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संत बाबा हरिदास का मेला आज
Updated Thu, 15 Mar 2018 11:44 PM IST
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संत बाबा हरिदास का मेला आज
गंगोह। विख्यात संत बाबा हरिदास सिद्ध पीठ पर शुक्रवार को वार्षिक मेले का आयोजन होगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करने मंदिर पहुंचेंगे।
शुक्रवार सुबह ढ़ोल-नगाडों के बीच श्रद्धाभाव से मंदिर शिखर पर धर्म ध्वजा को प्रतिष्ठापित किया जाएगा। बता दें कि 14वीं शताब्दी के संत बाबा हरिदास के बारे में मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नतें मांगते हैं। एक वर्ष में ही उसकी इच्छा पूरी हो जाती है। बताते हैं कि अमन शांति का पैगाम देने वाले बाबा हरिदास की कुटया कभी नगर के पश्चिमी क्षेत्र में होती थी, जहां हजरत कुतुबे आलम की दरगाह है। हिंदु मुस्लिम को अमन चैन एवं भाईचारे का संदेश देने वाले बाबा हरिदास ने हजरत कुतबे आलम से मित्रता के चलते वह स्थान हजरत के लिए छोड़ दिया था और पूर्वी छोर पर आकर डेरा जमा लिया था। मंदिर के बराबर में ही वह धूना है जिस पर बैठ कर बाबा हरिदास धूनी लगाकर ध्यान लगाया करते थे। यहां से बाबा गांव मोहनपुरा चले गए थे। वहां उन्होंने महा निर्वाण प्राप्त कर लिया था। उनकी समाधि मोहनपुरा में ही स्थित है। गंगोह के अलावा बाबा के समाधि स्थल मोहनपुरा भी श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाने पहुंचते हैं।
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गंगोह। विख्यात संत बाबा हरिदास सिद्ध पीठ पर शुक्रवार को वार्षिक मेले का आयोजन होगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करने मंदिर पहुंचेंगे।
शुक्रवार सुबह ढ़ोल-नगाडों के बीच श्रद्धाभाव से मंदिर शिखर पर धर्म ध्वजा को प्रतिष्ठापित किया जाएगा। बता दें कि 14वीं शताब्दी के संत बाबा हरिदास के बारे में मान्यता है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से मन्नतें मांगते हैं। एक वर्ष में ही उसकी इच्छा पूरी हो जाती है। बताते हैं कि अमन शांति का पैगाम देने वाले बाबा हरिदास की कुटया कभी नगर के पश्चिमी क्षेत्र में होती थी, जहां हजरत कुतुबे आलम की दरगाह है। हिंदु मुस्लिम को अमन चैन एवं भाईचारे का संदेश देने वाले बाबा हरिदास ने हजरत कुतबे आलम से मित्रता के चलते वह स्थान हजरत के लिए छोड़ दिया था और पूर्वी छोर पर आकर डेरा जमा लिया था। मंदिर के बराबर में ही वह धूना है जिस पर बैठ कर बाबा हरिदास धूनी लगाकर ध्यान लगाया करते थे। यहां से बाबा गांव मोहनपुरा चले गए थे। वहां उन्होंने महा निर्वाण प्राप्त कर लिया था। उनकी समाधि मोहनपुरा में ही स्थित है। गंगोह के अलावा बाबा के समाधि स्थल मोहनपुरा भी श्रद्धालु प्रसाद चढ़ाने पहुंचते हैं।
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