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बीमारियां बांट रहा फैक्ट्रियों का धुआं
Updated Mon, 18 Jun 2018 12:20 AM IST
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बीमारियां बांट रहा फैक्ट्रियों का धुआं
सहारनपुर। बेहट रोड के औद्योगिक क्षेत्र की कुछ फैक्ट्रियां आसपास के गांवों के लिए मुसीबत बन गई हैं। यह फैक्ट्रियां विषैली गैस और धुएं के रूप में जहर उगल रही हैं। इससे एक दर्जन से अधिक गांव के लोग प्रभावित हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक सांस के मरीज बनकर जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी माना है कि फैक्ट्रियों की वजह से टीबी समेत अन्य बीमारियां फैल रही हैं। क्षेत्रवासियों ने नुकसान पहुंचा रहे उद्योगों को बंद कराने की मांग प्रशासन से की है। अपनी पीढ़ियों को बीमारी से बचाने के लिए क्षेत्र के लोग आंदोलन पर उतर आए हैं।
गांव घुन्ना निवासी राजमणि लांबा, मिंटू राणा, मालाहेड़ी निवासी भूषण दास, माटकी के ग्राम प्रधान विनय त्यागी और डॉ. सुंदर ने बताया कि बेहट रोड पर नई-नई फैक्ट्रियां स्थापित होने का सिलसिला पिछले 20 साल से जारी है। वर्तमान में इतनी फैक्ट्रियां स्थापित हो चुकी हैं। इनकी गिनती करना मुश्किल है। आरोप लगाया कि ज्यादातर फैक्ट्रियां नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। इनमें अनेक टायर रिसाइकिलिंग की फैक्ट्रियों की हालत सबसे बुरी है, जहां पुराने टायर जलाए जाते हैं। इनसे निकलने वाला धुंआ सीधे वातावरण में फैलकर लोगों को कैंसर और टीबी जैसी जानलेवा बीमारियां बांट रहा है।
आरोप लगाया कि धुएं के साथ उड़ने वाले कार्बन के कण गांवों में फैलते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर लोगों को मौत की ओर धकेल रहे हैं। घान्नाखंडी निवासी जहांगीर आलम, मांगाराम, अधिवक्ता शहजार अली, माटकी निवासी संदीप त्यागी ने बताया कि अनेक फैक्ट्रियों की चिमनी की ऊंचाई भी मानकों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में धुआं निकलते ही गांव में बैठ जाता है। धुंए के गांव में बैठने की प्रमुख वजह उसमें कार्बन के कणों का होना है। बड़ी संख्या में लोग कैंसर, टीबी, दिल, और सांस के मरीज बन गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह फैक्ट्रियों से निकलने वाले जानलेवा धुंए पर अंकुश लगवाने के लिए कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं, मगर अभी तक कोई कदम प्रशासन की ओर से नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने नियमों का पालन न करने वाली फैक्ट्रियों को बंद कराने की मांग प्रशासन से की है।
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स्वास्थ्य विभाग ने टीबी फैलने की पुष्टि की
फैक्ट्रियों से निकलने वाले जलरीले धुंए और कैमिकल के कारण बीमारी महामारी का रूप लेती जा रही है। गांव घुन्ना निवासी राजमणि लांबा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी। उनका सवाल था कि क्षेत्र में लगी टायर और अन्य फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं से कौन-कौन सी बीमारी फैलती हैं और कितने मरीज क्षेत्र में हैं। राजमणि द्वारा मांगी गई सूचना के बाद जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेेश जैन ने 21 मई 18 को जवाब दिया। इसमें उन्होंने बताया है कि टायर की फैक्ट्री से निकलने वाले विषैली गैस और धुंए से कैंसर, टीबी, दमा, सांस की बीमारियां फैलती हैं। उन्होंने गांव घुन्ना, माटकी, झरौली, मालाहेड़ी, घान्नाखेड़ी, महेश्वरी खुर्द, मेहरव आदि गांवों के मरीजों की सूची भी उपलब्ध कराई है, जिसमें बड़ी संख्या में उक्त गांवों के टीबी के मरीजों के नाम अंकित हैं।
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प्रदूषण फैला रही फैक्ट्रियों को नोटिस जारी
बेहट रोड पर टायर की तीन फैक्ट्री हैं, जिनमें से दो को दिल्ली से और एक को लखनऊ से अनुमति मिली हुई है। यानी तीनों फैक्ट्री वैध हैं। हमें कुछ कमियां नजर आई थीं, जिनके बाद तीनों फैक्ट्रियों को नोटिस जारी कर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि वह जल्द ही सुधार नहीं करते हैं तो फैक्ट्रियों को बंद कराने के अलावा हमारे पर कोई और रास्ता नहीं बचेगा।
