{"_id":"5ae613db4f1c1b87098b6f99","slug":"201525027803-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इबादत की रात है शब-ए-बरात : इस्हाक गोरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इबादत की रात है शब-ए-बरात : इस्हाक गोरा
Updated Mon, 30 Apr 2018 01:08 AM IST
विज्ञापन
इबादत की रात है शब-ए-बरात : इस्हाक गोरा
देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि शब-ए-बरात इबादत की रात है। इस रात में कुरआन की तिलावत, नफली नमाज व कसरत से तसबीह पढ़ कर दुआ करनी चाहिए। कहा कि शब-ए-बरात पर इबादत का कोई ख़ास तरीका शरीयत से साबित नहीं होता है।
रविवार को मोहल्ला अबुलमाली में कारी ने शब-ए-बरात पर मुस्लिम नौजवानों से यातायात के नियमों का पूरा पालन करने और हुड़दंग आदि से बचने की अपील करते हुए कहा कि यह इस्लामी तरीका नहीं है। मुस्लिम नौजवानों को चाहिए कि वे इस रात अल्लाह की इबादत करें और गलत कामों से बचें। कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि शब-ए-बरात पर खास तरीके से नमाज पढ़ी जाती है ये सब मनगढंत है। इसका शरीयत में कोई प्रमाण नहीं है। इसकी फजीलत में बहुत सी रिवायतें हैं। इस्हाक गोरा ने बताया कि अपने घरों में जितनी हो सके इबादत करनी करनी चाहिए। कहा कि अल्लाह ओर उसके रसूल से मोहब्बत का तकाजा ये है कि शब-ए-बरात जैसी रातों में अपने घरों पर नफ्ली इबादतों का अहतमाम करें और खिलाफ-ए-सुन्नत जैसे कामों से ख़ुद को बचाते रहें। जबकि रात भर घूमना फिरना, कब्रिस्तान के आस पास मेले जैसी स्थिति बनाकर रखना, तकरीर व लंबी लंबी मजलिसें लगाना जायज नहीं है।
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत दावातुल मुसलीमीन के संरक्षक कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि शब-ए-बरात इबादत की रात है। इस रात में कुरआन की तिलावत, नफली नमाज व कसरत से तसबीह पढ़ कर दुआ करनी चाहिए। कहा कि शब-ए-बरात पर इबादत का कोई ख़ास तरीका शरीयत से साबित नहीं होता है।
रविवार को मोहल्ला अबुलमाली में कारी ने शब-ए-बरात पर मुस्लिम नौजवानों से यातायात के नियमों का पूरा पालन करने और हुड़दंग आदि से बचने की अपील करते हुए कहा कि यह इस्लामी तरीका नहीं है। मुस्लिम नौजवानों को चाहिए कि वे इस रात अल्लाह की इबादत करें और गलत कामों से बचें। कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि शब-ए-बरात पर खास तरीके से नमाज पढ़ी जाती है ये सब मनगढंत है। इसका शरीयत में कोई प्रमाण नहीं है। इसकी फजीलत में बहुत सी रिवायतें हैं। इस्हाक गोरा ने बताया कि अपने घरों में जितनी हो सके इबादत करनी करनी चाहिए। कहा कि अल्लाह ओर उसके रसूल से मोहब्बत का तकाजा ये है कि शब-ए-बरात जैसी रातों में अपने घरों पर नफ्ली इबादतों का अहतमाम करें और खिलाफ-ए-सुन्नत जैसे कामों से ख़ुद को बचाते रहें। जबकि रात भर घूमना फिरना, कब्रिस्तान के आस पास मेले जैसी स्थिति बनाकर रखना, तकरीर व लंबी लंबी मजलिसें लगाना जायज नहीं है।
विज्ञापन