{"_id":"5aa423694f1c1ba6758b4ac5","slug":"181520706409-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"केवीके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
केवीके
Updated Sat, 10 Mar 2018 11:56 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसानों को सिखाए उत्तम खेती के गुर
सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से ग्राम झबीरण में कृषक तकनीकी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को जायद में बोई जाने वाली फसलों की उत्तम खेती के गुर सिखाए गए। केवीके अध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. सत्यप्रकाश ने किसानों को गन्ना बुआई की ट्रेंच विधि और सहफसली खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सहफसली के तौर पर खीरा, भिंडी की बुआई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सहफसली खेती से किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। शस्य वैज्ञानिक डॉ. महावीर सिंह ने किसानों को बसंत कालीन गन्ना की बुआई के फायदों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ उर्द की पंत उर्द-31, उत्तरा, पंत उर्द-1, और मूंग की आईपीएम-1,2 और सम्राट की बुआई करने की सलाह दी। डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. आईके कुशवाहा आदि ने भी विचार रखे। सुनील कुमार, अनिल कुमार, देवी सिंह, ब्रजपाल आदि रहे।
विज्ञापन
सहारनपुर। कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से ग्राम झबीरण में कृषक तकनीकी प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें किसानों को जायद में बोई जाने वाली फसलों की उत्तम खेती के गुर सिखाए गए। केवीके अध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. सत्यप्रकाश ने किसानों को गन्ना बुआई की ट्रेंच विधि और सहफसली खेती के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सहफसली के तौर पर खीरा, भिंडी की बुआई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सहफसली खेती से किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। शस्य वैज्ञानिक डॉ. महावीर सिंह ने किसानों को बसंत कालीन गन्ना की बुआई के फायदों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ उर्द की पंत उर्द-31, उत्तरा, पंत उर्द-1, और मूंग की आईपीएम-1,2 और सम्राट की बुआई करने की सलाह दी। डॉ. प्रमोद कुमार, डॉ. आईके कुशवाहा आदि ने भी विचार रखे। सुनील कुमार, अनिल कुमार, देवी सिंह, ब्रजपाल आदि रहे।