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इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहा है सकतपुर का उत्खनन

Sun, 09 Jul 2017 12:39 AM IST
Updated Sun, 09 Jul 2017 12:39 AM IST
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इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहा है सकतपुर का उत्खनन
अभी और खुलेंगे प्राचीन सभ्यता के राज
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राजवीर सिंह
रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। कुछ महीने पहले तक जिले का सकतपुर गांव यहां की खेती-बाड़ी और गांव की बुनियादी समस्याओं तक ही सीमित था। लेकिन पुरातत्व विभाग की ओर से शुरू किए गए उत्खनन और इसमें मिले करीब 4000 साल पुरानी सभ्यता के संकेतों ने इस गांव की पहचान ही बदलकर रख दी है। सहारनपुर का यह गांव अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहा है। विशेष बात यह भी है कि उत्खनन में मिल रही सामग्री और जारी शोध पर अमर उजाला के प्रयासों से भी पुरातत्व विशेषज्ञ गदगद हैं।
सकतपुर में पुरातन सभ्यता के सर्वेक्षण की अगुवाई कर रहे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के पुरातत्च विभाग के अधीक्षण डा. भुवन विक्रम सिंह ने बताया कि 24 फरवरी 2017 से यहां खुदाई के लिए ट्रेंच बनाकर सर्वे शुरू किया गया। शुरू के एक महीने में टीम के सदस्यों को मेहनत तो बहुत करनी पड़ी। लेकिन उम्मीद के अनुरूप परिणाम नहीं मिले। लेकिन पिछले दो माह में जिस तेजी से पुरातन सभ्यता के नए-नए संकेत और सामग्री सामने आ रही है। उसके चलते टीम अब आगे शोध जारी रखने की तैयारी कर चुकी है। अभी इसमें कितना समय और लगेगा, यह कहना मुश्किल है। लेकिन हजारों साल पुरानी सभ्यता में शामिल रहन-सहन, प्रयोग होने वाले बर्तन, खानपान, सुख-सुविधाओं के अध्ययन के तमाम प्रयास किए जाएंगे।
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सात-आठ लेयर मिलीं, ये ले जाएंगी नई खोज की ओर

- डा. सिंह बताते हैं कि अब तक की खुदाई में यहां सात-आठ से अधिक लेयर मिल चुकी हैं। सात से दस फुट तक गहरी प्रत्येक लेयर यही संकेत देती है कि दशकों बाद लोगों की दिनचर्या और रहन-सहन में बड़ा बदलाव आता गया। ये लेयर भी नई खोज की ओर ले जाएंगी। ऐसी उम्मीद है।
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बड़े बर्तनों का होता था इस्तेमाल, बच्चों के थे परंपरागत खिलौने

- अब तक के शोध के मुताबिक हजारों साल पहले भी लोग शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थे। गेहूं, चावल और दाल का प्रयोग उस समय भी था। लेकिन बर्तनों के प्रयोग में बड़ा अंतर आया है। पहले ताम्र और मिट्टी के बड़े बर्तनों का प्रयोग होता था। बड़े चूल्हों या बड़ी भट्ठियों का प्रयोग बर्तनों को नए रूप देने, खाना बनाने से लेकर आंतरिक कला की जिज्ञासा को पूरी करने तक में होता रहा। हालांकि पूरा अध्ययन अभी बाकी है।

बरसात में आठ दिन तक और रहेगी टीम
- पुरातत्व विभाग की टीम के मुताबिक बरसात में खुदाई कार्य प्रभावित हो जाता है। इसलिए टीम फिलहाल सात से आठ दिन तक यहां रहेगी। इसके बाद मुख्य रूप से खुदाई में मिलीं भट्ठियों पर ही अध्ययन किया जाएगा।

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अभी तक ये मिलें सभ्यता के निशान

-तांबे की कुल्हाड़ी, ताम्र पत्र, मुष्टिका, मिट्टी के बर्तन, खिलौना गाड़ी के पहिए, कोयला, पशु आकृति, सिल-बट्टा, धातु पिंघलाने और बर्तन पकाने वाली भट्ठियां, मृदभांड सहित अन्य कई अवशेष मिले।
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