{"_id":"5b0ef3834f1c1bf16e8b5601","slug":"11527706499-saharanpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सियासी इफ्तार पार्टियों से परहेज करें रोजेदार: उलमा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सियासी इफ्तार पार्टियों से परहेज करें रोजेदार: उलमा
Updated Thu, 31 May 2018 12:24 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सियासी इफ्तार पार्टियों से परहेज करें रोजेदार : उलमा
देवबंद (सहारनपुर)। विभिन्न सियासी दल या फिर उन दलों के नेता सियासी लाभ उठाने के लिए पवित्र रमजान माह में इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते हैं। इसमें बड़ी तादाद में लोग शामिल भी होते हैं। लेकिन इस पर देवबंदी उलमा का कहना है कि इन सियासी इफ्तार पार्टियों में जाने से रोजेदारों को परहेज करना चाहिए।
रमजान माह में रोजेदारों को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए और कहां जाने से रुकना चाहिए। इसको लेकर तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि रमजान माह में अल्लाह के बंदे अल्लाह ताआला की रजा (खुशी) के लिए रोजा रखते हैं। पूरे दिन भूखे प्यासे रहते हैं। पांच वक्त की नमाज के साथ ही तरावीह पढ़ते हैं और उसके बाद भी वे अपना अधिक समय अल्लाह की इबादत में ही गुजारते हैं। इसलिए उन्हें रोजे के मायने का अंदाजा होता है। मौलाना वाजदी ने कहा कि इस्लाम में है कि रोजेदार को इफ्तार कराना बड़े सवाब का काम है। लेकिन आमतौर पर देखने में आया है कि कुछ सियासी दल और उनसे जुड़े नेता सियासी लाभ उठाने के लिए रमजान में बड़ी बड़ी इफ्तार पार्टियों के आयोजन करते हैं। जिनमें अधिकांश भीड़ उन लोगों की होती है जिनका रोजा और नमाज से दूर दूर तक का वास्ता नहीं है। कहा कि रोजा एक इबादत है। यह कोई नुमाइश की चीज नहीं है कि उसके नाम पर सियासी रोटियां सेंकी जाएं। इसलिए सभी रोजेदारों को चाहिए कि वो सियासी दलों की इफ्तार पार्टियों में जाने से परहेज करें और कोशिश करें की अपने घर पर और परिवार के साथ ही इफ्तार करें।
विज्ञापन
देवबंद (सहारनपुर)। विभिन्न सियासी दल या फिर उन दलों के नेता सियासी लाभ उठाने के लिए पवित्र रमजान माह में इफ्तार पार्टियों का आयोजन करते हैं। इसमें बड़ी तादाद में लोग शामिल भी होते हैं। लेकिन इस पर देवबंदी उलमा का कहना है कि इन सियासी इफ्तार पार्टियों में जाने से रोजेदारों को परहेज करना चाहिए।
रमजान माह में रोजेदारों को किन बातों का ख्याल रखना चाहिए और कहां जाने से रुकना चाहिए। इसको लेकर तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष मौलाना नदीमुलवाजदी ने कहा कि रमजान माह में अल्लाह के बंदे अल्लाह ताआला की रजा (खुशी) के लिए रोजा रखते हैं। पूरे दिन भूखे प्यासे रहते हैं। पांच वक्त की नमाज के साथ ही तरावीह पढ़ते हैं और उसके बाद भी वे अपना अधिक समय अल्लाह की इबादत में ही गुजारते हैं। इसलिए उन्हें रोजे के मायने का अंदाजा होता है। मौलाना वाजदी ने कहा कि इस्लाम में है कि रोजेदार को इफ्तार कराना बड़े सवाब का काम है। लेकिन आमतौर पर देखने में आया है कि कुछ सियासी दल और उनसे जुड़े नेता सियासी लाभ उठाने के लिए रमजान में बड़ी बड़ी इफ्तार पार्टियों के आयोजन करते हैं। जिनमें अधिकांश भीड़ उन लोगों की होती है जिनका रोजा और नमाज से दूर दूर तक का वास्ता नहीं है। कहा कि रोजा एक इबादत है। यह कोई नुमाइश की चीज नहीं है कि उसके नाम पर सियासी रोटियां सेंकी जाएं। इसलिए सभी रोजेदारों को चाहिए कि वो सियासी दलों की इफ्तार पार्टियों में जाने से परहेज करें और कोशिश करें की अपने घर पर और परिवार के साथ ही इफ्तार करें।
विज्ञापन