{"_id":"599b2f194f1c1b79098b492c","slug":"171503342361-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गीत संग्रह का विमोचन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गीत संग्रह का विमोचन
Updated Tue, 22 Aug 2017 12:36 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी वालों ने बढ़ाया गजल का सौंदर्य: डॉ. अश्वघोष
सहारनपुर। प्रख्यात गीतकार राजेंद्र राजन के गजल संग्रह ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ का लोकार्पण जीपीओ रोड स्थित एक सभागार में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नरेंद्र मस्ताना की सरस्वती वंदना व दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। साहित्यकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि गीत में एक केंद्रीय भाव का निर्वहन किया जाता है, जबकि गजल में स्वतंत्रता होती है। राजेंद्र राजन की गजलों में मुहावरे का दर्शनीय प्रयोग हुआ है। जो वह गीतों में नहीं कह पाये वह उन्होंने गजल में कहा है। अभी तक उनका गीतों पर हक था लेकिन अब उन्होंने गजलों पर भी कब्जा कर लिया है। गजलकार डॉ. अश्वघोष ने कहा कि गजल एक सर्वग्राह्य विधा है, हिंदी के जिन लोगों ने गजल लिखना शुरू किया उन्होंने गजल का नुकसान नहीं किया बल्कि उसका सौंदर्य ही बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि राजन की गजलों में जबरदस्त कहन तो है ही साथ ही उनमें टूटते सामाजिक मूल्यों और टूटते रिश्तों के अलावा बाजारवाद तथा अन्य सामाजिक सरोकार भी दिखायी देते हैं। वरिष्ठ गीतकार दिनेश प्रभात ने राजन की गजलें सामाजिक सरोकारों को लेकर उनकी छटपटाहट आकाश छू लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि गजल कम शब्दों में ज्यादा बात करती हैं। ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ पुस्तक के रचनाकार राजेंद्र राजन ने कहा कि गीत का स्वरूप किसी जुडे़ में टांके गए फूल की तरह है और गजल सेज पर फूल की पत्तियों के बिखराव का सौंदर्य है। उन्होंने कहा कि मेरी गजलें मेरे अहसास से टपकती हुई बूंदों का लिखित बयान हैं। संजीव झिंगरन ने लोकार्पित संग्रह से दो गजलों का संगीत के साथ सस्वर पाठ और आशा ने एक गजल की प्रस्तुति ने माहौल में समां बांध दिया। संस्थाध्यक्ष कृष्ण शलभ ने अतिथियों का आभार जताया। संचालन डॉ. आर पी सारस्वत ने किया। अध्यक्षता देहरादून से आए साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने की। संत कुमार, प्रदीप जैन, अनुराधा शर्मा, सुरेश सपन, एसके सैनी, शिवराज राजू, बसंत सिंह , पूर्व विधायक सुरेंद्र कपिल, शिव गौड़, जावेद खां सरोहा, डॉ. इरशाद सागर, जावेद अरसी, आसिफ शम्सी, सुनील जैन राना, हरीराम पथिक, गोकरणदत्त शर्मा, विनोद भृंग, शिवराज राजू, डॉ. वीरेंद्र आजम, अजय भारद्वाज, विभा शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, नरेंद्र शर्मा, विपिन शर्मा, मोहित संगम, विपिन गिरी, कुमार पल्लव, प्रशांत राजन, डॉ. सपना सिंह, श्रद्धानंद शर्मा व देशराज शर्मा आदि रहे।
विज्ञापन
सहारनपुर। प्रख्यात गीतकार राजेंद्र राजन के गजल संग्रह ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ का लोकार्पण जीपीओ रोड स्थित एक सभागार में किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नरेंद्र मस्ताना की सरस्वती वंदना व दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। साहित्यकार डॉ बुद्धिनाथ मिश्र ने कहा कि गीत में एक केंद्रीय भाव का निर्वहन किया जाता है, जबकि गजल में स्वतंत्रता होती है। राजेंद्र राजन की गजलों में मुहावरे का दर्शनीय प्रयोग हुआ है। जो वह गीतों में नहीं कह पाये वह उन्होंने गजल में कहा है। अभी तक उनका गीतों पर हक था लेकिन अब उन्होंने गजलों पर भी कब्जा कर लिया है। गजलकार डॉ. अश्वघोष ने कहा कि गजल एक सर्वग्राह्य विधा है, हिंदी के जिन लोगों ने गजल लिखना शुरू किया उन्होंने गजल का नुकसान नहीं किया बल्कि उसका सौंदर्य ही बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि राजन की गजलों में जबरदस्त कहन तो है ही साथ ही उनमें टूटते सामाजिक मूल्यों और टूटते रिश्तों के अलावा बाजारवाद तथा अन्य सामाजिक सरोकार भी दिखायी देते हैं। वरिष्ठ गीतकार दिनेश प्रभात ने राजन की गजलें सामाजिक सरोकारों को लेकर उनकी छटपटाहट आकाश छू लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि गजल कम शब्दों में ज्यादा बात करती हैं। ‘‘मुझे आसमान देकर...’’ पुस्तक के रचनाकार राजेंद्र राजन ने कहा कि गीत का स्वरूप किसी जुडे़ में टांके गए फूल की तरह है और गजल सेज पर फूल की पत्तियों के बिखराव का सौंदर्य है। उन्होंने कहा कि मेरी गजलें मेरे अहसास से टपकती हुई बूंदों का लिखित बयान हैं। संजीव झिंगरन ने लोकार्पित संग्रह से दो गजलों का संगीत के साथ सस्वर पाठ और आशा ने एक गजल की प्रस्तुति ने माहौल में समां बांध दिया। संस्थाध्यक्ष कृष्ण शलभ ने अतिथियों का आभार जताया। संचालन डॉ. आर पी सारस्वत ने किया। अध्यक्षता देहरादून से आए साहित्यकार डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र ने की। संत कुमार, प्रदीप जैन, अनुराधा शर्मा, सुरेश सपन, एसके सैनी, शिवराज राजू, बसंत सिंह , पूर्व विधायक सुरेंद्र कपिल, शिव गौड़, जावेद खां सरोहा, डॉ. इरशाद सागर, जावेद अरसी, आसिफ शम्सी, सुनील जैन राना, हरीराम पथिक, गोकरणदत्त शर्मा, विनोद भृंग, शिवराज राजू, डॉ. वीरेंद्र आजम, अजय भारद्वाज, विभा शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, नरेंद्र शर्मा, विपिन शर्मा, मोहित संगम, विपिन गिरी, कुमार पल्लव, प्रशांत राजन, डॉ. सपना सिंह, श्रद्धानंद शर्मा व देशराज शर्मा आदि रहे।