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‘मुझे अमृता चाहिए’ नाटक का आयोजन
Updated Thu, 13 Sep 2018 12:33 AM IST
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‘मुझे अमृता चाहिए’ नाटक का आयोजन
गंगोह (सहारनपुर)। शोभित विश्वविद्यालय में इंडियन पीपूल्स थिएटर एसोसिएशन सहारनपुर द्वारा समाज में महिलाओं की स्थिति पर आधारित मुझे अमृता चाहिए नामक नाटक का मंचन किया गया। दर्शकों ने मुक्त कंठ से नाटक के मंचन की सराहना की और सकारात्मक संदेश ग्रहण किया।
नाटक के मंचन का उद्घाटन कुलपति डा. डीके कौशिक ने किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के नाट्य मंचन से समाज में व्याप्त विभिन्न पहलुओं को आसानी से उजागर किया जा सकता है। आज की प्रस्तुति भी युवाओं के लिए खासी प्रेरक एवं शिक्षाप्रद हैं। प्रति कुलपति प्रो. डा. रणजीत सिंह ने कहा कि हमें इस तरह के कार्यक्रमों से सीखने और उसे प्रचारित एवं प्रसारित करने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित किया जा सकें। उन्होंने बताया कि यह नाटक योगेश त्रिपाठी द्वारा लिखा गया एवं काशिफ नून सिद्धीकी द्वारा निर्देशित किया गया है। नाटक को मोहन राकेश पुरस्कार 2002 से सम्मानित किया जा चुका है। यह नाटक समाज में महिलाओं की स्थिति पर आधारित है। किस तरह से एक लड़की जिसके अपने जीवन को लेकर कुछ सपने होते हैं और वह उन सपनों को पूरा करना चाहती है। फिर उसके जीवन में एक मोड़ आता है और वह थिएटर की ओर मुड़ जाती है और उसका जीवन बदल जाता है। कुल सचिव डा. महीपाल सिंह ने कार्यक्रम के सफल संचालन एवं आयोजन के लिए आभार जताय कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। डा. एसके पाठक, सूफी जहीर अख्तर, संयोजक डा. प्रशान्त कुमार, कार्यक्रम संरक्षक सरदार अनवर आदि रहे।
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गंगोह (सहारनपुर)। शोभित विश्वविद्यालय में इंडियन पीपूल्स थिएटर एसोसिएशन सहारनपुर द्वारा समाज में महिलाओं की स्थिति पर आधारित मुझे अमृता चाहिए नामक नाटक का मंचन किया गया। दर्शकों ने मुक्त कंठ से नाटक के मंचन की सराहना की और सकारात्मक संदेश ग्रहण किया।
नाटक के मंचन का उद्घाटन कुलपति डा. डीके कौशिक ने किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के नाट्य मंचन से समाज में व्याप्त विभिन्न पहलुओं को आसानी से उजागर किया जा सकता है। आज की प्रस्तुति भी युवाओं के लिए खासी प्रेरक एवं शिक्षाप्रद हैं। प्रति कुलपति प्रो. डा. रणजीत सिंह ने कहा कि हमें इस तरह के कार्यक्रमों से सीखने और उसे प्रचारित एवं प्रसारित करने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित किया जा सकें। उन्होंने बताया कि यह नाटक योगेश त्रिपाठी द्वारा लिखा गया एवं काशिफ नून सिद्धीकी द्वारा निर्देशित किया गया है। नाटक को मोहन राकेश पुरस्कार 2002 से सम्मानित किया जा चुका है। यह नाटक समाज में महिलाओं की स्थिति पर आधारित है। किस तरह से एक लड़की जिसके अपने जीवन को लेकर कुछ सपने होते हैं और वह उन सपनों को पूरा करना चाहती है। फिर उसके जीवन में एक मोड़ आता है और वह थिएटर की ओर मुड़ जाती है और उसका जीवन बदल जाता है। कुल सचिव डा. महीपाल सिंह ने कार्यक्रम के सफल संचालन एवं आयोजन के लिए आभार जताय कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। डा. एसके पाठक, सूफी जहीर अख्तर, संयोजक डा. प्रशान्त कुमार, कार्यक्रम संरक्षक सरदार अनवर आदि रहे।
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