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सपा के सहारे बसपा को मिल गई संजीवनी
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सहारनपुर। कभी बसपा का गढ़ माने जाने वाले सहारनपुर में एक बार फिर बसपा को संजीवनी मिल गई है। यह संजीवनी गठबंधन से मिली है। विधानसभा चुनाव में सूपड़ा साफ होने के बाद बसपा का यह पुनर्जीवन माना जा रहा है। इससे बसपा कार्यकर्ता उत्साहित हैं और इस जीत से बसपा अब भविष्य की तस्वीर देख रही है।
पिछले विधानसभा चुनावों की असफलता को छोड़ दें तो सहारनपुर काफी समय से बसपा का गढ़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी दो बार सहारनपुर जनपद में ही विधानसभा चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनीं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों से पूर्व जिले की सात विधानसभा सीटों में से तीन सीटों पर बसपा के विधायक रहे थे। जबकि उससे पूर्व बसपा शासन में सहारनपुर से पांच विधायक थे। वर्ष 2009 में लोकसभा सीट पर भी बसपा का ही कब्जा रहा था। बसपा के जगदीश राणा सहारनपुर से सांसद बने थे। यही नहीं सहारनपुर लोकसभा से बसपा संस्थापक कांशीराम भी चुनाव लड़े थे। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिल सकी थी।
लेकिन 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सहारनपुर से बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था। सहारनपुर की सात विधानसभा सीटों में से एक भी सीट पर बसपा का विधायक नहीं बन सका। अब लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन हुआ और सपा का साथ मिला तो जीत की उम्मीद लग गई। सपा का साथ मिलने के बाद अनुसूचित वर्ग के अलावा मुस्लिम भी बसपा से जुड़ गए। बसपा ने टिकट भी मुस्लिम उम्मीदवार हाजी फजलुर्रहमान को देकर जीत की नींव रखी।
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कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस द्वारा इमरान मसूद को प्रत्याशी बनाए जाने से मुस्लिम मतदाताओं का बंटवारा हो जाएगा। बंटवारा तो हुुआ, लेकिन इतना बंटवारा नहीं हो सका, जितने की आशंका जताई जा रही थी। जिसका फायदा बसपा को हुआ। सपा के समर्थन और मुस्लिम उम्मीदवार होने के चलते मुस्लिमों का बसपा को साथ मिला और सहारनपुर सीट पर बसपा ने जीत का परचम लहरा दिया। सपा, रालोद के समर्थन से मिली इस जीत ने विधानसभा चुनावों में हार के बाद पार्टी में छाई मायूसी छंट गई। कार्यकर्ता न सिर्फ उत्साहित नजर आ रहे हैं, बल्कि लोकसभा चुनाव में जीत के बाद आगे भी जीत की उम्मीद जगी है।
गठबंधन होने से मिली जीत : ऋषिपाल सिंह
बसपा जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह मानते हैं कि गठबंधन होने के कारण बसपा प्रत्याशी को जीत मिली है। उनका कहना है कि सपा पदाधिकारियों का पूरा सहयोग मिला। मुस्लिम मतदाताओं ने पूरा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं में इस जीत के बाद उत्साह है। इससे भविष्य में भी जीत का भरोसा बढ़ा है।
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पिछले विधानसभा चुनावों की असफलता को छोड़ दें तो सहारनपुर काफी समय से बसपा का गढ़ रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी दो बार सहारनपुर जनपद में ही विधानसभा चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बनीं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों से पूर्व जिले की सात विधानसभा सीटों में से तीन सीटों पर बसपा के विधायक रहे थे। जबकि उससे पूर्व बसपा शासन में सहारनपुर से पांच विधायक थे। वर्ष 2009 में लोकसभा सीट पर भी बसपा का ही कब्जा रहा था। बसपा के जगदीश राणा सहारनपुर से सांसद बने थे। यही नहीं सहारनपुर लोकसभा से बसपा संस्थापक कांशीराम भी चुनाव लड़े थे। हालांकि उन्हें जीत नहीं मिल सकी थी।
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लेकिन 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में सहारनपुर से बसपा का सूपड़ा साफ हो गया था। सहारनपुर की सात विधानसभा सीटों में से एक भी सीट पर बसपा का विधायक नहीं बन सका। अब लोकसभा चुनाव के लिए गठबंधन हुआ और सपा का साथ मिला तो जीत की उम्मीद लग गई। सपा का साथ मिलने के बाद अनुसूचित वर्ग के अलावा मुस्लिम भी बसपा से जुड़ गए। बसपा ने टिकट भी मुस्लिम उम्मीदवार हाजी फजलुर्रहमान को देकर जीत की नींव रखी।
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कयास लगाए जा रहे थे कि कांग्रेस द्वारा इमरान मसूद को प्रत्याशी बनाए जाने से मुस्लिम मतदाताओं का बंटवारा हो जाएगा। बंटवारा तो हुुआ, लेकिन इतना बंटवारा नहीं हो सका, जितने की आशंका जताई जा रही थी। जिसका फायदा बसपा को हुआ। सपा के समर्थन और मुस्लिम उम्मीदवार होने के चलते मुस्लिमों का बसपा को साथ मिला और सहारनपुर सीट पर बसपा ने जीत का परचम लहरा दिया। सपा, रालोद के समर्थन से मिली इस जीत ने विधानसभा चुनावों में हार के बाद पार्टी में छाई मायूसी छंट गई। कार्यकर्ता न सिर्फ उत्साहित नजर आ रहे हैं, बल्कि लोकसभा चुनाव में जीत के बाद आगे भी जीत की उम्मीद जगी है।
गठबंधन होने से मिली जीत : ऋषिपाल सिंह
बसपा जिलाध्यक्ष ऋषिपाल सिंह मानते हैं कि गठबंधन होने के कारण बसपा प्रत्याशी को जीत मिली है। उनका कहना है कि सपा पदाधिकारियों का पूरा सहयोग मिला। मुस्लिम मतदाताओं ने पूरा सहयोग मिला। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं में इस जीत के बाद उत्साह है। इससे भविष्य में भी जीत का भरोसा बढ़ा है।