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मानसिक रोगों के प्रति जन जागरूकता को नुक्कड़ नाटक
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सहारनपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मानसिक रोगों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जिले भर में नुक्कड़ नाटकों का मंचन कराया जाएगा। नुक्कड़ नाटक के लिए जनपद में दस स्थानों का चयन किया गया है। नाटकों की शुरूआत शुक्रवार को जिला अस्पताल परिसर से प्रमुख अधीक्षक (चिकित्सा) डॉक्टर एसके वार्ष्णेय और डॉक्टर रामनिवास ने संयुक्त रूप से फीता काटकर की।
डॉक्टर एसके वार्ष्णेय ने कहा कि मानसिक रोग कोई अभिशाप नहीं है, बल्कि यह भी एक सामान्य बीमारी है, जो किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। यदि बीमारी का समय से पता लगाकर इलाज शुरू कराया जाए तो बीमारी जल्द ठीक होने की संभावना रहती है। मानसिक रोगों के प्रति लोगों में जन जागरूकता लाने के लिए चिकित्सा विभाग जिले भर में नुक्कड़ नाटकों का मंचन कराएगा, जिनके माध्यम से मानसिक रोगों के लक्षणों की जानकारी लोगों को दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि यदि किसी परिवार में किसी व्यक्ति में उक्त लक्षण पाए जाते हैं तो वह समय रहते इलाज करा सके। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मानसिक रोग का इलाज नि:शुल्क है, जिसमें रोगियों की काउंसिलिंग भी समय-समय पर की जाती है। इस मौके पर डॉ. एके त्रिपाठी, डॉ. एके चौधरी, प्रदीप कुमार सिंह, देव कुमार, शशि कुमार सैनी, विशाल आदि मौजूद रहे।
यह हैं मानसिक रोग के लक्षण
- नींद न आना और मन उदास रहना।
- चिंता और घबराहट रहना।
- किसी भी कार्य में मन न लगना और बेवजह शक से ग्रसित होना।
- बहुत अधिक गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन होना।
- उल्टा-सीधा बोलना, जरूरत से अधिक बार-बार सफाई करना आदि।
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डॉक्टर एसके वार्ष्णेय ने कहा कि मानसिक रोग कोई अभिशाप नहीं है, बल्कि यह भी एक सामान्य बीमारी है, जो किसी भी व्यक्ति को हो सकती है। यदि बीमारी का समय से पता लगाकर इलाज शुरू कराया जाए तो बीमारी जल्द ठीक होने की संभावना रहती है। मानसिक रोगों के प्रति लोगों में जन जागरूकता लाने के लिए चिकित्सा विभाग जिले भर में नुक्कड़ नाटकों का मंचन कराएगा, जिनके माध्यम से मानसिक रोगों के लक्षणों की जानकारी लोगों को दी जाएगी। इसका मकसद यह है कि यदि किसी परिवार में किसी व्यक्ति में उक्त लक्षण पाए जाते हैं तो वह समय रहते इलाज करा सके। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में मानसिक रोग का इलाज नि:शुल्क है, जिसमें रोगियों की काउंसिलिंग भी समय-समय पर की जाती है। इस मौके पर डॉ. एके त्रिपाठी, डॉ. एके चौधरी, प्रदीप कुमार सिंह, देव कुमार, शशि कुमार सैनी, विशाल आदि मौजूद रहे।
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यह हैं मानसिक रोग के लक्षण
- नींद न आना और मन उदास रहना।
- चिंता और घबराहट रहना।
- किसी भी कार्य में मन न लगना और बेवजह शक से ग्रसित होना।
- बहुत अधिक गुस्सा आना, चिड़चिड़ापन होना।
- उल्टा-सीधा बोलना, जरूरत से अधिक बार-बार सफाई करना आदि।