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परमात्मा में मन लगाने से मिलती है शांति - आराधना बाई
Updated Sat, 16 Dec 2017 12:23 AM IST
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सहारनपुर। महात्मा आराधना बाई ने कहा है कि अशांति से बचने के लिए मन को परमात्मा के नाम में लगाना आवश्यक है। परमात्मा के नाम का बोध के लिए सद्गुरु की खोज कर आत्मज्ञान प्राप्त करें और मन को परमात्मा के नाम में लगाएं।
महात्मा आराधना बाई शुक्रवार को आईटीसी रोड स्थित कल्याण आश्रम में मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित सद्भावना संत सम्मेलन को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि संसार में हजारों गुण वाचक नाम प्रभु के हैं। हजारों गुण वाचक नामों से आध्यात्मिक लाभ नहीं होगा। आदि नाम एक है जिसका भेद केवल समय के सच्चे सद्गुरु द्वारा ही दिया जा सकता है। जिसकी खोज करके सद्गुरु से आत्मज्ञान प्राप्त करके उस प्रभु के सच्चे नाम को जानकर उनका सुमिरन करना चाहिए। सम्मेलन में महात्मा करुणा बाई ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल खाना, पीना एवं घर बनाना ही नहीं, परमपिता परमात्मा के सच्चे नाम को जानकर उसका सुमिरन करके जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होना है। वही मनुष्य जीवन के मोक्ष का साधन है। राधिका बाई ने गुरु की पहचान और उसकी महिमा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गुरु की पहचान केवल ज्ञान से ही होती है जो हमें उस परम पिता परमात्मा के सच्चे नाम का बोध करा दे और उस परमात्मा को हृदय के अंदर साक्षात्कार करा दे, वही सच्चा गुरु होता है।
कार्यक्रम में प्रीतम सैनी, जितेश्वर सैनी, सतपाल सैनी, दिनेश पंडित, कोमल पंडित ने सहयोग किया।
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महात्मा आराधना बाई शुक्रवार को आईटीसी रोड स्थित कल्याण आश्रम में मानव उत्थान सेवा समिति द्वारा आयोजित सद्भावना संत सम्मेलन को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि संसार में हजारों गुण वाचक नाम प्रभु के हैं। हजारों गुण वाचक नामों से आध्यात्मिक लाभ नहीं होगा। आदि नाम एक है जिसका भेद केवल समय के सच्चे सद्गुरु द्वारा ही दिया जा सकता है। जिसकी खोज करके सद्गुरु से आत्मज्ञान प्राप्त करके उस प्रभु के सच्चे नाम को जानकर उनका सुमिरन करना चाहिए। सम्मेलन में महात्मा करुणा बाई ने कहा कि मनुष्य जीवन का उद्देश्य केवल खाना, पीना एवं घर बनाना ही नहीं, परमपिता परमात्मा के सच्चे नाम को जानकर उसका सुमिरन करके जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होना है। वही मनुष्य जीवन के मोक्ष का साधन है। राधिका बाई ने गुरु की पहचान और उसकी महिमा के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गुरु की पहचान केवल ज्ञान से ही होती है जो हमें उस परम पिता परमात्मा के सच्चे नाम का बोध करा दे और उस परमात्मा को हृदय के अंदर साक्षात्कार करा दे, वही सच्चा गुरु होता है।
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कार्यक्रम में प्रीतम सैनी, जितेश्वर सैनी, सतपाल सैनी, दिनेश पंडित, कोमल पंडित ने सहयोग किया।