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बचपन से ही देशभक्ति की ज्वाला धधकती थी जबर के सीने में
Updated Thu, 22 Nov 2018 12:06 AM IST
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नकुड़ (सहारनपुर)। खेती से जीवन यापन करने वाले गांव भैरमऊ के किसान सिताब सिंह के घर 34 वर्ष पूर्व जन्मे शहीद जबरसिंह गुर्जर की चाहत बचपन से ही देश सेवा करने की रही। अपने इस सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने मेहनत के बलबूते कुछ ही वर्षों में बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट का पद हासिल कर लिया था। सीमा पर देश के लिए सराहनीय कार्य करने के लिए करीब ढाई महीने पहले बीएसएफ के महानिदेशक द्वारा उन्हें मेडल व प्रशस्तिपत्र देकर सम्मानित किया गया था।
डेढ़ माह बाद ही उनका कमांडेंट के पद पर प्रमोशन होना था। सोमवार की शाम जम्मू कश्मीर के सांबा सेक्टर की मंगू चक चौकी पर एसएससी सीपीओ यूनिट को प्रशिक्षण देते समय हुए बम विस्फोट में शहीद हुए जबरसिंह गुर्जर के भाई जगदीश ने बताया कि जबर शुरू से ही पढ़ाई के प्रति मेहनती रहे। पढ़ाई के साथ-साथ खेतीबाड़ी के काम भी वह बड़े ही चाव से करते थे। जबरसिंह के भतीजे अजय चौहान ने बताया कि उनके चाचा ने पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव के जूनियर हाई स्कूल से प्राप्त करने के बाद नकुड़ के नेहरू किसान विद्यालय से आठवीं तथा केएलजीएम इंटर कालेज से 10वीं की परीक्षा पास की थी, जबकि गंगोह के एचआर इंटर कालेज से इंटर तथा पूरणमल डिग्री कालेज से बीए पास करने के बाद सहारनपुर के जैन डिग्री कालेज से एलएलबी करते हुए ही 2002 में सीआईएसएफ में सिपाही के पद पर भर्ती हो गये। कुछ बड़ा करने की चाहत में 2006-7 में सीआईएसएफ की नौकरी छोड़कर बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन किया। 2009 में बीएसएफ में एग्जाम पास कर असिस्टेंट कमांडेंट बन गए थे। अजय ने बताया कि उनके शहीद चाचा 2006 में नागालैंड में तैनाती के दौरान नक्सली हमले में घायल हो गये थे। उसके बाद 2016 में उनकी तैनाती जम्मू कश्मीर के सांबा सेक्टर में हो गई। सांबा सेक्टर 173वीं बटालियन से आये असिस्टेंट कमाडेंट केके कोठारी ने बताया कि जबर सिंह बड़े ही दिलेर तथा मिलनसार और साधारण प्रवृति के व्यक्ति थे। जबरसिंह के अंडर में सांबा सेक्टर की दो चौकियां थीं। वह दुश्मनों से डट कर मुकाबला करते थे और इसी कारण पाकिस्तानी रेंजर जबर के नाम से थर्राते थे। इसी के चलते उन्हें करीब ढाई महीने पहले बीएसएफ महानिदेशक ने वीरता पुरस्कार से नवाजा था और मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।
बेटा भी बनना चाहता है बीएसएफ अफसर
नकुड़। शहीद जबर सिंह की अंतिम यात्रा में तिरंगा लेकर सबसे आगे चल रहा उनका नौ वर्षीय पुत्र हर्षित भी अपने पापा की तरह बीएसएफ में कमांडेंट बनना चाहता है। जबरसिंह के पिता सिताब सिंह ने बताया कि जबर का सपना भी अपने क्षेत्र के अधिक से अधिक युवाओं को बीएसएफ में भर्ती कराने का था। अपने पुत्र की शहादत पर उन्हें गर्व है। उनका कहना था कि वह अपने पौत्र हर्षित को भी जबर ही बनाएंगे तथा बीएसएफ में भर्ती कराएंगे। दादा की गोद में बैठा हर्षित भी बीएसएफ में जाने की इच्छा जाहिर करते हुए अपने पापा की तरह ही बनने की बात कहता है।
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डेढ़ माह बाद ही उनका कमांडेंट के पद पर प्रमोशन होना था। सोमवार की शाम जम्मू कश्मीर के सांबा सेक्टर की मंगू चक चौकी पर एसएससी सीपीओ यूनिट को प्रशिक्षण देते समय हुए बम विस्फोट में शहीद हुए जबरसिंह गुर्जर के भाई जगदीश ने बताया कि जबर शुरू से ही पढ़ाई के प्रति मेहनती रहे। पढ़ाई के साथ-साथ खेतीबाड़ी के काम भी वह बड़े ही चाव से करते थे। जबरसिंह के भतीजे अजय चौहान ने बताया कि उनके चाचा ने पांचवीं कक्षा तक की पढ़ाई गांव के जूनियर हाई स्कूल से प्राप्त करने के बाद नकुड़ के नेहरू किसान विद्यालय से आठवीं तथा केएलजीएम इंटर कालेज से 10वीं की परीक्षा पास की थी, जबकि गंगोह के एचआर इंटर कालेज से इंटर तथा पूरणमल डिग्री कालेज से बीए पास करने के बाद सहारनपुर के जैन डिग्री कालेज से एलएलबी करते हुए ही 2002 में सीआईएसएफ में सिपाही के पद पर भर्ती हो गये। कुछ बड़ा करने की चाहत में 2006-7 में सीआईएसएफ की नौकरी छोड़कर बीएसएफ में सब इंस्पेक्टर के पद पर ज्वाइन किया। 2009 में बीएसएफ में एग्जाम पास कर असिस्टेंट कमांडेंट बन गए थे। अजय ने बताया कि उनके शहीद चाचा 2006 में नागालैंड में तैनाती के दौरान नक्सली हमले में घायल हो गये थे। उसके बाद 2016 में उनकी तैनाती जम्मू कश्मीर के सांबा सेक्टर में हो गई। सांबा सेक्टर 173वीं बटालियन से आये असिस्टेंट कमाडेंट केके कोठारी ने बताया कि जबर सिंह बड़े ही दिलेर तथा मिलनसार और साधारण प्रवृति के व्यक्ति थे। जबरसिंह के अंडर में सांबा सेक्टर की दो चौकियां थीं। वह दुश्मनों से डट कर मुकाबला करते थे और इसी कारण पाकिस्तानी रेंजर जबर के नाम से थर्राते थे। इसी के चलते उन्हें करीब ढाई महीने पहले बीएसएफ महानिदेशक ने वीरता पुरस्कार से नवाजा था और मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।
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बेटा भी बनना चाहता है बीएसएफ अफसर
नकुड़। शहीद जबर सिंह की अंतिम यात्रा में तिरंगा लेकर सबसे आगे चल रहा उनका नौ वर्षीय पुत्र हर्षित भी अपने पापा की तरह बीएसएफ में कमांडेंट बनना चाहता है। जबरसिंह के पिता सिताब सिंह ने बताया कि जबर का सपना भी अपने क्षेत्र के अधिक से अधिक युवाओं को बीएसएफ में भर्ती कराने का था। अपने पुत्र की शहादत पर उन्हें गर्व है। उनका कहना था कि वह अपने पौत्र हर्षित को भी जबर ही बनाएंगे तथा बीएसएफ में भर्ती कराएंगे। दादा की गोद में बैठा हर्षित भी बीएसएफ में जाने की इच्छा जाहिर करते हुए अपने पापा की तरह ही बनने की बात कहता है।
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