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धान में बढ़ा पती लपेटक सूंडी का प्रकोप
Updated Wed, 02 Aug 2017 12:18 AM IST
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धान में बढ़ा पत्ती लपेटक सूंडी का प्रकोप
सहारनपुर। मौसम के उतार चढ़ाव के चलते धान में पत्ती लपेटक सूंडी का प्रकोप बढ़ गया है। समय पर रोकथाम नहीं हुई तो धान की उत्पादकता प्रभावित होगी। यह सूंडी पत्तियों के हरे भाग को खाकर उसे झिल्ली जैसा सफेद कर देती है। जिससे फसल की वृद्धि रुक जाती है।
कृषि विज्ञान केंद्र के सहनिदेशक फसल सुरक्षा डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि मौसम के उतार चढ़ाव से धान में पत्ती लपेटक सूंडी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। यह सूंडी फसल के ऊपरी नुुुकीली पत्तियों के किनारे को मोड़कर अंदर रहने लगती है। जो इसके हरे भाग को खाकर सफेद झिल्ली में बदल देती है। इसके कारण प्रभावित पौधों की ग्रोथ रुक जाती है। जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। इस सूंडी से निजात पाने के लिए दो व्यक्ति पांच मीटर लंबी रस्सी को खेत के दोनों किनारों से इस तरह लेकर चलना चाहिए जिससे धान की ऊपरी पत्तियां जोर से हिलें। पत्तियों से रगडकर चलने से उनके अंदर की सूंडी झटके से नीचे पानी में गिरकर मर जाती है। इसके बाद दूसरी तरफ से भी यह प्रक्रिया अपनाई जाए। इस विधि को 4 से 5 दिन के बाद एक बार फिर से अपनाना चाहिए। इसके अलावा खेत में ट्राइकोग्रामा कार्ड भी लगाया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि प्रभावित खेत में नाइट्रोजन की अधिक मात्रा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि पत्ती लपेटक का अधिक प्रकोप दिखाई दे रहा हो तो प्रोफेनोफास और साइपर मैथरिन की 30 एमएल मात्रा को 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। या कारटाफ हाइड्रोक्लोराइड की एक ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे कराना फायदेमंद रहता है।
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सहारनपुर। मौसम के उतार चढ़ाव के चलते धान में पत्ती लपेटक सूंडी का प्रकोप बढ़ गया है। समय पर रोकथाम नहीं हुई तो धान की उत्पादकता प्रभावित होगी। यह सूंडी पत्तियों के हरे भाग को खाकर उसे झिल्ली जैसा सफेद कर देती है। जिससे फसल की वृद्धि रुक जाती है।
कृषि विज्ञान केंद्र के सहनिदेशक फसल सुरक्षा डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि मौसम के उतार चढ़ाव से धान में पत्ती लपेटक सूंडी का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। यह सूंडी फसल के ऊपरी नुुुकीली पत्तियों के किनारे को मोड़कर अंदर रहने लगती है। जो इसके हरे भाग को खाकर सफेद झिल्ली में बदल देती है। इसके कारण प्रभावित पौधों की ग्रोथ रुक जाती है। जिससे उत्पादन प्रभावित होता है। इस सूंडी से निजात पाने के लिए दो व्यक्ति पांच मीटर लंबी रस्सी को खेत के दोनों किनारों से इस तरह लेकर चलना चाहिए जिससे धान की ऊपरी पत्तियां जोर से हिलें। पत्तियों से रगडकर चलने से उनके अंदर की सूंडी झटके से नीचे पानी में गिरकर मर जाती है। इसके बाद दूसरी तरफ से भी यह प्रक्रिया अपनाई जाए। इस विधि को 4 से 5 दिन के बाद एक बार फिर से अपनाना चाहिए। इसके अलावा खेत में ट्राइकोग्रामा कार्ड भी लगाया जा सकता है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि प्रभावित खेत में नाइट्रोजन की अधिक मात्रा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि पत्ती लपेटक का अधिक प्रकोप दिखाई दे रहा हो तो प्रोफेनोफास और साइपर मैथरिन की 30 एमएल मात्रा को 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। या कारटाफ हाइड्रोक्लोराइड की एक ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में घोलकर स्प्रे कराना फायदेमंद रहता है।
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