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चिट्ठी लिखकर घर से गया छात्र दिल्ली में मिला
Updated Sat, 01 Sep 2018 12:29 AM IST
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देवबंद (सहारनपुर)। परिजनों को घर में सोता हुआ छोड़कर घर से गए दसवीं कक्षा के छात्र राजदेव उर्फ प्रियांशु ने शुक्रवार को उसने स्वयं पिता को फोन कर बताया कि वह पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर है। जहां से उसे परिजन वापस लेकर आए।
बृहस्पतिवार की सुबह मोहल्ला सराय मालियान निवासी महेश चंद का 15 वर्षीय बेटा राजदेव उर्फ प्रियांशु घरवालों को सोता हुआ छोड़कर घर से चला गया था। बाद में परिजनों को एक चिट्ठी रखी हुई मिली। जिसमें राजदेव ने लिखा था कि मम्मी पापा मैं जहां से आया वहीं पर जा रहा हूं। जिसके बाद से लगातार परिजन उसकी तलाश में खाक छान रहे थे। शुक्रवार को राजदेव ने स्वयं फोन कर बताया कि वह पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मौजूद है और वह उसे आकर ले जाएं। राजदेव की जानकारी मिलते ही परिजनों में खुशी का माहौल बन गया। तुरंत ही महेश चंद कुछ लोगों को साथ लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गया। देर शाम वह बेटे को लेकर घर पहुंचा। उसके पहुंचे ही दुखी मां की आंखों से आंसू छलक आए और उसने उसने सीने से चिपका लिया। महेश चंद ने बताया कि बेटे ने रेलवे स्टेशन पर पानी बेचने का काम करने वाले एक व्यक्ति के मोबाइल से सुबह करीब 6.30 बजे उसे फोन किया और बताया कि वह दिल्ली स्टेशन पर मौजूद है। महेश ने बताया कि राजदेव ने अभी तक इतना ही बताया है कि वह ट्रेन से दिल्ली गया था। रातभर न सोने की वजह से वह गाड़ी में भी सोता हुआ आया है।
अब साधारणपुर में दिखा तेंदुआ, ग्रामीणों में दहशत
देवबंद। मोहिउद्दीनपुर के बाद अब साधारणपुर में तेंदुआ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए आरोप है कि वन विभाग के पास तेंदुए को पकड़ने के लिए संसाधन तक मौजूद नहीं है। ऐसे में बच्चों ने स्कूल तक जाना बंद कर दिया है।
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दो दिन पूर्व मोहिउद्दीनपुर गांव के जंगल में तेंदुआ दिखाई देने के बाद ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। लोग खेतों पर भी डरते हुए जा रहे हैं। अब वही दहशत साधारणपुर के ग्रामीणों में बन गई है। ग्रामीणों के मुताबिक बृहस्पतिवार की रात्रि उन्होंने गांव के स्कूल की छत पर तेंदुए को देखा है। जिसके बाद वनविभाग को इसकी जानकारी दी गई। अधिकारी देर रात्रि तक तेंदुए की तलाश में जुटे रहे। लेकिन वह कहीं दिखाई नहीं दिया। लोगों का आरोप है कि वनविभाग की टीम आधी अधूरी तैयारी के साथ तेंदुए की तलाश कर रही है। उनके पास तेंदुए को पकडने के संसाधन तक नहीं है। ऐसे में अगर तेंदुआ अधिकारियों को दिखाई भी देता है तो उसे पकडना मुश्किल होगा। गांव के लोगों का कहना है कि तेंदुए के खौफ के चलते उन्होंने बच्चों को भी स्कूल भेजना बंद कर दिया है।
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बृहस्पतिवार की सुबह मोहल्ला सराय मालियान निवासी महेश चंद का 15 वर्षीय बेटा राजदेव उर्फ प्रियांशु घरवालों को सोता हुआ छोड़कर घर से चला गया था। बाद में परिजनों को एक चिट्ठी रखी हुई मिली। जिसमें राजदेव ने लिखा था कि मम्मी पापा मैं जहां से आया वहीं पर जा रहा हूं। जिसके बाद से लगातार परिजन उसकी तलाश में खाक छान रहे थे। शुक्रवार को राजदेव ने स्वयं फोन कर बताया कि वह पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मौजूद है और वह उसे आकर ले जाएं। राजदेव की जानकारी मिलते ही परिजनों में खुशी का माहौल बन गया। तुरंत ही महेश चंद कुछ लोगों को साथ लेकर दिल्ली के लिए रवाना हो गया। देर शाम वह बेटे को लेकर घर पहुंचा। उसके पहुंचे ही दुखी मां की आंखों से आंसू छलक आए और उसने उसने सीने से चिपका लिया। महेश चंद ने बताया कि बेटे ने रेलवे स्टेशन पर पानी बेचने का काम करने वाले एक व्यक्ति के मोबाइल से सुबह करीब 6.30 बजे उसे फोन किया और बताया कि वह दिल्ली स्टेशन पर मौजूद है। महेश ने बताया कि राजदेव ने अभी तक इतना ही बताया है कि वह ट्रेन से दिल्ली गया था। रातभर न सोने की वजह से वह गाड़ी में भी सोता हुआ आया है।
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अब साधारणपुर में दिखा तेंदुआ, ग्रामीणों में दहशत
देवबंद। मोहिउद्दीनपुर के बाद अब साधारणपुर में तेंदुआ दिखाई देने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए आरोप है कि वन विभाग के पास तेंदुए को पकड़ने के लिए संसाधन तक मौजूद नहीं है। ऐसे में बच्चों ने स्कूल तक जाना बंद कर दिया है।
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दो दिन पूर्व मोहिउद्दीनपुर गांव के जंगल में तेंदुआ दिखाई देने के बाद ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है। लोग खेतों पर भी डरते हुए जा रहे हैं। अब वही दहशत साधारणपुर के ग्रामीणों में बन गई है। ग्रामीणों के मुताबिक बृहस्पतिवार की रात्रि उन्होंने गांव के स्कूल की छत पर तेंदुए को देखा है। जिसके बाद वनविभाग को इसकी जानकारी दी गई। अधिकारी देर रात्रि तक तेंदुए की तलाश में जुटे रहे। लेकिन वह कहीं दिखाई नहीं दिया। लोगों का आरोप है कि वनविभाग की टीम आधी अधूरी तैयारी के साथ तेंदुए की तलाश कर रही है। उनके पास तेंदुए को पकडने के संसाधन तक नहीं है। ऐसे में अगर तेंदुआ अधिकारियों को दिखाई भी देता है तो उसे पकडना मुश्किल होगा। गांव के लोगों का कहना है कि तेंदुए के खौफ के चलते उन्होंने बच्चों को भी स्कूल भेजना बंद कर दिया है।