{"_id":"5b77164f42c79246695cc7d4","slug":"141534531151-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बरसात में यात्रियों के बैठने लायक नहीं हैं सहारनपुर डिपो की बसें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बरसात में यात्रियों के बैठने लायक नहीं हैं सहारनपुर डिपो की बसें
Updated Sat, 18 Aug 2018 12:09 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर। बरसात में रोडवेज की बसों में यात्रा करनी है तो छाता लेकर साथ चलना पड़ेगा। बारिश हुई तो भीगने से बचना मुश्किल है। बसों की छतें बारिश में झरने की तरह बहतीं हैं। इनमें से कई बसों पर तिरपाल भी लगाया गया है।
सहारनपुर डिपो की बसों में बरसात के मौसम में सफर करना है तो भीगने से बचने के लिए अपने साथ छाता लेकर जरूर चलें। ऐसा नहीं किया और बारिश हो गई तो भीगने से बच पाना मुश्किल है।
सहारनपुर डिपो की बसों की हालत ही ऐसी है कि बारिश बारिश में बस में बैठा यात्री भीग जाए। सहारनपुर डिपो के बेड़े की 174 बसों में से 74 बसें तो डिपो के रिकार्ड में ही अपनी मियाद के अंतिम पड़ाव पर चल रहीं हैं। लेकिन इन बसों के अलावा बीस से अधिक बसें ऐसी हैं, जो बरसात के मौसम में यात्रियों के बैठने लायक नहीं हैं। इन बसों की छतें बारिश में न सिर्फ टपकतीं हैं। अधिकारियों ने कुछ बसों पर तो काली तिरपाल लगवा दी है। जिससे बारिश में पानी से बस में बैठे यात्रियों को बचाया जा सके। जबकि अभी भी कई बसें यात्रियों को बारिश से नहला रहीं हैं। डिपो के सूत्रों के मुताबिक कुछ वर्ष पूर्व आईं नई मानी जाने वाली बसों से भी अब पानी बरस रहा है।
विज्ञापन
------------
-- गड्ढों में हिलने से जोड़ खुल जाते हैं
सहारनपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश सिंह का कहना है कि सड़कों पर गड्ढों में एवं अन्य झटकों में बसों की छत के ज्वाइंट खुल जातेे हैं। जिससे बारिश में बसों में पानी आ जाता है। कई बार नई बसों में भी यह स्थिति आ जाती है। लेकिन उन्होंने डिपो की 90 प्रतिशत ऐसी बसों में तिरपाल लगवा दी है।
विज्ञापन
सहारनपुर डिपो की बसों में बरसात के मौसम में सफर करना है तो भीगने से बचने के लिए अपने साथ छाता लेकर जरूर चलें। ऐसा नहीं किया और बारिश हो गई तो भीगने से बच पाना मुश्किल है।
विज्ञापन
सहारनपुर डिपो की बसों की हालत ही ऐसी है कि बारिश बारिश में बस में बैठा यात्री भीग जाए। सहारनपुर डिपो के बेड़े की 174 बसों में से 74 बसें तो डिपो के रिकार्ड में ही अपनी मियाद के अंतिम पड़ाव पर चल रहीं हैं। लेकिन इन बसों के अलावा बीस से अधिक बसें ऐसी हैं, जो बरसात के मौसम में यात्रियों के बैठने लायक नहीं हैं। इन बसों की छतें बारिश में न सिर्फ टपकतीं हैं। अधिकारियों ने कुछ बसों पर तो काली तिरपाल लगवा दी है। जिससे बारिश में पानी से बस में बैठे यात्रियों को बचाया जा सके। जबकि अभी भी कई बसें यात्रियों को बारिश से नहला रहीं हैं। डिपो के सूत्रों के मुताबिक कुछ वर्ष पूर्व आईं नई मानी जाने वाली बसों से भी अब पानी बरस रहा है।
विज्ञापन
------------
-- गड्ढों में हिलने से जोड़ खुल जाते हैं
सहारनपुर डिपो के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक जगदीश सिंह का कहना है कि सड़कों पर गड्ढों में एवं अन्य झटकों में बसों की छत के ज्वाइंट खुल जातेे हैं। जिससे बारिश में बसों में पानी आ जाता है। कई बार नई बसों में भी यह स्थिति आ जाती है। लेकिन उन्होंने डिपो की 90 प्रतिशत ऐसी बसों में तिरपाल लगवा दी है।