर बकाया गन्ना मूल्य का तत्काल भुगतान कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर 21 जनवरी को अधिकारियों का घेराव होगा।
जिला गन्ना अधिकारी कृष्ण मोहन मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया जल्द ही पिछले सत्र की बकाएदार गांगनौली, नानौता और सरसावा का पूरा बकाया भुगतान होने की उम्मीद है। नानौता और सरसावा की डिमांड बैंक में जा चुकी है। जबकि गांगनौली शुगर मिल चीनी बेचकर भुगतान करेगी। मौजूदा सत्र में देवबंद, गागलहेड़ी और शेरमऊ ने गन्ना मूल्य भुगतान करना शुरू किया। जल्द ही बकाया भुगतान कराने के लिए सभी शुगर मिलों पर दबाव बनाया है।