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गंगा घाटी सभ्यता से जुड़े हैं सकतपुर के उत्खनन में मिले अवशेष
Updated Thu, 28 Jun 2018 12:33 AM IST
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रामपुर मनिहारान (सहारनपुर)। रामपुर मनिहारान तहसील के गांव सकतपुर में आगरा पुरातत्व विभाग के पुरातत्वविदों द्वारा एक वर्ष पूर्व उत्खनन के दौरान मिले अवशेषों को पुरातत्वविद आगरा ले गए थे। वहां जांच में मिले अवशेषों में गंगा घाटी सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं।
गांव सकतपुर में एक किसान के खेत में 17 मई 2016 को जब ईंट पथाई का कार्य करने वाले मजदूर मिट्टी को खोद रहे थे तो खुदाई के दौरान मजदूरों को तांबे की कुल्हाड़ी और छह मृदभांड हस्त कुठार मिले थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा ने जांच में पाया था कि 6 ताबे के प्राचीनकालीन हस्त कुठार मृदभांड परंपरा संस्कृति से संबंधित हैं। जो चार हजार वर्ष पुराना है। 23 फरवरी 2017 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के पुरातत्वविदों ने पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षण डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व में किसान के खेत पर ट्रेंच बनाकर अपना उत्खनन का कार्य शुरू कराया था 20 ट्रेंचों पर करीब पांच माह तक चले उत्खनन के दौरान पुरातत्वविदों को बर्तनों के अवशेष, भट्ठी, सिल बट्टे, जानवर का जबड़ा आदि अवशेष मिले, जिनको पुरातत्वविद जांच के लिए आगरा ले गये जिनकी जांच जारी है। इस संबंध में भारतीय सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षण डा. भुवन विक्रम ने फोन पर बताया कि गांव सकतपुर में मिले अवशेषों की जांच जारी है, वहां मिले अवशेष करीब चार हजार वर्ष पुराने थे और जांच में अवशेष गंगा घाटी सभ्यता से जुड़े हैं।
ये मिला था उत्खनन में
बर्तनों के अवशेष, पक्की मिट्टी के बर्तनों के टुकडे़, ताबे की चूड़ियां, खिलौनों की गाड़ी के पहिए के अवशेष, मुष्टिका, पशु आकृति पत्थर का सिल बट्टा, दाल के बीज, कोयला, जानवर का जबड़ा, मिट्टी के बर्तनों पर कारीगरी व सजावट वाले बर्तनों के अवशेष, दो पक्की व एक कच्ची भट्ठी मिली थी जो कि धातु को पिघलाने व बर्तनों को पकाने में प्रयोग की जाती थी। इसके अलावा तीन और पक्की भट्ठी मिली थी और तीन सिल बट्टे व पक्षी को गुलेल मारने व उसे उड़ाने के लिए हाथ से बनाई गई शवांग बाल भी मिली थी।
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गांव सकतपुर में एक किसान के खेत में 17 मई 2016 को जब ईंट पथाई का कार्य करने वाले मजदूर मिट्टी को खोद रहे थे तो खुदाई के दौरान मजदूरों को तांबे की कुल्हाड़ी और छह मृदभांड हस्त कुठार मिले थे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा ने जांच में पाया था कि 6 ताबे के प्राचीनकालीन हस्त कुठार मृदभांड परंपरा संस्कृति से संबंधित हैं। जो चार हजार वर्ष पुराना है। 23 फरवरी 2017 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के पुरातत्वविदों ने पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षण डा. भुवन विक्रम के नेतृत्व में किसान के खेत पर ट्रेंच बनाकर अपना उत्खनन का कार्य शुरू कराया था 20 ट्रेंचों पर करीब पांच माह तक चले उत्खनन के दौरान पुरातत्वविदों को बर्तनों के अवशेष, भट्ठी, सिल बट्टे, जानवर का जबड़ा आदि अवशेष मिले, जिनको पुरातत्वविद जांच के लिए आगरा ले गये जिनकी जांच जारी है। इस संबंध में भारतीय सर्वेक्षण आगरा के अधीक्षण डा. भुवन विक्रम ने फोन पर बताया कि गांव सकतपुर में मिले अवशेषों की जांच जारी है, वहां मिले अवशेष करीब चार हजार वर्ष पुराने थे और जांच में अवशेष गंगा घाटी सभ्यता से जुड़े हैं।
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ये मिला था उत्खनन में
बर्तनों के अवशेष, पक्की मिट्टी के बर्तनों के टुकडे़, ताबे की चूड़ियां, खिलौनों की गाड़ी के पहिए के अवशेष, मुष्टिका, पशु आकृति पत्थर का सिल बट्टा, दाल के बीज, कोयला, जानवर का जबड़ा, मिट्टी के बर्तनों पर कारीगरी व सजावट वाले बर्तनों के अवशेष, दो पक्की व एक कच्ची भट्ठी मिली थी जो कि धातु को पिघलाने व बर्तनों को पकाने में प्रयोग की जाती थी। इसके अलावा तीन और पक्की भट्ठी मिली थी और तीन सिल बट्टे व पक्षी को गुलेल मारने व उसे उड़ाने के लिए हाथ से बनाई गई शवांग बाल भी मिली थी।
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