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पट्टे के कागज लेकर पुलिस लाइन पहुंचे फौजी के पिता एवं भाई
Updated Thu, 08 Feb 2018 12:32 AM IST
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सहारनपुर। फौजी के पिता सरदारा सिंह ने पुलिस लाइन पहुंचकर आरोप लगाया कि पैमाइश करने पुलिस के साथ पहुंची टीम में शामिल एक लेखपाल पर हमला करने का उन पर आरोप लगाया गया। इतने लोगों के सामने एक लेखपाल से मारपीट कोई नहीं कर सकता। पुलिस ने झूठे मामले में ही उन्हें और उनके बेटे को न सिर्फ जेल भेजा बल्कि बी-फार्मा कर रही उनकी पौत्री समेत पूरे परिवार को ही नामजद करा दिया। बिना किसी कसूर के उन्होंने 28 दिन जेल में काटे।
बुधवार को बीएसएफ जवान अजय कुमार के पिता 80 वर्षीय सरदारा सिंह अपनी जमीन के पट्टे के कागज दिखाने के लिए पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचे। उन्होंने पुलिस पर बिना किसी जांच के ही उन्हें जेल भेजने का आरोप लगाया। सरदारा सिंह ने आरोप लगाया कि लेखपाल के साथ राजस्व विभाग की टीम के एक दर्जन लोग मौजूद थे। पुलिसकर्मी भी साथ थे। उन्हें तो सिर्फ कागज दिखाने के लिए बुलाया था। वह, उनकी पत्नी और उनका बेटा प्रमोद तीनों लोग खेत पर कागज दिखाने के लिए गए थे, लेकिन उन्होंने कागज देखने के बजाय उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें डंडे मारे और जमीन पर गिराकर पीटा। जिसका वीडियो भी है। उसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। उनकी ही जमीन, उन्हें ही पीटा और उन्हें ही जेल भेज दिया। बिना किसी कसूर के 80 साल की उम्र में उन्हें 28 दिन जेल में काटने पड़े। पुलिस ने लेखपाल के आरोप की जांच तक नहीं की। बी-फार्मा कर रही उनकी पौत्री तक को नामजद करा दिया। घर में कोई नहीं रह गया था। उन्होंने बताया कि वह पहले एसएसपी से मिले थे। बाद में वह देहात पुलिस अधीक्षक से मले हैं। उन्होंने उन्हें दो दिन में कार्रवाई का समय दिया है।
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--। अधिकारियों से पहले थानाध्यक्ष ने बुलाया
सरदारा सिंह के परिजनों ने बताया कि सरदारा सिंह और उनके बेटे को सुबह ही सहारनपुर में अधिकारियों के पास जाने से पहले थानाध्यक्ष गंगोह ने थाना पर बुलाया। आरोप है कि उन पर किसी प्रकार की शिकायत न किए जाने एवं किसी प्रकार का पुलिस पर आरोप न लगाने के लिए दबाव बनाया।
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--। दो-तीन दिन पूर्व ही जेल से छूटकर आए सरदारा सिंह और प्रमोद
बुजुर्ग सरदारा सिंह ने बताया दो-तीन दिन पहले ही वह जेल से जमानत पर छूट कर आए हैं। उनकी तो पैरवी करने वाला भी कोई नहीं था। कुनबे के कुछ लोगों ने ही जमानत कराई है। उनका बेटा तो बीएसएफ में ड्यूटी पर है।
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--। मामले की गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई होगी
पुलिस अधीक्षक देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि पूछताछ के लिए सरदारा सिंह और प्रमोद को बुलवाया गया था। उनके कागज भी देखे गए हैं। राजस्व विभाग से भी रिपोर्ट मंगवाई जा रही है। इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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--। जांच के बाद किया था गिरफ्तार
