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उर्स में तबर्रूकात की जियारत कराई गई
Updated Tue, 13 Mar 2018 11:48 PM IST
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गंगोह (सहारनपुर)। सांप्रदायिक सौहार्द के प्रतीक हजरत कुतबे आलम शेख अब्दुल्ल कुद्दुस के 494 वें उर्स में मंगलवार को हजरत के मुबारक हाथों से लिखी गई पवित्र कुरान मजीद सहित संग्रहीत तबर्रुकात की जियारत कराई गई। जायरीनों में कलावा-कलौंजी का वितरण किया गया।
मंगलवार सुबह हवेली सज्जादा नशीन गुलशन-ए-कुतबे आलम से संग्रहीत तबर्रुकात के पिटारा-ए-मुकद्दस को जुलूस की शक्ल में हजरत कुतबे आलम की पवित्र दरगाह तक लाया गया। पाक कुरान शरीफ पाठ, नात-ए-पाक और शजरा खुआनी की रस्म अदा की गई। इसके उपरांत हक अल्लाह, हक अल्लाह की बुलंद सदाओं के बीच पिटारा ए मुकद्दस खोला गया। तबर्रुकात की जियारत से पूर्व सज्जादा नशीन शाह महताब आलम ने उनके बारे में जायरीनों को विस्तार से जानकारी दी। सबसे पहले हजरत कुतबे आलम के मुबारक हाथों से लिखी गई कलामे पाक (कुरान शरीफ) की जियारत कराई गई। किवदंती है कि कुरान शरीफ पर पहली निगाह पड़ते ही सच्चे मन से मांगी गई मुराद एक साल के अंदर ही पूरी हो जाती है। हजरत की कुलहा मुबारक (टोपी) और पहराहन (कमीज) की जियारत कराई गई।
इसके अलावा सुल्तान बिन उधम बलख (अफगानिस्तान), बाबा फरीदुद्दीन पाक पटन (पाकिस्तान), ख्वाजाबाई अजीज बुस्लामी, ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (अजमेर शरीफ), ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी (महरौली), हजरत मख्दूम साबिर कलियरी, हजरत शेख शमसुद्दीन पानीपती, हजरत शेख अहमद अब्दुल हक रदौलवी, हजरत शेख जलालुद्दीन कबीरुल औलिया, हजरत मखदूम जहानिया, जहानगश्त के साथ-साथ सिलसिला-ए-कादरिया, चिश्तिया एवं साबरिया के तबर्रुकात की जियारत भी कराई गई। इसके उपरांत जायरीनों में कलावा और कलौंजी वितरित की गई। संचालन हासिम मुरादाबादी ने किया। नायब सज्जादा शाह मख्दुम अली कुद्दुसी, आसिफ कुद्दुसी, शाह जफर मियां कुद्दुसी, आसिम कुद्दुसी, शाह शादाब जहां उर्फ पप्पु मियां सहित अनेक दरगाहों के सज्जादा नशीन एवं प्रमुख लोग मौजूद रहे। पूर्व नगरपालिका चेयरमैन नोमान मसूद ने जायरीनों, सज्जादा नशीनों, पीर-फकीरों, औलियाओं और दरवेशों का स्वागत किया। बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। तबर्रुकात की जियारत के साथ ही जायरीनों की रुखसती शुरू हो गई।
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मंगलवार सुबह हवेली सज्जादा नशीन गुलशन-ए-कुतबे आलम से संग्रहीत तबर्रुकात के पिटारा-ए-मुकद्दस को जुलूस की शक्ल में हजरत कुतबे आलम की पवित्र दरगाह तक लाया गया। पाक कुरान शरीफ पाठ, नात-ए-पाक और शजरा खुआनी की रस्म अदा की गई। इसके उपरांत हक अल्लाह, हक अल्लाह की बुलंद सदाओं के बीच पिटारा ए मुकद्दस खोला गया। तबर्रुकात की जियारत से पूर्व सज्जादा नशीन शाह महताब आलम ने उनके बारे में जायरीनों को विस्तार से जानकारी दी। सबसे पहले हजरत कुतबे आलम के मुबारक हाथों से लिखी गई कलामे पाक (कुरान शरीफ) की जियारत कराई गई। किवदंती है कि कुरान शरीफ पर पहली निगाह पड़ते ही सच्चे मन से मांगी गई मुराद एक साल के अंदर ही पूरी हो जाती है। हजरत की कुलहा मुबारक (टोपी) और पहराहन (कमीज) की जियारत कराई गई।
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इसके अलावा सुल्तान बिन उधम बलख (अफगानिस्तान), बाबा फरीदुद्दीन पाक पटन (पाकिस्तान), ख्वाजाबाई अजीज बुस्लामी, ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती (अजमेर शरीफ), ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी (महरौली), हजरत मख्दूम साबिर कलियरी, हजरत शेख शमसुद्दीन पानीपती, हजरत शेख अहमद अब्दुल हक रदौलवी, हजरत शेख जलालुद्दीन कबीरुल औलिया, हजरत मखदूम जहानिया, जहानगश्त के साथ-साथ सिलसिला-ए-कादरिया, चिश्तिया एवं साबरिया के तबर्रुकात की जियारत भी कराई गई। इसके उपरांत जायरीनों में कलावा और कलौंजी वितरित की गई। संचालन हासिम मुरादाबादी ने किया। नायब सज्जादा शाह मख्दुम अली कुद्दुसी, आसिफ कुद्दुसी, शाह जफर मियां कुद्दुसी, आसिम कुद्दुसी, शाह शादाब जहां उर्फ पप्पु मियां सहित अनेक दरगाहों के सज्जादा नशीन एवं प्रमुख लोग मौजूद रहे। पूर्व नगरपालिका चेयरमैन नोमान मसूद ने जायरीनों, सज्जादा नशीनों, पीर-फकीरों, औलियाओं और दरवेशों का स्वागत किया। बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। तबर्रुकात की जियारत के साथ ही जायरीनों की रुखसती शुरू हो गई।
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