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बसपा के स्थापना दिवस पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
Updated Fri, 06 Apr 2018 12:37 AM IST
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बसपा के स्थापना दिवस पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी
सहारनपुर। बसपा स्थापना दिवस पर शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में है। इसी मंशा से स्थापना दिवस और डा. आंबेडकर जयंती पर मंडल के कार्यकर्ताओं को जुटाने को बसपा नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। बूथवार जिम्मेदारी देने के साथ सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को सहारनपुर के गांधी पार्क पहुंचने की अपील की जा रही है। भारत बंद के दौरान हुई हिंसा और दलितों पर कार्रवाई को मुद्दा बनाकर पूरे आंदोलन की बसपा अगुवाई करना चाहती है।
लोकसभा और विधानसभा से छिटके परंपरागत मतों को अपने पाले में वापस लेने की जद्दोजहद में जुटी है। एससीएसटी एक्ट संशोधन के मुद्दे पर भारत बंद में कमान बसपा के हाथों के बजाय भीम आर्मी के हाथों में रही। हालांकि बसपा नेताओं ने आंदोलन के बीच में पहुुंचकर जरूर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। बंद के दौरान सहारनपुर में तो सब कुछ शांति से निपट गया मगर मंडल के मुजफ्फरनगर जिले में हुई हिंसा और दलितों पर हुई व्यापक कार्रवाई के बाद बसपा तेजी से सक्रिय हुई थी। इसी कड़ी में 14 अप्रैल को पार्टी के स्थापना दिवस और संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है। बसपा नहीं चाहती कि भीम आर्मी को पूरे आंदोलन का श्रेय मिले। इसी लिहाज से एससीएसटी एक्ट संशोधन और दलितों के उत्पीड़न को मुद्दा बनाकर अग्रणी भूमिका में आने की मंशा रखती है। पूर्व विधायक जगपाल सिंह का कहना है कि गांधी पार्क में अधिकाधिक संख्या में कार्यकर्ता जुटाकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी है। प्रत्येक विधानसभा से भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया गया है।
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सहारनपुर। बसपा स्थापना दिवस पर शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में है। इसी मंशा से स्थापना दिवस और डा. आंबेडकर जयंती पर मंडल के कार्यकर्ताओं को जुटाने को बसपा नेताओं ने पूरी ताकत झोंक दी है। बूथवार जिम्मेदारी देने के साथ सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों को सहारनपुर के गांधी पार्क पहुंचने की अपील की जा रही है। भारत बंद के दौरान हुई हिंसा और दलितों पर कार्रवाई को मुद्दा बनाकर पूरे आंदोलन की बसपा अगुवाई करना चाहती है।
लोकसभा और विधानसभा से छिटके परंपरागत मतों को अपने पाले में वापस लेने की जद्दोजहद में जुटी है। एससीएसटी एक्ट संशोधन के मुद्दे पर भारत बंद में कमान बसपा के हाथों के बजाय भीम आर्मी के हाथों में रही। हालांकि बसपा नेताओं ने आंदोलन के बीच में पहुुंचकर जरूर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। बंद के दौरान सहारनपुर में तो सब कुछ शांति से निपट गया मगर मंडल के मुजफ्फरनगर जिले में हुई हिंसा और दलितों पर हुई व्यापक कार्रवाई के बाद बसपा तेजी से सक्रिय हुई थी। इसी कड़ी में 14 अप्रैल को पार्टी के स्थापना दिवस और संविधान निर्माता डा. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी है। बसपा नहीं चाहती कि भीम आर्मी को पूरे आंदोलन का श्रेय मिले। इसी लिहाज से एससीएसटी एक्ट संशोधन और दलितों के उत्पीड़न को मुद्दा बनाकर अग्रणी भूमिका में आने की मंशा रखती है। पूर्व विधायक जगपाल सिंह का कहना है कि गांधी पार्क में अधिकाधिक संख्या में कार्यकर्ता जुटाकर कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी है। प्रत्येक विधानसभा से भीड़ जुटाने का लक्ष्य दिया गया है।
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