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स्कूलों को मान्यता हरण के नोटिस, हड़कंप मचा
Updated Fri, 04 May 2018 11:56 PM IST
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सहारनपुर। स्कूली वाहनों की फिटनेस जांच न कराने वाले स्कूलों को माध्यमिक शिक्षा विभाग नेे मान्यताहरण के नोटिस जारी किए हैं, जिनके बाद से स्कूलों में हड़कंप की स्थिति है। जिला विद्यालय निरीक्षक ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल वाहनों की फिटनेस जांच नहीं कराते हैं तो प्रशासन कार्रवाई के लिए मजबूर होगा।
स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन सभी स्कूली वाहनों की संभागीय परिवहन विभाग के द्वारा फिटनेस की जांच करा रहा है। लगातार कहने के बावजूद 80 फीसदी से अधिक स्कूलों ने अपने वाहनों की फिटनेस जांच नहीं कराई है। ऐसे में डीएम के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग नो जांच न कराने वाले स्कूलों को नोटिस भेजा है, जिसमें वाहनों की जांच न कराने की स्थिति में मान्यताहरण की कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। कहा कि केवल बस या वैन ही नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों को ढोने वाले टेंपो और ई-रिक्शों तक की फिटनेस जांच होना जरूरी है। इस संबंध में 28 अप्रैल को सभी स्कूलों को पत्र जारी किया गया था, मगर उसके बावजूद उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई है। इस बात से डीएम खासे नाराज हैं। जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग केवल बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से वाहनों की फिटनेस की जांच करा रहा है, मगर देखने में आया है कि ज्यादातर स्कूल इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। जबकि बच्चों की सुरक्षा हम सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
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स्कूली बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन सभी स्कूली वाहनों की संभागीय परिवहन विभाग के द्वारा फिटनेस की जांच करा रहा है। लगातार कहने के बावजूद 80 फीसदी से अधिक स्कूलों ने अपने वाहनों की फिटनेस जांच नहीं कराई है। ऐसे में डीएम के निर्देश पर माध्यमिक शिक्षा विभाग नो जांच न कराने वाले स्कूलों को नोटिस भेजा है, जिसमें वाहनों की जांच न कराने की स्थिति में मान्यताहरण की कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। कहा कि केवल बस या वैन ही नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों को ढोने वाले टेंपो और ई-रिक्शों तक की फिटनेस जांच होना जरूरी है। इस संबंध में 28 अप्रैल को सभी स्कूलों को पत्र जारी किया गया था, मगर उसके बावजूद उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाई है। इस बात से डीएम खासे नाराज हैं। जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग केवल बच्चों की सुरक्षा के लिहाज से वाहनों की फिटनेस की जांच करा रहा है, मगर देखने में आया है कि ज्यादातर स्कूल इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। जबकि बच्चों की सुरक्षा हम सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए।
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