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दलित क्रांति मोर्चा ने की उत्पीड़न रोकने की मांग
Updated Sun, 08 Jul 2018 12:36 AM IST
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दलित क्रांति मोर्चा ने की उत्पीड़न रोकने की मांग
सहारनपुर। दलित क्रांति मोर्चा और बौद्ध क्रांति मिशन के तत्वावधान में आयोजित बैठक में दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर रोष जताते हुए इस पर अंकुश लगाने की मांग की गई।
शनिवार को रेलवे सभागार में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जनपद में दलित और पिछड़ों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं लगातार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण को जेल में एक वर्ष से अधिक हो गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव सड़क दूधली में आज तक रविदास जयंती पर शोभायात्रा नहीं निकलने दी गई। उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल 2017 को रविदास जयंती यात्रा पर असामाजिक तत्वों ने हमला किया, इस मामले में कई निर्दोष नौजवानों जेल भेजा गया है, उन्हें भी रिहा किया जाए। उन्होंने बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए एक पृथक कानून बनाने, दलित और पिछड़ों को न्याय पालिका और निजी क्षेत्रों सहित सभी में बराबर भागीदारी दिलाई जाए। उन्होंने जाति आधारित सभी रेजीमेंटों को समाप्त कर एक राष्ट्रवादी सेना बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि महगी शिक्षा और शिक्षा के निजीकरण से गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, वंचित बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाया जाए। बाद में उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम ज्ञापन भी भेजा। राष्ट्रीय अध्यक्ष बलवंत सिंह चार्वाक, नन्हेलाल वर्मा आदि ने भी विचार रखे।
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सहारनपुर। दलित क्रांति मोर्चा और बौद्ध क्रांति मिशन के तत्वावधान में आयोजित बैठक में दलित उत्पीड़न की घटनाओं पर रोष जताते हुए इस पर अंकुश लगाने की मांग की गई।
शनिवार को रेलवे सभागार में आयोजित बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जनपद में दलित और पिछड़ों के साथ उत्पीड़न की घटनाएं लगातार हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण को जेल में एक वर्ष से अधिक हो गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। उन्होंने कहा कि गांव सड़क दूधली में आज तक रविदास जयंती पर शोभायात्रा नहीं निकलने दी गई। उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल 2017 को रविदास जयंती यात्रा पर असामाजिक तत्वों ने हमला किया, इस मामले में कई निर्दोष नौजवानों जेल भेजा गया है, उन्हें भी रिहा किया जाए। उन्होंने बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए एक पृथक कानून बनाने, दलित और पिछड़ों को न्याय पालिका और निजी क्षेत्रों सहित सभी में बराबर भागीदारी दिलाई जाए। उन्होंने जाति आधारित सभी रेजीमेंटों को समाप्त कर एक राष्ट्रवादी सेना बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि महगी शिक्षा और शिक्षा के निजीकरण से गरीब बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं, वंचित बच्चों को शिक्षा का अधिकार दिलाया जाए। बाद में उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के नाम ज्ञापन भी भेजा। राष्ट्रीय अध्यक्ष बलवंत सिंह चार्वाक, नन्हेलाल वर्मा आदि ने भी विचार रखे।
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