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कुआं खेड़ा के संगम पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई
Updated Mon, 15 Jan 2018 12:21 AM IST
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कुआं खेड़ा के संगम पर श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई
नानौता (सहारनपुर)। मकर संक्रांति के अवसर पर नानौता क्षेत्र के ग्राम कुआं खेड़ा स्थित गंगा-यमुना के पवित्र संगम स्थल पर दूरदराज से आए लोगों ने स्नान कर पुण्य कमाया। वहीं संगम स्थल पर हर बार की तरह प्रशासन की बेरुखी और यमुना नहर में पानी न छोड़ने पर लोगों में नाराजगी नजर आई जबकि गंगनहर में पानी रहा।
रविवार को मकर संक्रांति के अवसर पर धार्मिक महत्व के दृष्टिगत काफी संख्या में पहुंचे श्रृद्धालुओं ने मां गंगा की आरती और हर-हर गंगे के जयघोष से संगम स्थल पर भक्तिमय वातावरण रहा। श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर फूल, दीए और पैसे संगम में डालकर प्रवाहित कर सुख समृद्धि की मनोकामना मांगी। इस दौरान मंदिरों व घरों में काली दाल से बनी खिचड़ी, तिल और गुड़ सहित मूंगफली का भी वितरण भी किया गया।
उधर, कुआंखेडा संगम क्षेत्र में करीब 11 वर्ष पूर्व बना तो दूरदराज व क्षेत्रवासियों ने सोचा था कि अब हरिद्वार या इलाहाबाद जाने की आवश्यकता कम रह गई। लेकिन प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बेरुखी का आलम यह रहा है कि अब तक संगम स्थल पर न तो गर्मी और बरसात में बैठने के लिए कोई कमरा या टीनशेड ही बनवाया गया और न ही महिला श्रृद्धालुओं के लिए वस्त्र बदलने के लिए कोई इंतजाम ही किये गए हैं। इसके चलते महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं बसों से यात्रा कर संगम पर नहाने आने वाले श्रृद्धालुओं को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से करीब छह किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर पूरी करनी पडती है। तथा वापसी भी पैदल ही करनी पडती है। प्रशासन द्वारा संगम स्थल पर लोगों को लाने वाले वाहनों की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है।
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सुविधाएं मिलें तो पर्यटन स्थल बन जाए
क्षेत्रीय लोगो पूर्व ग्राम प्रधान ओमबीर सिंह, पूर्व प्रमुख विजेंद्र पुंडीर, प्रमोद राणा, पूर्व समिति चेयरमैन कुलदीप सिंह, केहर सिंह, महेन्द्र सिंह, रामबीर चौहान, सुबोध, मदन सिंह, प्रमोद राणा, संजय सिंह, आदि का कहना है कि यदि प्रशासन संगम स्थल पर महिला घाट, श्रद्धालुओं के लिए टीन शेड, पानी की व्यवस्था, खाने-पीने की दुकानें तथा वाहनों की व्यवस्था कराए तो यह संगम स्थल आस्था का अनूठा केंद्र होने के साथ ही पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।
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नानौता (सहारनपुर)। मकर संक्रांति के अवसर पर नानौता क्षेत्र के ग्राम कुआं खेड़ा स्थित गंगा-यमुना के पवित्र संगम स्थल पर दूरदराज से आए लोगों ने स्नान कर पुण्य कमाया। वहीं संगम स्थल पर हर बार की तरह प्रशासन की बेरुखी और यमुना नहर में पानी न छोड़ने पर लोगों में नाराजगी नजर आई जबकि गंगनहर में पानी रहा।
रविवार को मकर संक्रांति के अवसर पर धार्मिक महत्व के दृष्टिगत काफी संख्या में पहुंचे श्रृद्धालुओं ने मां गंगा की आरती और हर-हर गंगे के जयघोष से संगम स्थल पर भक्तिमय वातावरण रहा। श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना कर फूल, दीए और पैसे संगम में डालकर प्रवाहित कर सुख समृद्धि की मनोकामना मांगी। इस दौरान मंदिरों व घरों में काली दाल से बनी खिचड़ी, तिल और गुड़ सहित मूंगफली का भी वितरण भी किया गया।
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उधर, कुआंखेडा संगम क्षेत्र में करीब 11 वर्ष पूर्व बना तो दूरदराज व क्षेत्रवासियों ने सोचा था कि अब हरिद्वार या इलाहाबाद जाने की आवश्यकता कम रह गई। लेकिन प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बेरुखी का आलम यह रहा है कि अब तक संगम स्थल पर न तो गर्मी और बरसात में बैठने के लिए कोई कमरा या टीनशेड ही बनवाया गया और न ही महिला श्रृद्धालुओं के लिए वस्त्र बदलने के लिए कोई इंतजाम ही किये गए हैं। इसके चलते महिलाओं को परेशानी उठानी पड़ती है। इतना ही नहीं बसों से यात्रा कर संगम पर नहाने आने वाले श्रृद्धालुओं को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे से करीब छह किलोमीटर की दूरी पैदल चलकर पूरी करनी पडती है। तथा वापसी भी पैदल ही करनी पडती है। प्रशासन द्वारा संगम स्थल पर लोगों को लाने वाले वाहनों की कोई व्यवस्था नहीं की गयी है।
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क्षेत्रीय लोगो पूर्व ग्राम प्रधान ओमबीर सिंह, पूर्व प्रमुख विजेंद्र पुंडीर, प्रमोद राणा, पूर्व समिति चेयरमैन कुलदीप सिंह, केहर सिंह, महेन्द्र सिंह, रामबीर चौहान, सुबोध, मदन सिंह, प्रमोद राणा, संजय सिंह, आदि का कहना है कि यदि प्रशासन संगम स्थल पर महिला घाट, श्रद्धालुओं के लिए टीन शेड, पानी की व्यवस्था, खाने-पीने की दुकानें तथा वाहनों की व्यवस्था कराए तो यह संगम स्थल आस्था का अनूठा केंद्र होने के साथ ही पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकता है।