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1930 में चौक फरोहशान में पकड़ी गई थी क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्री

Tue, 14 Aug 2018 11:56 PM IST
Updated Tue, 14 Aug 2018 11:56 PM IST
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1930 में चौक फरोहशान में पकड़ी गई थी क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्री
1930 में चौक फरोहशान में पकड़ी गई थी क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्री
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सहारनपुर। देश की आजादी की लड़ाई में क्रांतिकारियों ने सहारनपुर की धरती से अंग्रेजों के खिलाफ खूब बिगुल बजाया। यहां की तमाम उन घटनाओं को लोग आज भी याद करते हैं। 1930 में मोहल्ला चौक फरोशान से क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्री पकड़ी गई थी, जिसमें शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह के साथी डा. गया प्रसाद, शिव वर्मा और जयदेव को अंग्रेजी हुकूमत ने गिरफ्तार कर किया था।
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान शहर के मोहल्ला चौक फरोशान में दो मंजिला मकान में क्रांतिकारियों की बम फैक्ट्री चल रही थी, जिसमें नीचे के हिस्से में दवाखाना चलता था और ऊपर बम बनाए जाते थे। इन बमों से आजादी के मतवालों का मकसद किसी को जनहानि पहुंचाना नहीं था। वह धमाके कर अंग्रेजी हुकूमत को देश छोड़ने की चेतावनी देते थे। इसके साथ ही भारतीयों को आजादी की लड़ाई योगदान करने के लिए प्रेरित करते थे। 1930 में क्रांतिकारी डा. गया प्रसाद और शिव वर्मा बम फैक्ट्री में मौजूद थे, तब पुलिस ने छापा मारकर बम फैक्ट्री को पकड़ा था और उनको गिरफ्तार किया था। जानकार बताते हैं कि पुलिस ने तब बम फैक्ट्री में कैंप कर लिया और अगले दिन जब रात के समय जयदेव कपूर वहां पहुंचे तो उन्हें भी पकड़ लिया गया था। यह तीनों क्रांतिकारी शहीद-ए-आजम भगत सिंह के साथी थे। इसके बाद इनके चौथे साथी ठाकुर मुकुंद सिंह को भी गिरफ्तार किया था। सहारनपुर से पूरे देश में बम बनाकर भेजे जाते थे।
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दहशत फैलाने को पेड़ पर लटकाते थे शव
सहारनपुर। पंसारी बाजार में अंग्रेज क्रांतिकारियों को पकड़कर खुलेआम एक पेड़ पर फांसी पर लटकाते थे और कई दिनों तक शवों को पेड़ पर ही लटकाया जाता था। ताकि लोगों में दहशत फैले और वह आजादी की लड़ाई में भाग न लें। सड़ने के बाद ही शवों को पेड़ से उतारा जाता था। आज उस जगह शहीद स्मारक बना है, जहां हर वर्ष दस मई को अज्ञात शहीदों को नमन किया जाता है। इसी तरह चौकी सराय स्थित पीपल के पेड़ पर भी क्रांतिकारियों को फांसी दी गई।
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बापू और नेहरू भी आए थे यहां
सहारनपुर। 1928 के कांग्रेस अधिवेशन में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी यहां हिस्सा लने के लिए आए थे। बताते हैं कि 1936 में पंडित जवाहर लाह नेहरू यहां आए तो तो उन्हें हिंदू कुमार सभा ने तत्कालीन ब्रिटिश सरकार को नकारते हुए भारत का राष्ट्रपति घोषित कर दिया था और उन्हें 101 रुपये नगद और तथा चांदी की थाली भेंट की थी।
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शहीद-ए-आजम का है गहरा नाता
सहारनपुर। शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह का सहारनपुर से गहरा नाता है। प्रद्युमननगर इलाके में भगत सिंह के परिवार के सदस्य निवास करते हैं। परिवार के सदस्यों को फर्क है कि वे उस महान शख्सियत के परिवार में जन्मे हैं, जिसे इस देश ने अपने दिलों में सम्मान दिया। वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां इसी भाव के साथ अमर शहीद भगत सिंह और उनकी शहादत को याद रखें। शहीद भगत सिंह के छोटे भाई स्वर्गीय कुलतार सिंह के पुत्र किरणजीत सिंधू बताते हैं कि जब भगत जन्मे, वह क्रांति का दौर था। उनके चाचा सरदार स्वर्ण सिंह और परिवार के अन्य बड़े सदस्य उसी दिन जेल से रिहा होकर घर लौटे। भगत सिंह की शहादत के समय कुलतार सिंह की उम्र 10 से 12 वर्ष थी। जब वे जेल में बंद भगत सिंह से मिलने गए तो उनकी हालत देखकर कुलतार की आंखों में आंसू आ गए थे। तब भगत सिंह ने उनसे कहा कि यह आंसू व्यर्थ न बहाएं। क्योंकि उनके बाद क्रांति की अलख जगाए रखने की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी की होगी। इससे प्रेरित होकर कुलतार आजादी के आंदोलन में जेल गए थे और कई वर्ष जेल में बंद रहे।

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धर्म और जाति को लेकर हो रहे संघर्ष से दुखी हूं: प्रताप
सहारनपुर। चिलकाना क्षेत्र के गांव नारायपुर गुर्जर निवासी 99 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी चौधरी प्रताप सिंह कहना है कि सहारनपुर में अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारियों ने बिगुल बजा रखा था। शहीद सरदार भगत सिंह और उनके साथियों का सहारनपुर आना-जाना लगा रहता था। अंग्रेजों ने सहारनपुर से बम फैक्ट्री पकड़ी थी और क्रांतिकारियों को पकड़कर खुलेआम फांसी देकर शव पेड़ पर लटकाए जाते थे। जब भारत गुलाम था तो यही उम्मीद थी कि एक दिन हम भी आजाद होंगे। हमें तमाम सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलेगा, जो आज मिल भी रहा है, लेकिन जब आजादी की लड़ाई लड़ रहे थे तो मन में एक बात आती थी कि भ्रष्टाचार से भी मुक्ति मिलेगी। मगर यह समस्या आज भी बनी हुई है। देश को आजाद करने में न जाने कितने सेनानियों ने कुर्बानियां दी। मगर, आज देश के अंदर धर्म और जाति को लेकर हो रहे संघर्ष को देखकर वह दुखी हैं। यही हाल रहा तो देश बर्बाद हो जाएगा। युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि आपस में प्रेम और भाईचारे के साथ रहें। तभी देश की सार्वजनिक संपत्ति को महफूज रहेगी और हमारे सपनों के भारत का निर्माण होगा।
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