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मुख्यमंत्री से मिलने की आस में फिल लखनऊ पहुंचा बीएसएफ का जवान अजय
Updated Mon, 26 Feb 2018 12:37 AM IST
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गंगोह (सहारनपुर)। मथुरा में मुख्यमंत्री से आश्वासन मिलने के बाद लखनऊ लौटे दलित बीएसएफ जवान अजय कुमार ने भारती यादव के साथ मीडिया के समक्ष पूरे मामले को रखते हुए अपना दर्द बयां किया। जवान ने कहा कि जनपद सहारनपुर की पुलिस और राजस्व विभाग ने उसके परिवार को उजाड़कर उनकी खुशियां छीन ली हैं।
गांव ताताहेड़ी निवासी बीएसएफ जवान अजय कुमार रविवार को लखनऊ में मीडिया के सामने पहुंचा और अपने परिवार के साथ गंगोह पुलिस एवं राजस्व विभाग द्वारा किए गए उत्पीड़न के बारे में मीडिया को बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान, राजस्व विभाग एवं पुलिस ने उसके परिवार पर अत्याचार की सारी सीमाएं लांघ डाली। उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। पिता और भाई को मारपीटकर जेल भेजने के साथ ही महिलाओं और बच्चों सहित पूरे परिवार के खिलाफ जानलेवा हमले की धारा 307 में रिपोर्ट दर्ज कर दी गई। पुलिस के खौफ से उसका पूरा परिवार एक माह तक इधर-उधर भटक रहा है।
पुलिस की धक्का मुक्की के कारण उसकी गर्भवती पत्नी की हालत बिगड़ गई और जन्म के बाद उसके पुत्र की मौत हो गई। इसके अलावा तीन बच्चों की परीक्षा तक छूट गई और उनका भविष्य बर्बाद हो गया।
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लेकिन जब दुबारा जांच हुई तो प्रशासन की झूठ का पुलिंदा खुल गया और मामला पूरा झूठा पाया गया। लेकिन इसके बावजूद न तो झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लेखपाल के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही ग्राम प्रधान अथवा दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई की गई। उसके साथ अभद्रता करने और जेल में डालने की धमकी देने वाले कोतवाली प्रभारी पर भी अधिकारी मेहरबान बने हुए हैं।
वह डीएम से लेकर प्रधानमंत्री तक सभी से न्याय की गुहार लगा चुका है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रेस वार्ता में उनके साथ जयहिंद सेवा संस्थान की अध्यक्ष भारती यादव एवं अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
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गांव ताताहेड़ी निवासी बीएसएफ जवान अजय कुमार रविवार को लखनऊ में मीडिया के सामने पहुंचा और अपने परिवार के साथ गंगोह पुलिस एवं राजस्व विभाग द्वारा किए गए उत्पीड़न के बारे में मीडिया को बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम प्रधान, राजस्व विभाग एवं पुलिस ने उसके परिवार पर अत्याचार की सारी सीमाएं लांघ डाली। उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया गया। पिता और भाई को मारपीटकर जेल भेजने के साथ ही महिलाओं और बच्चों सहित पूरे परिवार के खिलाफ जानलेवा हमले की धारा 307 में रिपोर्ट दर्ज कर दी गई। पुलिस के खौफ से उसका पूरा परिवार एक माह तक इधर-उधर भटक रहा है।
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पुलिस की धक्का मुक्की के कारण उसकी गर्भवती पत्नी की हालत बिगड़ गई और जन्म के बाद उसके पुत्र की मौत हो गई। इसके अलावा तीन बच्चों की परीक्षा तक छूट गई और उनका भविष्य बर्बाद हो गया।
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लेकिन जब दुबारा जांच हुई तो प्रशासन की झूठ का पुलिंदा खुल गया और मामला पूरा झूठा पाया गया। लेकिन इसके बावजूद न तो झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वाले लेखपाल के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही ग्राम प्रधान अथवा दोषी पुलिसकर्मियों पर कोई कार्रवाई की गई। उसके साथ अभद्रता करने और जेल में डालने की धमकी देने वाले कोतवाली प्रभारी पर भी अधिकारी मेहरबान बने हुए हैं।
वह डीएम से लेकर प्रधानमंत्री तक सभी से न्याय की गुहार लगा चुका है। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रेस वार्ता में उनके साथ जयहिंद सेवा संस्थान की अध्यक्ष भारती यादव एवं अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।