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शाकंभरी मिल चलवाने के लिए भूख हड़ताल शुरू
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:41 PM IST
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शाकंभरी चीनी मिल चलवाने के लिए भूख हड़ताल शुरु
साढौली कदीम। पिछले चार साल से बंद पड़ी चीनी मिल को चलाने की मांग को लेकर किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना एवं भूख हड़ताल शुरू कर उग्र आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। किसानों का कहना है कि जब तक मिल संचालन की तिथि तय नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
शनिवार को क्षेत्र के गांव टोडरपुर की शाकंभरी शुगर मिल गेट पर किसानों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। इस दौरान चिलकाना के पूर्व चेयरमैन जाफर हुसैन चांद मियां ने कहा कि क्षेत्र में मात्र एक औद्योगिक इकाई के संचालन से बहुमुखी विकास ने जो रफ्तार पकड़ी थी, उसे अब विराम लग गया है। शुगर मिल बंदी से क्षेत्र का विकास ठप हो गया है। कई सौ परिवारों को अब भरपेट भोजन नहीं बन पा रहा है।
गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन चौधरी ताहिर हसन ने कहा कि अब क्षेत्र का किसान आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीनें मिल स्थापना के लिए दी थी और न कि बंजर रखने के लिए। यदि मिल चालू नहीं की जातीं तो किसानों की जमीनें उन्हें वापस की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांग नहीं मानी जाती तो वे लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे तथा किसी भी दल के नेता को गांव में घुसने नहीं देंगे।
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संचालन कर रहे किसान चौधरी हाशिम ने कहा कि मिल बंदी से 356 गांवों के हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। क्षेत्र का किसान अपने खेतों में खडी गन्ने की फसल को लेकर चिंतित है कि वह उसे कहां लेकर जाये। कोल्हूओं में औने पौने दामों पर बेचने से उसकी फसल की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। धरने को यमुना खादर संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमी पंवार ने समर्थन देते हुए कहा कि यदि भूख हड़ताल के दौरान किसी किसान की तबीयत बिगड़ती है तो उसका जिम्मेदार स्वयं प्रशासन होगा।
युवा जागृति मंच का समर्थन देते हुए संगठन के पदाधिकारी अमजद और रिहान ने कहा कि अन्नदाता को भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होना पड़ रहा है। अधिकतर वक्ताओं ने अपना समर्थन जुटाते हुए आरपार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया। भूख हड़ताल पर बैठने वालों में स्वेच्छा से महेंद्र सिंह, जगदीश, लालसिंह, शोभाराम भगत जी, सतीश शर्मा, मीर हसन, अरशद, खुर्शीद, शमशाद एवं हुकम सिंह आदि शामिल है। समय सिंह प्रधान, चौधरी प्रितम सिंह, नारायण सिंह, चौधरी आकिल, योगेश शर्मा, सतपाल राठी, बुद्ध सिंह प्रधान, अनवर, अरशद, वकील सलमानी, शमशाद, दिलशाद पंवार, देवी सिंह, वीरेन्द्र सिंह, अवनीश कांबोज, बिरमपाल, सुखदेव आदि रहे।
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साढौली कदीम। पिछले चार साल से बंद पड़ी चीनी मिल को चलाने की मांग को लेकर किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना एवं भूख हड़ताल शुरू कर उग्र आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। किसानों का कहना है कि जब तक मिल संचालन की तिथि तय नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
शनिवार को क्षेत्र के गांव टोडरपुर की शाकंभरी शुगर मिल गेट पर किसानों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। इस दौरान चिलकाना के पूर्व चेयरमैन जाफर हुसैन चांद मियां ने कहा कि क्षेत्र में मात्र एक औद्योगिक इकाई के संचालन से बहुमुखी विकास ने जो रफ्तार पकड़ी थी, उसे अब विराम लग गया है। शुगर मिल बंदी से क्षेत्र का विकास ठप हो गया है। कई सौ परिवारों को अब भरपेट भोजन नहीं बन पा रहा है।
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गन्ना समिति के पूर्व चेयरमैन चौधरी ताहिर हसन ने कहा कि अब क्षेत्र का किसान आरपार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। किसानों ने अपनी उपजाऊ जमीनें मिल स्थापना के लिए दी थी और न कि बंजर रखने के लिए। यदि मिल चालू नहीं की जातीं तो किसानों की जमीनें उन्हें वापस की जाए। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांग नहीं मानी जाती तो वे लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे तथा किसी भी दल के नेता को गांव में घुसने नहीं देंगे।
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संचालन कर रहे किसान चौधरी हाशिम ने कहा कि मिल बंदी से 356 गांवों के हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। क्षेत्र का किसान अपने खेतों में खडी गन्ने की फसल को लेकर चिंतित है कि वह उसे कहां लेकर जाये। कोल्हूओं में औने पौने दामों पर बेचने से उसकी फसल की लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है। धरने को यमुना खादर संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमी पंवार ने समर्थन देते हुए कहा कि यदि भूख हड़ताल के दौरान किसी किसान की तबीयत बिगड़ती है तो उसका जिम्मेदार स्वयं प्रशासन होगा।
युवा जागृति मंच का समर्थन देते हुए संगठन के पदाधिकारी अमजद और रिहान ने कहा कि अन्नदाता को भूख हड़ताल पर बैठने के लिए विवश होना पड़ रहा है। अधिकतर वक्ताओं ने अपना समर्थन जुटाते हुए आरपार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया। भूख हड़ताल पर बैठने वालों में स्वेच्छा से महेंद्र सिंह, जगदीश, लालसिंह, शोभाराम भगत जी, सतीश शर्मा, मीर हसन, अरशद, खुर्शीद, शमशाद एवं हुकम सिंह आदि शामिल है। समय सिंह प्रधान, चौधरी प्रितम सिंह, नारायण सिंह, चौधरी आकिल, योगेश शर्मा, सतपाल राठी, बुद्ध सिंह प्रधान, अनवर, अरशद, वकील सलमानी, शमशाद, दिलशाद पंवार, देवी सिंह, वीरेन्द्र सिंह, अवनीश कांबोज, बिरमपाल, सुखदेव आदि रहे।