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वाणिज्यकर विभाग
Updated Wed, 12 Jul 2017 12:31 AM IST
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जीएसटी से इंस्पेक्टर राज होगा खत्म : एडिशनल कमिश्नर
सहारनपुर। वाणिज्यकर विभाग के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1 ने कहा कि जीएसटी लागू होने से इंस्पेक्टर राज का खात्मा हो जाएगा। बिना अधिकारी की अनुमति के कोई भी अधीनस्थ किसी व्यापारी की किसी प्रकार की जांच नहीं कर पायेगा। व्यापारियों की मदद के लिए संभागीय एवं जिला कार्यालय में जीएसटी हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है।
मंगलवार को दिल्ली रोड स्थित कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए एडिशनल कमिश्नर अनिल पाठक ने कहा कि व्यापारियों की एचएसएन कोड एवं कर की दर से संबंधित समस्याओं के लिए सरकार ने जीएसटी रेट फाइंडर नाम से एप्प बनाया है। जो प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। एक सवाल के जवाब में डिप्टी कमिश्नर प्रशासन अनिल कुमार ने बताया कि एचएसएन कोड की व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर वस्तु एवं सेवाओं की पहचान एवं वर्गीकरण के लिए है। इससे किसी वस्तु के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित अलग अलग नामों के बावजूद उसकी पहचान सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने बताया कि सालाना डेढ़ करोड़ से कम के व्यापारियों के लिए एचएसएन कोड का उल्लेख करना जरूरी नही है। डेढ़ से पांच करोड़ तक 2 अंक एवं उसके ऊपर 4 अंकीय कोड लिखना होगा। निर्यातक को 8 अंकीय एचएसएन कोड अपने बिल पर लिखना होगा। जीएसटी हेल्प डेस्क के नोडल अधिकारी एवं असिस्टेंट कमिश्नर सुनील सत्यम ने ने भी जानकारी दी। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 2 अपील अशफाक अहमद, ज्वाइंट कमिश्नर बाबूराम आदि रहे। जीएसटी के नोडल अधिकारी और असिस्टेंट कमिश्नर सुनील सत्यम, ज्वाइंट कमिश्नर बाबूराम आदि मौजूद रहे।
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सहारनपुर। वाणिज्यकर विभाग के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 1 ने कहा कि जीएसटी लागू होने से इंस्पेक्टर राज का खात्मा हो जाएगा। बिना अधिकारी की अनुमति के कोई भी अधीनस्थ किसी व्यापारी की किसी प्रकार की जांच नहीं कर पायेगा। व्यापारियों की मदद के लिए संभागीय एवं जिला कार्यालय में जीएसटी हेल्प डेस्क की स्थापना की गई है।
मंगलवार को दिल्ली रोड स्थित कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए एडिशनल कमिश्नर अनिल पाठक ने कहा कि व्यापारियों की एचएसएन कोड एवं कर की दर से संबंधित समस्याओं के लिए सरकार ने जीएसटी रेट फाइंडर नाम से एप्प बनाया है। जो प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। एक सवाल के जवाब में डिप्टी कमिश्नर प्रशासन अनिल कुमार ने बताया कि एचएसएन कोड की व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर वस्तु एवं सेवाओं की पहचान एवं वर्गीकरण के लिए है। इससे किसी वस्तु के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित अलग अलग नामों के बावजूद उसकी पहचान सुनिश्चित हो सकेगी। उन्होंने बताया कि सालाना डेढ़ करोड़ से कम के व्यापारियों के लिए एचएसएन कोड का उल्लेख करना जरूरी नही है। डेढ़ से पांच करोड़ तक 2 अंक एवं उसके ऊपर 4 अंकीय कोड लिखना होगा। निर्यातक को 8 अंकीय एचएसएन कोड अपने बिल पर लिखना होगा। जीएसटी हेल्प डेस्क के नोडल अधिकारी एवं असिस्टेंट कमिश्नर सुनील सत्यम ने ने भी जानकारी दी। एडिशनल कमिश्नर ग्रेड 2 अपील अशफाक अहमद, ज्वाइंट कमिश्नर बाबूराम आदि रहे। जीएसटी के नोडल अधिकारी और असिस्टेंट कमिश्नर सुनील सत्यम, ज्वाइंट कमिश्नर बाबूराम आदि मौजूद रहे।
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