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सरकार का ध्यान हटा तो आहिस्ता से चलवा दिए गए कमेले
Updated Mon, 12 Jun 2017 12:52 AM IST
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सरकार का ध्यान हटा तो आहिस्ता से चलवा दिए गए कमेले
सहारनपुर। योगी सरकार के अस्तित्व में आते ही जिले भर में कहीं लाइसेंस के नाम पर तो कहीं मानक पूरे नहीं होने के नाम पर बंद कराए गए कमेलों को आहिस्ता-आहिस्ता फिर शुरू करा दिया गया है। जिले भर में मानकों को ताक पर रखकर अवैध कटान होने लगा है। मानकों की अनदेखी कर स्लाटर हाउस भी चलने लगे हैं।
प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद जिले के अवैध तरीकों से चल रहे कमेलों को तत्काल बंद करा दिया था। कहीं मानक पूरे न कर पाने के नाम पर तो कहीं लाइसेंस न होने के नाम पर और कहीं निर्धारित से अधिक पशुओं का कटान करने नाम पर कार्रवाई की गई थी।
लेकिन सरकार को बने अभी दो माह भी पूरे नहीं हो पाए थे कि धीरे-धीरे गुपचुप तरीके से कमेलों का संचालन शुरू करा दिया गया। जिले में चार स्लाटर हाउसों को वैध बता दिया। लेकिन उनकी आड़ में जिलेभर में कई स्लाटर हाउस अवैध रूप से चल पड़े। शहर में सिर्फ नगर निगम का एक स्लाटर हाउस बताया जा रहा है। लेकिन पशुओं का कटान शहर में ही कई जगह जमकर हो रहा है। प्रशासन इस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है। देवबंद का स्लाटर हाउस प्रशासन की नजर में पूरी तरह से बंद है। लेकिन लोगों के अनुसार देवबंद में धड़ल्ले से पशु कटान चल रहा है।
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चार ही वैध स्लाटर हाउस चल रहे हैं जिले में
अपर जिलाधिकारी एसके दुबे का कहना है कि जिले में चार स्लाटर हाउस वैध रूप से चल रहे हैं। जिनमें दो गंगोह में, एक गागलहेड़ी में और एक नगर निगम का शहर में स्लाटर हाउस चल रहा है। देवबंद में जो स्लाटर हाउस चल रहा था उसे मानक पूरे न करने के चलते बंद करा दिया गया है।
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सहारनपुर। योगी सरकार के अस्तित्व में आते ही जिले भर में कहीं लाइसेंस के नाम पर तो कहीं मानक पूरे नहीं होने के नाम पर बंद कराए गए कमेलों को आहिस्ता-आहिस्ता फिर शुरू करा दिया गया है। जिले भर में मानकों को ताक पर रखकर अवैध कटान होने लगा है। मानकों की अनदेखी कर स्लाटर हाउस भी चलने लगे हैं।
प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद जिले के अवैध तरीकों से चल रहे कमेलों को तत्काल बंद करा दिया था। कहीं मानक पूरे न कर पाने के नाम पर तो कहीं लाइसेंस न होने के नाम पर और कहीं निर्धारित से अधिक पशुओं का कटान करने नाम पर कार्रवाई की गई थी।
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लेकिन सरकार को बने अभी दो माह भी पूरे नहीं हो पाए थे कि धीरे-धीरे गुपचुप तरीके से कमेलों का संचालन शुरू करा दिया गया। जिले में चार स्लाटर हाउसों को वैध बता दिया। लेकिन उनकी आड़ में जिलेभर में कई स्लाटर हाउस अवैध रूप से चल पड़े। शहर में सिर्फ नगर निगम का एक स्लाटर हाउस बताया जा रहा है। लेकिन पशुओं का कटान शहर में ही कई जगह जमकर हो रहा है। प्रशासन इस पर पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए है। देवबंद का स्लाटर हाउस प्रशासन की नजर में पूरी तरह से बंद है। लेकिन लोगों के अनुसार देवबंद में धड़ल्ले से पशु कटान चल रहा है।
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चार ही वैध स्लाटर हाउस चल रहे हैं जिले में
अपर जिलाधिकारी एसके दुबे का कहना है कि जिले में चार स्लाटर हाउस वैध रूप से चल रहे हैं। जिनमें दो गंगोह में, एक गागलहेड़ी में और एक नगर निगम का शहर में स्लाटर हाउस चल रहा है। देवबंद में जो स्लाटर हाउस चल रहा था उसे मानक पूरे न करने के चलते बंद करा दिया गया है।