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हिंदी उर्दू बहने-बहने, भारत के अनमोल ये गहने
Updated Sat, 15 Sep 2018 12:28 AM IST
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हिंदी उर्दू बहने-बहने, भारत के अनमोल ये गहने
देवबंद (सहारनपुर)। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यिक संस्था साहित्य संगम के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने राष्ट्रभाषा हिंदी का महत्व दर्शाती रचनाएं प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।
अध्यक्षता कर रहे लेखक एवं विचारक कमल देवबंदी ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है इसका सम्मान प्रत्येक भारतीय पर देशप्रेम की तरह अनिवार्य है। शमीम किरतपुरी ने कहा कि हिंदी से बोलती यह उर्दू, है बहन अब कैसी है तू। दिलशाद खुश्तर ने कहा मातृभाषा शान हमारी हिंदी है, कितनी सुंदर कितनी प्यारी हिंदी है। डा. दिवाकर गर्ग ने पढ़ा हिंदी उर्दू बहने-बहने, भारत के अनमोल ये गहने। तनवीर अजमल ने कहा हिंदी दिवस को आज मनाने के वास्ते, उर्दू जबां के चाहने वाले भी आ गए। महताब आजाद ने पढ़ा गंगा हिंदी यमुना उर्दू जैसी है, भारत फूल है दोनों खुशबू जैसी हैं। सुरूल देवबंद ने कहा किस्मत ने जो बुने थे वो धागे निकल गए, शोहरत की थी तलब जिन्हें आगे निकल गए। सलीम राकिम ने पढ़ा उनके नैनों से जब भी हुआ सामना, दोनों हाथों से हृदय पड़ा थामना। इनके अलावा सुहेल अकमल, सलमान दिलकश आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके शमीम किरतपुरी, डा. राहुल गर्ग व नितिन आदि मौजूद रहे।
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देवबंद (सहारनपुर)। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में साहित्यिक संस्था साहित्य संगम के तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें कवियों ने राष्ट्रभाषा हिंदी का महत्व दर्शाती रचनाएं प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया।
अध्यक्षता कर रहे लेखक एवं विचारक कमल देवबंदी ने कहा कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है इसका सम्मान प्रत्येक भारतीय पर देशप्रेम की तरह अनिवार्य है। शमीम किरतपुरी ने कहा कि हिंदी से बोलती यह उर्दू, है बहन अब कैसी है तू। दिलशाद खुश्तर ने कहा मातृभाषा शान हमारी हिंदी है, कितनी सुंदर कितनी प्यारी हिंदी है। डा. दिवाकर गर्ग ने पढ़ा हिंदी उर्दू बहने-बहने, भारत के अनमोल ये गहने। तनवीर अजमल ने कहा हिंदी दिवस को आज मनाने के वास्ते, उर्दू जबां के चाहने वाले भी आ गए। महताब आजाद ने पढ़ा गंगा हिंदी यमुना उर्दू जैसी है, भारत फूल है दोनों खुशबू जैसी हैं। सुरूल देवबंद ने कहा किस्मत ने जो बुने थे वो धागे निकल गए, शोहरत की थी तलब जिन्हें आगे निकल गए। सलीम राकिम ने पढ़ा उनके नैनों से जब भी हुआ सामना, दोनों हाथों से हृदय पड़ा थामना। इनके अलावा सुहेल अकमल, सलमान दिलकश आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके शमीम किरतपुरी, डा. राहुल गर्ग व नितिन आदि मौजूद रहे।
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