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श्रद्धाभाव से हुआ 26 छड़ियों का पूजन, बाबा जाहरवीर जयकारे गूंजे

Mon, 17 Aug 2020 12:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Aug 2020 12:03 AM IST
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26 sticks worshiped with reverence, Baba Jaharveer shouted
श्री सीताराम राम मंदिर में पूजन करते भक्त - फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। बाबा श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज की प्रतीक चिन्ह सभी 26 छड़ियों के शृंगार के बाद विधि विधान से पूजन हुआ। छड़ियों के स्थान और मंदिर परिसर ढोल और बाबा के जयकारों से गूंज उठे। शनिवार की शाम पुरानी मंडी में सरदार छड़ी का पूजन भगत विनोद प्रकाश ने कराया। इसी तरह चकराता मार्ग स्थित आवास पर श्री गुगा म्हाड़ी सुधार सभा के अध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने छड़ी का पूजन संपन्न कराया। मोहल्ला रामनगर पठानपुरा स्थित सीताराम मंदिर में भगत गुलशन सागर ने पूजा-अर्चना कराई और बाबा श्री जाहरवीर गोगा जी महाराज का गुणगान किया। इसके साथ ही सभी छड़ियों के भक्तों ने अपने-अपने स्थानों पर छड़ियों का पूजन कर दीप प्रज्ज्वलित कर प्रार्थना की। इसी तरह रोजाना मंदिरों में शाम के समय छड़ियों का निरंतर पूजन होगा।
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आस्था को न पहुंचे ठेस, घर घर पूजन की दे अनुमति
सहारनपुर। कोरोना काल की वजह से इस बार अभी प्रशासन ने छड़ियों के शहर में भ्रमण की अनुमति नहीं दी है। भक्तों की ओर से लगातार मांग की जा रही है कि सामाजिक दूरी का पालन करते हुए सरकार के निर्देशानुसार घर घर पूजन करने की अनुमति दी जाए। क्योंकि, सहारनपुर के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है जब छड़ियों का घर घर नहीं पहुंच पा रही है। इसको लेकर श्री गोगा म्हाड़ी सुधार सभा के अध्यक्ष पंकज उपाध्याय, भगत विनोद प्रकाश, गुलशन सागर, पवन सैनी आदि डीएम को ज्ञापन भी दे चुके हैं।
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निशानियों को बांधी डोरिया
सहारनपुर। भक्तों ने पूजन कराने के साथ ही निशानियां को डोरियां भी बांधकर सेवा का संकल्प दिलाया। बता दें कि बाबा श्री जाहरवीर गोगा महाराज की शान में शुक्ल पक्ष की दशमी पर गंगोह रोड स्थित म्हाड़ी पर मेला भरता है। इस बार शुक्ल पक्ष की दशमी 28 अगस्त की पड़ रही है। हर साल यहां तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। पहले दिन सभी छड़ी नेजे की अगुवाई में मेला गुघाल परिसर स्थिति श्री विश्रामपुरी काल भैरव मंदिर पर बैंडबाजों और ढोल नगाड़ों के साथ पहुंचती और यहां से म्हाड़ी की और प्रस्थान कर जाती है और तीसरे दिन वापिस लौटती हैं। हर वर्ष पांच लाख से अधिक श्रद्धालु निशान और प्रसाद चढ़ाने पहुंचते हैं।
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