जेवी सिंह, एई, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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सहारनपुर। बेहट रोड के औद्योगिक क्षेत्र की कुछ फैक्ट्रियां आसपास के गांवों के लिए मुसीबत बन गई हैं। यह फैक्ट्रियां विषैली गैस और धुएं के रूप में जहर उगल रही हैं। इससे एक दर्जन से अधिक गांव के लोग प्रभावित हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक सांस के मरीज बनकर जिंदगी के लिए जूझ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी माना है कि फैक्ट्रियों की वजह से टीबी समेत अन्य बीमारियां फैल रही हैं। क्षेत्रवासियों ने नुकसान पहुंचा रहे उद्योगों को बंद कराने की मांग प्रशासन से की है। अपनी पीढ़ियों को बीमारी से बचाने के लिए क्षेत्र के लोग आंदोलन पर उतर आए हैं।
गांव घुन्ना निवासी राजमणि लांबा, मिंटू राणा, मालाहेड़ी निवासी भूषण दास, माटकी के ग्राम प्रधान विनय त्यागी और डॉ. सुंदर ने बताया कि बेहट रोड पर नई-नई फैक्ट्रियां स्थापित होने का सिलसिला पिछले 20 साल से जारी है। वर्तमान में इतनी फैक्ट्रियां स्थापित हो चुकी हैं। इनकी गिनती करना मुश्किल है। आरोप लगाया कि ज्यादातर फैक्ट्रियां नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। इनमें अनेक टायर रिसाइकिलिंग की फैक्ट्रियों की हालत सबसे बुरी है, जहां पुराने टायर जलाए जाते हैं। इनसे निकलने वाला धुंआ सीधे वातावरण में फैलकर लोगों को कैंसर और टीबी जैसी जानलेवा बीमारियां बांट रहा है।
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आरोप लगाया कि धुएं के साथ उड़ने वाले कार्बन के कण गांवों में फैलते हैं, जो सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर लोगों को मौत की ओर धकेल रहे हैं। घान्नाखंडी निवासी जहांगीर आलम, मांगाराम, अधिवक्ता शहजार अली, माटकी निवासी संदीप त्यागी ने बताया कि अनेक फैक्ट्रियों की चिमनी की ऊंचाई भी मानकों के अनुरूप नहीं है। ऐसे में धुआं निकलते ही गांव में बैठ जाता है। धुंए के गांव में बैठने की प्रमुख वजह उसमें कार्बन के कणों का होना है। बड़ी संख्या में लोग कैंसर, टीबी, दिल, और सांस के मरीज बन गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह फैक्ट्रियों से निकलने वाले जानलेवा धुंए पर अंकुश लगवाने के लिए कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं, मगर अभी तक कोई कदम प्रशासन की ओर से नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों ने नियमों का पालन न करने वाली फैक्ट्रियों को बंद कराने की मांग प्रशासन से की है।
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स्वास्थ्य विभाग ने टीबी फैलने की पुष्टि की
फैक्ट्रियों से निकलने वाले जलरीले धुंए और कैमिकल के कारण बीमारी महामारी का रूप लेती जा रही है। गांव घुन्ना निवासी राजमणि लांबा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी से सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगी थी। उनका सवाल था कि क्षेत्र में लगी टायर और अन्य फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं से कौन-कौन सी बीमारी फैलती हैं और कितने मरीज क्षेत्र में हैं। राजमणि द्वारा मांगी गई सूचना के बाद जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेेश जैन ने 21 मई 18 को जवाब दिया। इसमें उन्होंने बताया है कि टायर की फैक्ट्री से निकलने वाले विषैली गैस और धुंए से कैंसर, टीबी, दमा, सांस की बीमारियां फैलती हैं। उन्होंने गांव घुन्ना, माटकी, झरौली, मालाहेड़ी, घान्नाखेड़ी, महेश्वरी खुर्द, मेहरव आदि गांवों के मरीजों की सूची भी उपलब्ध कराई है, जिसमें बड़ी संख्या में उक्त गांवों के टीबी के मरीजों के नाम अंकित हैं।
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प्रदूषण फैला रही फैक्ट्रियों को नोटिस जारी
बेहट रोड पर टायर की तीन फैक्ट्री हैं, जिनमें से दो को दिल्ली से और एक को लखनऊ से अनुमति मिली हुई है। यानी तीनों फैक्ट्री वैध हैं। हमें कुछ कमियां नजर आई थीं, जिनके बाद तीनों फैक्ट्रियों को नोटिस जारी कर सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। यदि वह जल्द ही सुधार नहीं करते हैं तो फैक्ट्रियों को बंद कराने के अलावा हमारे पर कोई और रास्ता नहीं बचेगा।
जेवी सिंह, एई, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।