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राम जैसा बेटा पाने को कौशल्या बनें माताएं
Updated Mon, 25 Dec 2017 12:23 AM IST
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राम जैसा बेटा पाने को कौशल्या बनें माताएं
छुटमलपुर। कथा व्यास ब्रह्मानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जैसा आचरण करता है वैसा ही प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। ऐसे में हमें अपने जीवन को धर्मानुसार व्यतीत करना चाहिए।
वैश्य अग्रवाल धर्मशाला में चल रही श्रीराम कथा के दौरान कथा व्यास ने कहा कि सत्य को धारण कर मनुष्य को अपना कर्म सुधारना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम जैसा बेटा पाने के लिए माताओं को भी कौशल्या बनना होगा। सीता जैसी बेटी पाने के लिए जनक जैसा वैदेही बनना होगा। बच्चे माता पिता के आचरण से सीख लेकर अपना कर्म क्षेत्र नियत करते हैं। उन्होंने कहा कि घरों में नियमित रूप से पूजा और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन होना चाहिए। इससे बच्चों को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। कहा कि वर्तमान में युवा पीढ़ी चरित्र पतन की तरफ बढ़ रही है इसके लिए हम सभी जिम्मेदार है। बच्चों को बाल्यकाल से ही धार्मिक और नैतिक गुणों से समाहित करें। उन्होंने कहा कि जीवन से दुखों के समूल नाश के लिए राम नाम का मंत्र ही एकमात्र सहारा है। इसे जप कर हम इस संसार रूपी सागर से पार हो सकते हैं।
इस मौके पर प्रदीप सैनी और सिम्मी सैनी यज्ञमान रहे। कथा में रोहित सैनी, नवदीप गोयल, रमा शांडिल्य, संयोगिता, अन्नपूर्णा, रेखा, निशु गोयल, शिव कुमार सिंघल, संदीप सैनी, सुशील कुमार, ब्रह्मदत्त महाराज आदि का सहयोग रहा।
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छुटमलपुर। कथा व्यास ब्रह्मानंद जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जैसा आचरण करता है वैसा ही प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। ऐसे में हमें अपने जीवन को धर्मानुसार व्यतीत करना चाहिए।
वैश्य अग्रवाल धर्मशाला में चल रही श्रीराम कथा के दौरान कथा व्यास ने कहा कि सत्य को धारण कर मनुष्य को अपना कर्म सुधारना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम जैसा बेटा पाने के लिए माताओं को भी कौशल्या बनना होगा। सीता जैसी बेटी पाने के लिए जनक जैसा वैदेही बनना होगा। बच्चे माता पिता के आचरण से सीख लेकर अपना कर्म क्षेत्र नियत करते हैं। उन्होंने कहा कि घरों में नियमित रूप से पूजा और धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन होना चाहिए। इससे बच्चों को सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। कहा कि वर्तमान में युवा पीढ़ी चरित्र पतन की तरफ बढ़ रही है इसके लिए हम सभी जिम्मेदार है। बच्चों को बाल्यकाल से ही धार्मिक और नैतिक गुणों से समाहित करें। उन्होंने कहा कि जीवन से दुखों के समूल नाश के लिए राम नाम का मंत्र ही एकमात्र सहारा है। इसे जप कर हम इस संसार रूपी सागर से पार हो सकते हैं।
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इस मौके पर प्रदीप सैनी और सिम्मी सैनी यज्ञमान रहे। कथा में रोहित सैनी, नवदीप गोयल, रमा शांडिल्य, संयोगिता, अन्नपूर्णा, रेखा, निशु गोयल, शिव कुमार सिंघल, संदीप सैनी, सुशील कुमार, ब्रह्मदत्त महाराज आदि का सहयोग रहा।
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