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Saharanpur News: 135 उपकेंद्रों के पास नहीं बिजली बाधित होने पर वैकल्पिक व्यवस्था
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-बिजली गई तो दूसरे किसी माध्यम से सप्लाई नहीं होगी चालू
-जिले में हैं 137 बिजली उपकेंद्र, महानगर में केवल दो पर ही व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। एक तरफ जहां जिले में बिजली सुधार के लिए कवायदें की जा रहीं हैं, वहीं दूसरी ओर दो उपकेंद्रों को छोड़कर अन्य के पास बिजली सप्लाई की कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अगर कोई तकनीकी समस्या आती है या लोड अधिक रहता है तो दूसरे किसी भी माध्यम से बिजली सप्लाई नहीं की जा सकेगी।
जिले में छह लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से करीब 1.60 लाख उपभोक्ता महानगर में हैं। जिले में बिजली की समस्या में कोई सुधार नहीं है। हल्की बारिश हो या फिर गर्मी में बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। यही नहीं शेड्यूल के अनुसार भी बिजली नहीं मिल पा रही।
महानगर में 13 और देहात में 124 बिजली उपकेंद्र हैं। शहर में जैनबाग और जनक नगर उपकेंद्र को छोड़ दिया जाए तो अन्य किसी भी उपकेंद्र के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, जब तक उपकेंद्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होगी, तब तक बिजली समस्या से जूझना पड़ेगा, साथ ही ट्रिपिंग की समस्या भी बनी रहेगी। कई बार तो फाल्ट होने पर देहात में 15 से 16 घंटे तक बिजली आपूर्ति नहीं होती। शहर की बात करें तो यहां भी चार से पांच घंटे फाल्ट ठीक होने में लग जाते हैं। उधर, अधीक्षण अभियंता द्वितीय ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि उनके डिवीजन में किसी भी उपकेंद्र पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
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-जिले में हैं 137 बिजली उपकेंद्र, महानगर में केवल दो पर ही व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। एक तरफ जहां जिले में बिजली सुधार के लिए कवायदें की जा रहीं हैं, वहीं दूसरी ओर दो उपकेंद्रों को छोड़कर अन्य के पास बिजली सप्लाई की कोई भी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अगर कोई तकनीकी समस्या आती है या लोड अधिक रहता है तो दूसरे किसी भी माध्यम से बिजली सप्लाई नहीं की जा सकेगी।
जिले में छह लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं। इनमें से करीब 1.60 लाख उपभोक्ता महानगर में हैं। जिले में बिजली की समस्या में कोई सुधार नहीं है। हल्की बारिश हो या फिर गर्मी में बिजली आपूर्ति ठप हो जाती है। यही नहीं शेड्यूल के अनुसार भी बिजली नहीं मिल पा रही।
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महानगर में 13 और देहात में 124 बिजली उपकेंद्र हैं। शहर में जैनबाग और जनक नगर उपकेंद्र को छोड़ दिया जाए तो अन्य किसी भी उपकेंद्र के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, जब तक उपकेंद्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होगी, तब तक बिजली समस्या से जूझना पड़ेगा, साथ ही ट्रिपिंग की समस्या भी बनी रहेगी। कई बार तो फाल्ट होने पर देहात में 15 से 16 घंटे तक बिजली आपूर्ति नहीं होती। शहर की बात करें तो यहां भी चार से पांच घंटे फाल्ट ठीक होने में लग जाते हैं। उधर, अधीक्षण अभियंता द्वितीय ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि उनके डिवीजन में किसी भी उपकेंद्र पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है।
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