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चौराहों पर लग रहा रफ्तार पर ब्रेक
Updated Wed, 06 Dec 2017 12:33 AM IST
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सहारनपुर। प्रशासन की अनदेखी की वजह से शहर भर में अतिक्रमण और अनाधिकृत रूप से बने टेंपो और ई रिक्शा स्टैंड की वजह से जनता परेशान है। आलम यह है कि शहर भर में फर्राटे भरने वाले वाहनों की रफ्तार पर चौराहों पर आकर ब्रेक लग रहा है। घंटाघर इसका बेहतर उदाहरण है। जहां से प्रशासन अभी तक अनाधिकृत रूप से संचालित हो रहे टेंपो को हटाने में विफल रहा है। अभी तक चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान भी फेल ही साबित हुए हैं।
घंटाघर चौक पर कचहरी की ओर जाने वाली सड़क से टेंपो का संचालन हो रहा है। बाकायदा यहां ठेकेदार टेंपो का संचालन कराता है। चौबीसों घंटे पांच से आठ टेंपो सड़क पर रहते हैं, जिसकी वजह से यातायात व्यवस्था गड़बड़ा रही है। देहरादून रोड के लिए भी घंटाघर के दूसरे छोर से टेंपो मिलते हैं। यहां भी 15 से 20 टेंपो हर समय सड़क पर खड़े होते हैं, जिसकी वजह से जाम रहता है। चकराता रोड के लिए ई रिक्शा और टेंपो भी घंटाघर पर ऑनरोड ही खड़े होते हैं, जिनकी वजह से राहगीरों खासकर वाहनों को निकलने में परेशानी रहती है। जनकपुरी चौक की हालत भी ऐसी ही है। यहां भी टेंपों के अनाधिकृत स्टैंड बने हुए हैं, जिनकी वजह से सड़क पर जगह कम रहती है। यहां कई बार हादसे भी हो चुके हैं। कुतुबशेर चौराहे पर पुलिस ने बेरीकेड लगाकर एक छोर बंद किया हुआ है। ऐसे में गुरुद्वारा रोड से यदि किसी को मंडी की ओर जाना है तो दूर से घूमकर आना पड़ता है। इसकी वजह से यहां भी अक्सर जाम रहता है। बेहट बस स्टैंड तिराहे पर तमाम टेंपो और ई रिक्शा सड़क पर खड़े होकर सवारियां भरते हैं। यहां फलों की रेहड़ियां भी सड़क पर करीब 20 फुट आगे लगती हैं। इसकी वजह से 30 से 40 फुट की एक साइड की सड़क मुश्किल से 10 से 12 फुट बचती है। इसकी वजह से यातायात प्रभावित रहता है। यहां करीब तीन महीने पहले एक छात्र को ट्रक से कुचल दिया था। उसके बावजूद प्रशासन या यातायात विभाग यहां से अतिक्रमण और अनाधिकृत रूप से खड़े होने वाले टेंपो और ई रिक्शाओं को हटवा नहीं सका है। पुराना चिलकाना अड्डा तिराहे पर भी टेंपो खड़े होने से यातायात प्रभावित रहता है। इस प्रकार शहर के तमाम चौराहों और तिराहों पर शहर की रफ्तार पर ब्रेक लग रहा है।
ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था नहीं हो सकी कामयाब
करीब दो वर्ष पहले शहर के प्रमुख चौराहों और तिराहों पर ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था शुरू की गई थी। करीब छह महीने यह व्यवस्था चलने के बाद बंद हो गई। वर्तमान में शहर के सभी चौराहों और तिराहों पर यातायात पुलिस, होमगार्ड और पीआरडी के जवान यातायात को संचालित कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि करीब दो साल से बंद पड़ी लाइटों की बेटरी भी खराब हो चुकी हैं।
