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दारुल उलूम वक्फ के सेमिनार से दारुल उलूम का किनारा

Fri, 10 Aug 2018 12:14 AM IST
Updated Fri, 10 Aug 2018 12:14 AM IST
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दारुल उलूम वक्फ के सेमिनार से दारुल उलूम का किनारा
देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम वक्फ के सदर मोहतमिम व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष स्व. मौलाना सालिम कासमी के जीवन और सेवाओं को लेकर संस्था में दो दिवसीय सेमिनार का आयोजन 12 अगस्त को किया जाएगा। इस सेमिनार को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। दारुल उलूम ने इसे गैर शरई बताते हुए इसमें शिरकत करने से इंकार कर दिया है।
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दीनी तालीम के दूसरे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ में आगामी 12 और 13 अगस्त को हुज्जतुल इस्लाम एकेडमी की ओर से मौलाना सालिम कासमी की सेवाओं और जिंदगी को लेकर सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें देवबंद समेत मुल्क के कोने कोने से करीब 150 से अधिक प्रमुख उलमा को दावतनामे भेजे गए हैं। सेमिनार को लेकर देवबंद से विरोध के स्वर उठने लगे हैं। दारुल उलूम ने इसे गैर शरई बताते हुए इसमें शिरकत करने से इंकार कर दिया है। इस संबंध में संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी और सदर मुदर्रिस मौलाना मुफ्ती सईद अहमद पालनपुरी ने दारुल उलूम वक्फ के मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी को पत्र भेजकर कार्यक्रम में आने से मना कर दिया है। मोहतमिम ने भेजे पत्र में कहा है कि सेमिनार में शिरकत के लिए दावतनामा मिला था और इसमें जाने का इरादा भी था। लेकिन बीते दिन मौलाना मुफ्ती सईद अहमद पालनपुरी ने एक पत्र भेजा जिसे वह पहले ही दारुल उलूम वक्फ को भेज चुके थे। जिसमें उन्होंने सेमिनार की शरई हैसियत व दारुल उलूम का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व मोहतमिम मौलाना मरगुबुर्रहमान, मौलाना रियासत अली, मौलाना अब्दुल रहीम और मौलाना अब्दुल हक के इंतकाल पर किसी तरह की शोकसभाएं नहीं की गईं। मौलाना सईद अहमद पालनपुरी ने जो पत्र भेजा है उसमें कहा गया है कि मैं कार्यक्रम में शिरकत नहीं करूंगा क्योंकि यह कार्यक्रम देवबंदियत के खिलाफ है और मेरी मसलक के ताल्लुक से जिम्मेदारी है। इस तरह का सेमिनार शोकसभा की श्रेणी में नहीं आता। उन्होंने कहा कि फिकहा में ये मसला साफ है कि अगर कोई दिक्कत नहीं है तो शोक तीन दिन तक किया जा सकता है। किसी शख्सियत की सेवाओं का बखान करने के लिए जो मजलिस की जाए उसे सेमिनार नहीं कहा जा सकता बल्कि यह नौहा (मातम) की शक्ल है जो शरीयत में जायज नहीं है। उन्होंने पत्र में यह भी कहा कि दारुल उलूम से जुड़े कई लोगों के इंतकाल हुए, लेकिन दारुल उलूम या बाहर किसी भी तरह का कोई कार्यक्रम नहीं किया गया। बता दें कि मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी और सदर मुदर्रिस मुफ्ती सईद अहमद पालनपुरी द्वारा भेजे गए पत्र सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वायरल हो रहे हैं। इस संबंध में दारुल उलूम के मोहतमिम से संपर्क नहीं हो सका।
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