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शिक्षा के क्षेत्र में सर सैयद का अतुलनीय योगदान: मैराजुद्दीन
Updated Mon, 26 Nov 2018 12:24 AM IST
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सहारनपुर। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी कोर्ट के वरिष्ठ सदस्य तथा प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मैराजुद्दीन ने कहा कि सर सैयद जैसी शख्सियत सदियों में पैदा होती हैं। उन्होंने ऐसे विश्वविद्यालय की स्थापना की थी, जिसके दरवाजे सबके लिए खुले हों। शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। वह शनिवार की रात चिलकाना रोड स्थित एक स्कूल में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एलुमिनी एसोसिएशन की ओर से आयोजित सर सैयद डे कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
देर रात आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत नेहा खान ने नात ए पाक से की। मुख्य अतिथि रहे डॉ. मैराजुद्दीन ने सर सैयद द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जो कार्य मदनमोहन मालवीय ने बनारस हिंदू विवि बनाकर किया था वही कार्य सर सैयद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाकर किया। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से सबसे पहला ग्रेजुएट ईश्वरी नाम का हिंदू युवक था। उन्होंने हिंदुस्तान की कल्पना दुल्हन से करते हुए हिंदू और मुसलमान को उसकी दो आंखें बताया। हाजी फजलुर्रहमान ने सर सैयद द्वारा समाज और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। काजी नदीम अख्तर ने सर सैयद को योग्य लेखक बताया। उनके द्वारा लिखी गई सरकशी बिजनौर, असराउस सनादीद आदि पुस्तकों का जिक्र किया। अंत में केंद्र सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री काजी रशीद मसूद ने कहा कि सर सैयद ने 1875 में ओरियंटल कॉलेज की स्थापना की थी, जो बाद में एएमयू बना। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. कुदसिया अंजुम और सफिया सबुई ने किया। कार्यक्रम में काजी नदीम अख्तर, डॉ. शाहिद जुबैरी, साबिर अली खान, मुख्तार अली खान, डॉ. रियाजुनबी, फैयाज अंसारी, शगुफ्ता खान, डा. अयूब शम्शी, मजाहिर राना, खालिक अहमद, सईद रिजवान, सलीम फारूकी, सलीम कुरैशी, गुलनाज जुबैरी, कामरान जुबैरी आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन मेरा चमन है मेेरा चमन मैं अपने चमन का बुलबुल हूं गीत से किया गया।
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देर रात आयोजित कार्यक्रम की शुरूआत नेहा खान ने नात ए पाक से की। मुख्य अतिथि रहे डॉ. मैराजुद्दीन ने सर सैयद द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि जो कार्य मदनमोहन मालवीय ने बनारस हिंदू विवि बनाकर किया था वही कार्य सर सैयद ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनाकर किया। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से सबसे पहला ग्रेजुएट ईश्वरी नाम का हिंदू युवक था। उन्होंने हिंदुस्तान की कल्पना दुल्हन से करते हुए हिंदू और मुसलमान को उसकी दो आंखें बताया। हाजी फजलुर्रहमान ने सर सैयद द्वारा समाज और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। काजी नदीम अख्तर ने सर सैयद को योग्य लेखक बताया। उनके द्वारा लिखी गई सरकशी बिजनौर, असराउस सनादीद आदि पुस्तकों का जिक्र किया। अंत में केंद्र सरकार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री काजी रशीद मसूद ने कहा कि सर सैयद ने 1875 में ओरियंटल कॉलेज की स्थापना की थी, जो बाद में एएमयू बना। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. कुदसिया अंजुम और सफिया सबुई ने किया। कार्यक्रम में काजी नदीम अख्तर, डॉ. शाहिद जुबैरी, साबिर अली खान, मुख्तार अली खान, डॉ. रियाजुनबी, फैयाज अंसारी, शगुफ्ता खान, डा. अयूब शम्शी, मजाहिर राना, खालिक अहमद, सईद रिजवान, सलीम फारूकी, सलीम कुरैशी, गुलनाज जुबैरी, कामरान जुबैरी आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन मेरा चमन है मेेरा चमन मैं अपने चमन का बुलबुल हूं गीत से किया गया।
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