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43 बसों से घरों को रवाना हुए यूपी के 1063 कामगार

Sat, 02 May 2020 11:09 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 02 May 2020 11:09 PM IST
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1063 workers of UP left for homes in 43 buses
अपने घरों को जाने के लिए बस में सवार कामगार - फोटो : SAHARANPUR
कई कई दिन तक पैदल चलने के बाद भी फंसे थे रास्ते में
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गागलहेड़ी (सहारनपुर)। लॉकडाउन के चलते उत्तराखंड के हरिद्वार में फंसे यूपी के विभिन्न जिलों के 1063 कामगारों को चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद दोनों राज्यों के पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में शनिवार को उप्र राज्य सड़क परिवहन की 43 बसों से उनके गंत्वयों के लिए रवाना कर दिया गया। सैकड़ों किमी पैदल चलकर यहां पहुंचे इन कामगारों के चेहरों पर घर पहुंचने को लेकर उत्साह साफ दिखाई दिया।
यूपी-उत्तराखंड बार्डर पर पड़ोसी जिले हरिद्वार की सीमा में अमरपुर में बने राधा स्वामी सत्संग भवन परिसर में यूपी के इन कामगारों को ठहराया गया था। केंद्र सरकार के आदेश के बाद इन कामगारों को उनके घरों पर भेजने की व्यवस्था दोनों राज्यों की सरकारों ने की। भगवानपुर एसडीएम संतोष कुमार पांडेय ने बताया कि उनके यहां करीब एक हजार 63 कामगार फंसे हैं जो उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के हैं। शनिवार को इन सभी कामगारों को उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की 43 बसों से इनके गृह जनपदों कौशांबी, रायबरेली, गोंडा, बस्ती, लखनऊ, बरेली, अलीगढ़, बुलंदशहर और कानपुर आदि जगह भेजा गया है। इन सभी को खाने के पैकेट और मेडिकल किट देकर बसों में सवार कराया गया। एसडीएम संतोष पांडेय ने इन सभी लोगों के नाम और पतों की लिस्ट बना कर एसडीएम बेहट दीप्ती देव, सीओ सदर रमेश चंद्र शर्मा, थाना प्रभारी भानु प्रताप सिंह को सौंपी। जहां से इन बसों में यात्रियों की सूची मिलान के बाद इन्हें गंतव्यों के लिए रवाना कर दिया गया। प्रत्येक बस में सुरक्षा के लिहाज से दो दो पुलिसकर्मी भी भेजे गए हैं।
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पंजाब से पैदल चल कर उत्तराखंड के भगवानपुर पहुंचने वाले बदायूं निवासी हरवेंद्र ने बताया की वो पंजाब में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। लॉकडाउन की वजह से कंपनी बंद हो गई। जो पैसे थे वो भी खर्च हो गए थे। किसी तरह पैदल चलकर यहां पहुंचा था।
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बिजनौर निवासी राहुल ने बताया कि लुधियाना कपड़ा फैक्ट्री में काम करता था। फैक्ट्री बंद होने के कारण घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। इस लिए पैदल ही चल दिया। 27 तारीख को उत्तराखंड पुलिस ने रोक लिया। अब घर जाने की राह मिली है।

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बलरामपुर निवासी सिनोद और लखनऊ निवासी प्रदीप ने बताया कि वे जालंधर से पैदल चल कर यहां तक पहुंचे हैं। पैसे खत्म होने के बाद खाने पीने की दिक्कत होने पर वे अपने घरों के लिए चले थे। उत्तराखंड पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद यहां भिजवा दिया। अब उन्हें घर भेजा जा रहा है जिसकी खुशी वे शब्दों में नहीं बयान कर सकते हैं।
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