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बकाया भुगतान में पिछड़ी जिले की सहकारी चीनी मिलें
Updated Sat, 05 Aug 2017 12:16 AM IST
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बकाया भुगतान में पिछड़ी जिले की सहकारी चीनी मिलें
सहारनपुर। प्रदेश सरकार की तमाम कवायद के बावजूद शुगर मिलें बकाया भुगतान करने में पिछड़ रही है। निजी क्षेत्र की चीनी मिलें तो फिर भी भुगतान कर रही है, जबकि सहकारी क्षेत्र की दोनों मिलों ने पिछली 15 फरवरी से अब तक एक भी पैसे का बकाया भुगतान नहीं किया है। जिले की निजी क्षेत्र की दो शुगर मिलों पर जहां करीब 52 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि दोनों सहकारी मिलें किसानों के 69.53 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं।
सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने की कवायद शुरू की थी। गन्ना मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को अपनी प्राथमिकता बताते हुए दावा किया था कि जल्द ही किसानों को पेमेंट हो जाएगा। तमाम कवायद के बाद भी शुगर मिलों के रवैये में कोई तब्दीली नहीं दिखाई दी। देवबंद को छोड़कर किसी भी मिल ने पूरा गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है। हालांकि शेरमऊ पर 71 लाख रुपये ही बकाया हैं। गांगनौली शुगर मिल पर 51.34 करोड़ रूपये, सहकारी चीनी मिल नानौता पर 44.73 करोड़ और सहकारी चीनी मिल सरसावा पर 24.80 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। इसके अलावा बकाया पर ब्याज और सहकारी गन्ना समितियों का कमीशन भी मिलों पर बकाया है।
जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि निजी क्षेत्र की गांगनौली शुगर मिल चीनी बेचकर रोजाना भुगतान कर रही है। सहकारी चीनी मिलों पर भी भुगतान के लिए दबाव दिया जा रहा है।
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सहारनपुर। प्रदेश सरकार की तमाम कवायद के बावजूद शुगर मिलें बकाया भुगतान करने में पिछड़ रही है। निजी क्षेत्र की चीनी मिलें तो फिर भी भुगतान कर रही है, जबकि सहकारी क्षेत्र की दोनों मिलों ने पिछली 15 फरवरी से अब तक एक भी पैसे का बकाया भुगतान नहीं किया है। जिले की निजी क्षेत्र की दो शुगर मिलों पर जहां करीब 52 करोड़ रुपये बकाया हैं, जबकि दोनों सहकारी मिलें किसानों के 69.53 करोड़ रुपये दबाए बैठी हैं।
सत्ता में आने के बाद भाजपा सरकार ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान कराने की कवायद शुरू की थी। गन्ना मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक ने बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को अपनी प्राथमिकता बताते हुए दावा किया था कि जल्द ही किसानों को पेमेंट हो जाएगा। तमाम कवायद के बाद भी शुगर मिलों के रवैये में कोई तब्दीली नहीं दिखाई दी। देवबंद को छोड़कर किसी भी मिल ने पूरा गन्ना मूल्य भुगतान नहीं किया है। हालांकि शेरमऊ पर 71 लाख रुपये ही बकाया हैं। गांगनौली शुगर मिल पर 51.34 करोड़ रूपये, सहकारी चीनी मिल नानौता पर 44.73 करोड़ और सहकारी चीनी मिल सरसावा पर 24.80 करोड़ रुपये अभी भी बकाया है। इसके अलावा बकाया पर ब्याज और सहकारी गन्ना समितियों का कमीशन भी मिलों पर बकाया है।
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जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी ने बताया कि निजी क्षेत्र की गांगनौली शुगर मिल चीनी बेचकर रोजाना भुगतान कर रही है। सहकारी चीनी मिलों पर भी भुगतान के लिए दबाव दिया जा रहा है।
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