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मलेरिया के साथ पीलिया का हमला
Updated Tue, 08 Aug 2017 12:36 AM IST
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सहारनपुर। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों में मलेरिया के साथ पीलिया के मरीज भी काफी संख्या में पहुंच रहे हैं। ऐसे मरीज भी आ रहे हैं जो मलेरिया से पीड़ित हैं और उनमें तेजी से हेपेटाइटिस के लक्षण उभर रहे हैं। इस तरह के रोगियों का इलाज काफी जटिल हो रहा है। इसलिए ऐसे रोगी हायर सेंटर रेफर किए जा रहे हैं।
आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. कलीम अहमद बताते हैं कि उनके पास आने वाले बुखार के 200 मरीजों में मलेरिया के साथ पीलिया के लक्षणों वाले मरीज 40 से 55 तक मिल रहे हैं। उनका मानना है कि बरसाती मौसम में मच्छरों के साथ ही दूषित जल और खानपान की समस्या के कारण हेपेटाइटिस वाले मरीज बढ़े हैं। पिछले सालों के मुकाबले इस बार मलेरिया का करेक्टर भी बदल रहा है। अब मलेरिया मरीज में बुखार के साथ ही लीवर पर बुरा असर पड़ रहा है। ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से घट रही हैं।
फिजिशियन डॉ. अंकुर उपाध्याय और डॉ. संजीव मिगलानी भी मानते हैं कि बरसाती मौसम में मलेरिया के साथ पीलिया पीड़ित मरीज आ रहे हैं। इस मौसम में खानपान पर खास ध्यान देने की जरूरत है। उबला हुआ या फिर आरओ युक्त पानी पीने, खुला, कटा और बासी भोजन न करने, गरिष्ठ भोजन न करने और मच्छरों से बचाव के साधनों पर ध्यान देने से सेहत को कुछ हद तक बचाया जा सकता है।
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आईएमए के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. कलीम अहमद बताते हैं कि उनके पास आने वाले बुखार के 200 मरीजों में मलेरिया के साथ पीलिया के लक्षणों वाले मरीज 40 से 55 तक मिल रहे हैं। उनका मानना है कि बरसाती मौसम में मच्छरों के साथ ही दूषित जल और खानपान की समस्या के कारण हेपेटाइटिस वाले मरीज बढ़े हैं। पिछले सालों के मुकाबले इस बार मलेरिया का करेक्टर भी बदल रहा है। अब मलेरिया मरीज में बुखार के साथ ही लीवर पर बुरा असर पड़ रहा है। ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से घट रही हैं।
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फिजिशियन डॉ. अंकुर उपाध्याय और डॉ. संजीव मिगलानी भी मानते हैं कि बरसाती मौसम में मलेरिया के साथ पीलिया पीड़ित मरीज आ रहे हैं। इस मौसम में खानपान पर खास ध्यान देने की जरूरत है। उबला हुआ या फिर आरओ युक्त पानी पीने, खुला, कटा और बासी भोजन न करने, गरिष्ठ भोजन न करने और मच्छरों से बचाव के साधनों पर ध्यान देने से सेहत को कुछ हद तक बचाया जा सकता है।
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