गंगोह थाना प्रभारी संजीव कुमार का कहना है कि लेखपाल राजकुमार ने सरदारा सिंह, प्रमोद कुमार एवं उसके परिवार पर जमीन पर गिराकर एवं गला घोंटकर हत्या करने के प्रयास का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया था कि घटना स्थल पर कई लेखपालों एवं पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में सरदारा सिंह ने उन पर हमला किया था। पुलिस ने मौके पर जाकर राजस्व विभाग की टीम से पूछताछ की। उसके बाद सरदारा सिंह और प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया गया था।
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बुधवार को बीएसएफ जवान अजय कुमार के पिता 80 वर्षीय सरदारा सिंह अपनी जमीन के पट्टे के कागज दिखाने के लिए पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचे। उन्होंने पुलिस पर बिना किसी जांच के ही उन्हें जेल भेजने का आरोप लगाया। सरदारा सिंह ने आरोप लगाया कि लेखपाल के साथ राजस्व विभाग की टीम के एक दर्जन लोग मौजूद थे। पुलिसकर्मी भी साथ थे। उन्हें तो सिर्फ कागज दिखाने के लिए बुलाया था। वह, उनकी पत्नी और उनका बेटा प्रमोद तीनों लोग खेत पर कागज दिखाने के लिए गए थे, लेकिन उन्होंने कागज देखने के बजाय उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। पुलिस ने उन्हें डंडे मारे और जमीन पर गिराकर पीटा। जिसका वीडियो भी है। उसके बाद उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। उनकी ही जमीन, उन्हें ही पीटा और उन्हें ही जेल भेज दिया। बिना किसी कसूर के 80 साल की उम्र में उन्हें 28 दिन जेल में काटने पड़े। पुलिस ने लेखपाल के आरोप की जांच तक नहीं की। बी-फार्मा कर रही उनकी पौत्री तक को नामजद करा दिया। घर में कोई नहीं रह गया था। उन्होंने बताया कि वह पहले एसएसपी से मिले थे। बाद में वह देहात पुलिस अधीक्षक से मले हैं। उन्होंने उन्हें दो दिन में कार्रवाई का समय दिया है।
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--। अधिकारियों से पहले थानाध्यक्ष ने बुलाया
सरदारा सिंह के परिजनों ने बताया कि सरदारा सिंह और उनके बेटे को सुबह ही सहारनपुर में अधिकारियों के पास जाने से पहले थानाध्यक्ष गंगोह ने थाना पर बुलाया। आरोप है कि उन पर किसी प्रकार की शिकायत न किए जाने एवं किसी प्रकार का पुलिस पर आरोप न लगाने के लिए दबाव बनाया।
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--। दो-तीन दिन पूर्व ही जेल से छूटकर आए सरदारा सिंह और प्रमोद
बुजुर्ग सरदारा सिंह ने बताया दो-तीन दिन पहले ही वह जेल से जमानत पर छूट कर आए हैं। उनकी तो पैरवी करने वाला भी कोई नहीं था। कुनबे के कुछ लोगों ने ही जमानत कराई है। उनका बेटा तो बीएसएफ में ड्यूटी पर है।
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--। मामले की गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई होगी
पुलिस अधीक्षक देहात विद्यासागर मिश्र का कहना है कि पूछताछ के लिए सरदारा सिंह और प्रमोद को बुलवाया गया था। उनके कागज भी देखे गए हैं। राजस्व विभाग से भी रिपोर्ट मंगवाई जा रही है। इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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--। जांच के बाद किया था गिरफ्तार
गंगोह थाना प्रभारी संजीव कुमार का कहना है कि लेखपाल राजकुमार ने सरदारा सिंह, प्रमोद कुमार एवं उसके परिवार पर जमीन पर गिराकर एवं गला घोंटकर हत्या करने के प्रयास का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी। जिसमें बताया गया था कि घटना स्थल पर कई लेखपालों एवं पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में सरदारा सिंह ने उन पर हमला किया था। पुलिस ने मौके पर जाकर राजस्व विभाग की टीम से पूछताछ की। उसके बाद सरदारा सिंह और प्रमोद कुमार को गिरफ्तार किया गया था।