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सड़कों पर खड़े होकर यातायात को प्रभावित करने वाले टेंपो और अन्य वाहनों के हमारा विभाग समय-समय पर चालान काटता रहा है। हमारी कई गाड़ियां शहर में यह चेक करती हैं कि कोई वाहन सड़क पर न खड़ा हो। घंटाघर समेत कई जगहों पर से अनाधिकृत रूप से बने टेंपो या अन्य स्टैंड को हटवाने के लिए नगर निगम को पत्र लिखा गया है।
विनीत भटनागर, एसपी ट्रैफिक।
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घंटाघर चौक पर कचहरी की ओर जाने वाली सड़क से टेंपो का संचालन हो रहा है। बाकायदा यहां ठेकेदार टेंपो का संचालन कराता है। चौबीसों घंटे पांच से आठ टेंपो सड़क पर रहते हैं, जिसकी वजह से यातायात व्यवस्था गड़बड़ा रही है। देहरादून रोड के लिए भी घंटाघर के दूसरे छोर से टेंपो मिलते हैं। यहां भी 15 से 20 टेंपो हर समय सड़क पर खड़े होते हैं, जिसकी वजह से जाम रहता है। चकराता रोड के लिए ई रिक्शा और टेंपो भी घंटाघर पर ऑनरोड ही खड़े होते हैं, जिनकी वजह से राहगीरों खासकर वाहनों को निकलने में परेशानी रहती है। जनकपुरी चौक की हालत भी ऐसी ही है। यहां भी टेंपों के अनाधिकृत स्टैंड बने हुए हैं, जिनकी वजह से सड़क पर जगह कम रहती है। यहां कई बार हादसे भी हो चुके हैं। कुतुबशेर चौराहे पर पुलिस ने बेरीकेड लगाकर एक छोर बंद किया हुआ है। ऐसे में गुरुद्वारा रोड से यदि किसी को मंडी की ओर जाना है तो दूर से घूमकर आना पड़ता है। इसकी वजह से यहां भी अक्सर जाम रहता है। बेहट बस स्टैंड तिराहे पर तमाम टेंपो और ई रिक्शा सड़क पर खड़े होकर सवारियां भरते हैं। यहां फलों की रेहड़ियां भी सड़क पर करीब 20 फुट आगे लगती हैं। इसकी वजह से 30 से 40 फुट की एक साइड की सड़क मुश्किल से 10 से 12 फुट बचती है। इसकी वजह से यातायात प्रभावित रहता है। यहां करीब तीन महीने पहले एक छात्र को ट्रक से कुचल दिया था। उसके बावजूद प्रशासन या यातायात विभाग यहां से अतिक्रमण और अनाधिकृत रूप से खड़े होने वाले टेंपो और ई रिक्शाओं को हटवा नहीं सका है। पुराना चिलकाना अड्डा तिराहे पर भी टेंपो खड़े होने से यातायात प्रभावित रहता है। इस प्रकार शहर के तमाम चौराहों और तिराहों पर शहर की रफ्तार पर ब्रेक लग रहा है।
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ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था नहीं हो सकी कामयाब
करीब दो वर्ष पहले शहर के प्रमुख चौराहों और तिराहों पर ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था शुरू की गई थी। करीब छह महीने यह व्यवस्था चलने के बाद बंद हो गई। वर्तमान में शहर के सभी चौराहों और तिराहों पर यातायात पुलिस, होमगार्ड और पीआरडी के जवान यातायात को संचालित कर रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि करीब दो साल से बंद पड़ी लाइटों की बेटरी भी खराब हो चुकी हैं।
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सड़कों पर खड़े होकर यातायात को प्रभावित करने वाले टेंपो और अन्य वाहनों के हमारा विभाग समय-समय पर चालान काटता रहा है। हमारी कई गाड़ियां शहर में यह चेक करती हैं कि कोई वाहन सड़क पर न खड़ा हो। घंटाघर समेत कई जगहों पर से अनाधिकृत रूप से बने टेंपो या अन्य स्टैंड को हटवाने के लिए नगर निगम को पत्र लिखा गया है।
विनीत भटनागर, एसपी ट्रैफिक।