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Saharanpur News: 20 रुपये के 25, 80 के 100, 500 रुपये में मिल रहे 800 दीये
Sat, 31 Oct 2026 01:30 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 31 Oct 2026 01:30 AM IST
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सहारनपुर। कहीं चाक पर मिट्टी को आकार देकर दीये बनाए जा रहे हैं तो कहीं तैयार दीयों को सुखाने, पकाने और रंगों से सजाने का काम चल रहा है। कई दिनों की मेहनत के बाद तैयार हुए दीये अब बाजार में पहुंचने लगे हैं। 20 रुपये के 25, 80 के 100, 500 रुपये में मिल रहे 800 दीये मिल रहे हैं। बाजार में सजे रंग-बिरंगे दीयों को देखकर दिवाली की तैयारियों का अहसास होने लगा है।
महानगर की मुख्य सड़कों के किनारे अहोई अष्टमी, धनतेरस और दिवाली पर्व को प्रकाशमय बनाने के लिए कुम्हार तैयार हैं। पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली पर्व के चलते कुम्हार इस बार ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग आकार और रंगों के दीये तैयार कर रहे हैं। मिट्टी के साधारण दीयों के साथ उन्हें आकर्षक रंगों से सजाया भी जा रहा है। बाजार में दीयों की कीमत भी अलग-अलग रखी गई है। लोगों ने भी अभी से दीये आदि की खरीदारी शुरू कर दी है।
- परंपरा को जिंदा रखने में जुटे कुम्हार
मिट्टी के दीये केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और संस्कृति का भी प्रतीक हैं। दिवाली पर दीप जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। आधुनिक सजावटी सामान के बीच भी मिट्टी के दीयों की मांग बनी हुई है। कुम्हारों के लिए दिवाली का त्योहार रोजगार के साथ अपनी पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।
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- बोले विक्रेता
- मांगेराम ने बताया कि दिवाली उनके लिए साल का महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दौरान दीयों की मांग बढ़ जाती है। इसलिए कई दिन पहले से दीये बनाने में जुट जाते हैं। मिट्टी को आकार देने से लेकर दीये तैयार करने तक काफी मेहनत करनी पड़ती है। उन्हें इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
- रेखा प्रजापति ने बताया कि बिजली की झालर और सजावटी लाइटों के बावजूद मिट्टी के दीयों का महत्व कम नहीं हुआ है। दिवाली पर लोग पूजा और घरों की सजावट के लिए दीये खरीदते हैं। ग्राहकों की पसंद को देखते हुए दीयों को अलग-अलग रंगों से सजाया गया है।
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महानगर की मुख्य सड़कों के किनारे अहोई अष्टमी, धनतेरस और दिवाली पर्व को प्रकाशमय बनाने के लिए कुम्हार तैयार हैं। पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली पर्व के चलते कुम्हार इस बार ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग आकार और रंगों के दीये तैयार कर रहे हैं। मिट्टी के साधारण दीयों के साथ उन्हें आकर्षक रंगों से सजाया भी जा रहा है। बाजार में दीयों की कीमत भी अलग-अलग रखी गई है। लोगों ने भी अभी से दीये आदि की खरीदारी शुरू कर दी है।
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- परंपरा को जिंदा रखने में जुटे कुम्हार
मिट्टी के दीये केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा और संस्कृति का भी प्रतीक हैं। दिवाली पर दीप जलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। आधुनिक सजावटी सामान के बीच भी मिट्टी के दीयों की मांग बनी हुई है। कुम्हारों के लिए दिवाली का त्योहार रोजगार के साथ अपनी पुश्तैनी कला को आगे बढ़ाने का अवसर भी है।
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- बोले विक्रेता
- मांगेराम ने बताया कि दिवाली उनके लिए साल का महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दौरान दीयों की मांग बढ़ जाती है। इसलिए कई दिन पहले से दीये बनाने में जुट जाते हैं। मिट्टी को आकार देने से लेकर दीये तैयार करने तक काफी मेहनत करनी पड़ती है। उन्हें इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
- रेखा प्रजापति ने बताया कि बिजली की झालर और सजावटी लाइटों के बावजूद मिट्टी के दीयों का महत्व कम नहीं हुआ है। दिवाली पर लोग पूजा और घरों की सजावट के लिए दीये खरीदते हैं। ग्राहकों की पसंद को देखते हुए दीयों को अलग-अलग रंगों से सजाया गया है।