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73 वें पंचायत राज संशोधन अधिनियम लागू करने की मांग

Sun, 15 Apr 2018 02:16 AM IST
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:16 AM IST
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73 वें पंचायत राज संशोधन अधिनियम लागू करने की मांग
73वें पंचायत राज संशोधन अधिनियम लागू करने की मांग
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गंगोह। ग्राम प्रधानों की बैठक में 73 वां पंचायती राज संशोधन अधिनियम एक समान रूप से लागू करने और विधायक निधि के समान प्रधान निधि को भी जीएसटी से मुक्त रखने की मांग की गई। इसके अलावा मांग की गई कि ओडीएफ होने वाले गांव की घोषणा के समय ही अधिकारियों की प्रमाणिकता संस्तुति की जानी चाहिए, ताकि प्रधानों के सिर पर बार बार जांच की तलवार न लटकी रहे।
खंड विकास कार्यालय पर आहूत बैठक में आल इंडिया प्रधान संघ के प्रदेश प्रवक्ता सुनील लाठर ने 73वें पंचायत राज संशोधन अधिनियम के प्रावधानों के साथ ही प्रधानों का वेतन और पेंशन को उत्तराखंड के समान लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि ओडीएफ होने वाले गांव की घोषणा करते समय ही बीडीओ एवं सीडीओ द्वारा सत्यापित होना जरूरी किया जाना चाहिए ताकि रोज रोज की जांच का झंझट न रहे। जिलाध्यक्ष सतवीर यादव, उपाध्यक्ष संजय कम्हेड़ा और महासचिव संदीप यादव ने प्रधानों को सुझाया कि वे मौखिक आदेशों पर कोई निर्माण न करें और ईमानदारी से अपने काम को अंजाम दें। उन्होंने कहा कि अफसरशाही के उत्पीड़न के खिलाफ संगठन उनके साथ है। अध्यक्षता प्रधान शादीराम शर्मा चकवाली व संचालन प्रधान विनोद जुखेड़ी ने किया। वक्ताओं में प्रधान वीर सैन, संजय कम्हेड़ा, नफेसिंह, गुलफाम कुंडा, मुनेश जेहरा, वेदपाल तातारपुर कलां, तेजपाल अलीपुरा, बालेश बन्दाहेड़ी, तनवीर बालू, इकराम ताताहेड़ी आदि रहे। ताहिर प्रधान खानपुर, समयदीन, प्रीतम सैनी, गुलजमां खान सहित बड़ी संख्या में प्रधान मौजूद रहे।
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गबन की जांच के लिए समिति गठित
गंगोह। बैठक में जिला उपाध्यक्ष संजय कम्हेड़ा ने कहा कि प्रशासन ने गांव कुंडाकलां की महिला ग्राम प्रधान के खिलाफ 52 लाख रुपये की राशि में 48 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की है। बताया कि प्रधान संगठन द्वारा इस मामले की जांच के लिए 11 सदस्यीय प्रधानों की जांच समिति का गठन किया है। समिति गांव में जाकर किए गए विकास कार्यो की अपने स्तर से जांच करेगी। यदि कुंडाकलां के ग्राम प्रधान और सचिव दोषी नहीं हैं तो प्रधान संगठन उनका उत्पीड़न नहीं होने देगा और प्रशासन से आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। ब्लाक अध्यक्ष विनोद प्रधान की अध्यक्षता में गठित समिति में जिला संगठन के लोग भी शामिल रहेंगे। आरोप लगाया गया कि जांच अधिकारी द्वारा रिपोर्ट सही लगाने के नाम पर चार लाख रुपये की मांग किये जाने की बात भी सामने आई है।
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