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पांचवें नवरात्र पर्व पर शाकंभरी में उमड़ी भारी भीड़
Updated Fri, 23 Mar 2018 12:16 AM IST
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बेहट (सहारनपुर)। नवरात्र के पांचवें दिन सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने घंटो लाइनों में लगकर मां शाकंभरी के दर्शन कर प्रसाद चढ़ाया। भारतीय संस्कृति उत्थान समिति द्वारा लगाए गए शिविर में भी विशेष पूजा अर्चना की गई। राणा परिवार द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
मान्यता के अनुसार श्रद्धालुओं ने पहले बाबा भूरादेव के दर्शन किए और बाद में घंटों लाइन में लगकर मां शाकंभरी देवी को प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगी। भक्तों द्वारा लगाये गये जयकारों से समूचा माहौल भक्तिमय रहा। भारतीय संस्कृति उत्थान समिति द्वारा लगाये गये शिविर में भी विशेष पूजा अर्चना की गई। इस दौरान प्रवचन करते हुए पंडित संजय प्रपन्नाचार्य ने कहा कि नवरात्र जीवन शक्ति संचय करने का पर्व होता है। वर्ष में प्रमुख रूप से दो बार नवरात्र आते हैं। दोनों ही समय में ऋतु परिवर्तन भी होता है। इस मौसम में सबसे अधिक रोगाणु फैलते हैं । जिनसे बचने का एकमात्र उपाय व्रत रहना है। व्रत रहने से हमारा शरीर आगामी ऋतु के अनुसार रक्त में परिवर्तन कर देता है। नवरात्र पर्व से अध्यात्मिक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। जो इनकी विधि पूर्वक साधना कर लेता है, उसे संसार में धर्म, अर्थ, काम की प्राप्ति होकर अंत में मोक्ष मिल जाता है।
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मान्यता के अनुसार श्रद्धालुओं ने पहले बाबा भूरादेव के दर्शन किए और बाद में घंटों लाइन में लगकर मां शाकंभरी देवी को प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगी। भक्तों द्वारा लगाये गये जयकारों से समूचा माहौल भक्तिमय रहा। भारतीय संस्कृति उत्थान समिति द्वारा लगाये गये शिविर में भी विशेष पूजा अर्चना की गई। इस दौरान प्रवचन करते हुए पंडित संजय प्रपन्नाचार्य ने कहा कि नवरात्र जीवन शक्ति संचय करने का पर्व होता है। वर्ष में प्रमुख रूप से दो बार नवरात्र आते हैं। दोनों ही समय में ऋतु परिवर्तन भी होता है। इस मौसम में सबसे अधिक रोगाणु फैलते हैं । जिनसे बचने का एकमात्र उपाय व्रत रहना है। व्रत रहने से हमारा शरीर आगामी ऋतु के अनुसार रक्त में परिवर्तन कर देता है। नवरात्र पर्व से अध्यात्मिक ऊर्जा भी प्राप्त होती है। जो इनकी विधि पूर्वक साधना कर लेता है, उसे संसार में धर्म, अर्थ, काम की प्राप्ति होकर अंत में मोक्ष मिल जाता है।
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