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नगरायुक्त ने कंपनी को दिया अल्टीमेटम
Updated Thu, 07 Sep 2017 12:29 AM IST
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सहारनपुर। सोलर लाइटों से शहर को जगमग करने का सपना जल्द पूरा हो सकता है। करीब एक साल से काम को लटकाए बैठी संस्था को नगरायुक्त की ओर से दस दिन के भीतर काम शुरू करने का अल्टीमेटम दिया गया है। काम शुरू न करने की स्थिति में टेंडर निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। नगर निगम ने यह सक्रियता प्रमुख सचिव की बैठक के बाद दिखाई है।
वर्ष 2016 में तत्कालीन नगरायुक्त नीरज शुक्ला ने शहर की सड़कों और गलियों को सोलर लाइटों से लैस करने के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। प्रस्ताव तैयार कराने वाली कंपनी ने नगर विकास सचिव से प्रस्ताव पास भी करा लिया था। जिसके बाद अक्तूबर 2016 में दो करोड़ रुपये गाइड लाइन के साथ जारी भी कर दिए गए थे। काम के लिए टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई, मगर आरोप है कि इसमें हेराफेरी कर ठेकेदारों को बाहर कर दिया गया और सिफारिश पर एक संस्था को ठेका दे दिया गया। संस्था को काम शुरू करने से पहले कुल धनराशि यानी पांच करोड़ का 15 प्रतिशत पैसा सिक्योरिटी के तौर पर जमा कराना था। सूत्रों ने बताया कि संस्था इस पैसे को जमा नहीं कराना चाह रही थी। ऐसे में काम लटकता चला गया। इसके बाद कंपनी शासन में चली गई। तीन दिन पहले ही प्रमुख सचिव ने नगरायुक्त और संस्था के अधिकारियों को लखनऊ बुलाकर बैठक की। अब नगरायुक्त ने संस्था को दस दिन के भीतर सिक्योरिटी का 15 प्रतिशत जमा कर काम शुरू करने को कहा है। अन्यथा की स्थिति में टेंडर निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। नगरायुक्त गौरव वर्मा ने बताया कि यदि दस दिन में काम शुरू नहीं होता है तो टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा।
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वर्ष 2016 में तत्कालीन नगरायुक्त नीरज शुक्ला ने शहर की सड़कों और गलियों को सोलर लाइटों से लैस करने के लिए पांच करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था। प्रस्ताव तैयार कराने वाली कंपनी ने नगर विकास सचिव से प्रस्ताव पास भी करा लिया था। जिसके बाद अक्तूबर 2016 में दो करोड़ रुपये गाइड लाइन के साथ जारी भी कर दिए गए थे। काम के लिए टेंडर की प्रक्रिया अपनाई गई, मगर आरोप है कि इसमें हेराफेरी कर ठेकेदारों को बाहर कर दिया गया और सिफारिश पर एक संस्था को ठेका दे दिया गया। संस्था को काम शुरू करने से पहले कुल धनराशि यानी पांच करोड़ का 15 प्रतिशत पैसा सिक्योरिटी के तौर पर जमा कराना था। सूत्रों ने बताया कि संस्था इस पैसे को जमा नहीं कराना चाह रही थी। ऐसे में काम लटकता चला गया। इसके बाद कंपनी शासन में चली गई। तीन दिन पहले ही प्रमुख सचिव ने नगरायुक्त और संस्था के अधिकारियों को लखनऊ बुलाकर बैठक की। अब नगरायुक्त ने संस्था को दस दिन के भीतर सिक्योरिटी का 15 प्रतिशत जमा कर काम शुरू करने को कहा है। अन्यथा की स्थिति में टेंडर निरस्त करने की चेतावनी दी गई है। नगरायुक्त गौरव वर्मा ने बताया कि यदि दस दिन में काम शुरू नहीं होता है तो टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा।
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