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शहादत का जिक्र आते ही नम हुईं आंखें
Updated Sun, 01 Oct 2017 01:23 AM IST
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शहादत का जिक्र आते ही नम हुईं आंखें
सहारनपुर। मुहर्रम की नौ तारीख को भी शहर में जगह-जगह मजलिसों का आयोजन किया गया। इनमें मुस्लिम विद्वानों ने हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम की शहादत पर रोशनी डाली। मजलिसों में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए।
पहली मजलिस इमाम बारगाह सामानियान मोहल्ला कायस्थान में सुलतानपुर से तशरीफ लाए हुज्जत उल इसलाम मौलाना मकातिब अली खान सहाब ने खिताब फरमाया, जबकि दूसरी मजलिस बड़ी इमाम बारगाह, जाफर नवाज में लखनऊ से तशरीफ लाए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना शेख इब्राहिम कुम्मी सहाब ने शहादत पर रोशनी डाली। तीसरी मजलिस छोटी इमाम बारगाह में बिजनौर से तशरीफ लाए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना जहूर मेहंदी सहाब ने खिताब फरमाया। मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का छह माह का बच्चा हजरत अली असग़र प्यास से तड़प रहे थे। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम हजरत अली असग़र को गोद में लेकर जंग के मैदान में पहुंचे और यजीदी लश्कर से कहा कि ‘हो सकता है कि मैं तुम्हारी नजर में खतावार हूं, लेकिन इस छोटे बच्चे ने तो कोई खता नहीं की है इसे थोड़ा सा पानी पिला दो’ इसके जवाब में यजीदी लश्कर की ओर से एक तीर आया और हजरत अली असग़र अलैहिस्सलाम की गर्दन पर लगा बच्चा मुस्कराता हुआ अपने बाप हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की गोद में ही शहीद हो गया। मजलिसों के आखिर में नोहाख्वानी की गयी, जिसमें अन्जुमने अकबरिया व अन्जुमने इमामिया के सायबे बियाज सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जै़दी, आसिफ रजा, मिर्जा मेहरबान, मिर्जा अयाज, मिर्जा नईम आदि ने नोहाख्वानी की।
इमाम बारगाहों में की गई शब्बेदारी
मजलूमे जमाना हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व करबला के 72 साथियों की शहादत की याद में रात भर शब्बेदारी की गयी। नमाजे आमाले शबे आशुरा अदा की गयी तथा इमाम बारगाहों में रोशनी, धूप व अगरबत्ती की गयी। नगर के विभिन्न जगाहों पर परंपरागत ताजिये सजाए गए। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में 9 मुहर्रम की रात में चेक बड़तला अंसारियान, मोहल्ला चौधरियान स्थित पीर पर व मोहल्ला चेक ख्वाजा जादगान पर ताजिये सजाए गए और नगर के विभिन्न इमाम बारगाहों में जायरीनों ने धूप व अगरबत्ती कर मन्नतें मांगीं। अजाखानों में जायरीनों का आना जाना पूरी रात रहा। लोगों ने मस्जिदों में नमाजे आमाले शबे आशुरा अदा की गयी। इस मौके पर सलामत हुसैन समीर जैदी, मिसम जैदी, काशिफ जैदी, साहिल जैदी, अथर जैदी, जिशान हैदर, मोहम्मद अली, आलम काजमी मुंतजिर हुसैन, फरहत हुसैन, आसिफ अलवी, फहीम, अख्तर अली जैदी, एजाज पंजेतन, अली कासिम, जमीर हैदर काजमी, एडवोकेट मंजर हुसैन काजमी, अली जै़ब काजमी, आसिफ हैदर, नगीन हुसैन, चांद जैदी आदि मौजूद रहे।
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सहारनपुर। मुहर्रम की नौ तारीख को भी शहर में जगह-जगह मजलिसों का आयोजन किया गया। इनमें मुस्लिम विद्वानों ने हजरत अली असगर अलैहिस्सलाम की शहादत पर रोशनी डाली। मजलिसों में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए।
पहली मजलिस इमाम बारगाह सामानियान मोहल्ला कायस्थान में सुलतानपुर से तशरीफ लाए हुज्जत उल इसलाम मौलाना मकातिब अली खान सहाब ने खिताब फरमाया, जबकि दूसरी मजलिस बड़ी इमाम बारगाह, जाफर नवाज में लखनऊ से तशरीफ लाए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना शेख इब्राहिम कुम्मी सहाब ने शहादत पर रोशनी डाली। तीसरी मजलिस छोटी इमाम बारगाह में बिजनौर से तशरीफ लाए हुज्जत उल इस्लाम मौलाना जहूर मेहंदी सहाब ने खिताब फरमाया। मजलिसों में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का छह माह का बच्चा हजरत अली असग़र प्यास से तड़प रहे थे। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम हजरत अली असग़र को गोद में लेकर जंग के मैदान में पहुंचे और यजीदी लश्कर से कहा कि ‘हो सकता है कि मैं तुम्हारी नजर में खतावार हूं, लेकिन इस छोटे बच्चे ने तो कोई खता नहीं की है इसे थोड़ा सा पानी पिला दो’ इसके जवाब में यजीदी लश्कर की ओर से एक तीर आया और हजरत अली असग़र अलैहिस्सलाम की गर्दन पर लगा बच्चा मुस्कराता हुआ अपने बाप हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की गोद में ही शहीद हो गया। मजलिसों के आखिर में नोहाख्वानी की गयी, जिसमें अन्जुमने अकबरिया व अन्जुमने इमामिया के सायबे बियाज सलीस हैदर काजमी, अनवर अब्बास जै़दी, आसिफ रजा, मिर्जा मेहरबान, मिर्जा अयाज, मिर्जा नईम आदि ने नोहाख्वानी की।
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इमाम बारगाहों में की गई शब्बेदारी
मजलूमे जमाना हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम व करबला के 72 साथियों की शहादत की याद में रात भर शब्बेदारी की गयी। नमाजे आमाले शबे आशुरा अदा की गयी तथा इमाम बारगाहों में रोशनी, धूप व अगरबत्ती की गयी। नगर के विभिन्न जगाहों पर परंपरागत ताजिये सजाए गए। हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की याद में 9 मुहर्रम की रात में चेक बड़तला अंसारियान, मोहल्ला चौधरियान स्थित पीर पर व मोहल्ला चेक ख्वाजा जादगान पर ताजिये सजाए गए और नगर के विभिन्न इमाम बारगाहों में जायरीनों ने धूप व अगरबत्ती कर मन्नतें मांगीं। अजाखानों में जायरीनों का आना जाना पूरी रात रहा। लोगों ने मस्जिदों में नमाजे आमाले शबे आशुरा अदा की गयी। इस मौके पर सलामत हुसैन समीर जैदी, मिसम जैदी, काशिफ जैदी, साहिल जैदी, अथर जैदी, जिशान हैदर, मोहम्मद अली, आलम काजमी मुंतजिर हुसैन, फरहत हुसैन, आसिफ अलवी, फहीम, अख्तर अली जैदी, एजाज पंजेतन, अली कासिम, जमीर हैदर काजमी, एडवोकेट मंजर हुसैन काजमी, अली जै़ब काजमी, आसिफ हैदर, नगीन हुसैन, चांद जैदी आदि मौजूद रहे।
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