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फाइलेरिया रोग खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 13 Nov 2018 12:34 AM IST
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फाइलेरिया
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सहारनपुर। राष्ट्रीय वेक्टर रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत केंद्र सरकार ने देश को फाइलेरिया रोग (हाथी पांव) से मुक्त करने के लिए 2020 का लक्ष्य रखा है। सहारनपुर में फाइलेरिया के मरीजों की खोज के लिए सहारनपुर मिनी टास्क कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके तहत पब्लिक स्कूलों में पढ़ने वाले 14 वर्ष तक के बच्चों का एंटीजेनिमिया टेस्ट कराया जाएगा।
सोमवार को एसबीडी जिला अस्पताल में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए सीएमओ डॉ. बीएस सोढ़ी ने कहा कि लिमफैटिक फाइलेरियासिस के प्रति नॉन इनडेमिक 19 जनपदों में फाइलेरिया रोग की इनडोमिसिटी के सत्यापन के लिए मिनी टास्क कार्यक्रम चलाया जाएगा। सहारनपुर में भी यह कार्यक्रम चलेगा। मिनी टास्क कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के कुल 30 पब्लिक, प्राइवेट एवं धार्मिक शिक्षण संस्थानों के कक्षा चार से आठ तक के तथा नौ से 14 वर्ष की आयु के बच्चों का एंटीजेनिमिया टेस्ट किया जाएगा। बैठक में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर विक्रम सिंह पुंडीर, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजय यादव, जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर शिवांका गौड़ आदि मौजूद रहीं।
मच्छर के काटने से फैलता है फाइलेरिया रोग
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि फाइलेरिया रोग मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर फ्लूलेक्स एवं मैनसोनाइडिस प्रजाति के होते हैं, जिसमें मच्छर एक धागे समान परजीवी को हमारे शरीर में छोड़ता है। इस रोग का संक्रमण सामान्यतया बचपन में ही होता है। यद्यपि यह बीमारी वर्षों बाद सामने आती है। इस रोग में टांगों, हाथों, अंडकोश एवं शरीर के अन्य भागों में अत्यधिक सूजन होने लगती है। मगर बाद में यह सूजन स्थायी और लाइलाज हो जाती है। हाथी पांव खानदानी रोग नहीं है। अन्य रोगों की तरह फाइलेरिया (हाथी पांव) रोग की रोकथाम की जा सकती है तथा इसका उपचार संभव है। सहारनपुर में अभी तक कोई फाइलेरिया (हाथी पांव) से ग्रसित कोई रोगी नहीं पाया गया है।
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फाइलेरिया रोग के मुख्य लक्षण
फाइलेरिया रोग के मुख्य लक्षण बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, उल्टी आना, चक्कर आना, चकत्ते एवं खुजली का होना आदि हैं। इन लक्षणों के होने पर तुरंत अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क करें। साथ ही इस बीमारी से बचने के लिए घरों के आसपास गंदगी व कूड़ा इकट्ठा न होने दें। नालियों और गड्ढों में पानी जमा न होने दें। मच्छरों से बचने के सभी उपाय करें।
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सोमवार को एसबीडी जिला अस्पताल में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए सीएमओ डॉ. बीएस सोढ़ी ने कहा कि लिमफैटिक फाइलेरियासिस के प्रति नॉन इनडेमिक 19 जनपदों में फाइलेरिया रोग की इनडोमिसिटी के सत्यापन के लिए मिनी टास्क कार्यक्रम चलाया जाएगा। सहारनपुर में भी यह कार्यक्रम चलेगा। मिनी टास्क कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद के कुल 30 पब्लिक, प्राइवेट एवं धार्मिक शिक्षण संस्थानों के कक्षा चार से आठ तक के तथा नौ से 14 वर्ष की आयु के बच्चों का एंटीजेनिमिया टेस्ट किया जाएगा। बैठक में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर विक्रम सिंह पुंडीर, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर संजय यादव, जिला मलेरिया अधिकारी डॉक्टर शिवांका गौड़ आदि मौजूद रहीं।
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मच्छर के काटने से फैलता है फाइलेरिया रोग
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. शिवांका गौड़ ने बताया कि फाइलेरिया रोग मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर फ्लूलेक्स एवं मैनसोनाइडिस प्रजाति के होते हैं, जिसमें मच्छर एक धागे समान परजीवी को हमारे शरीर में छोड़ता है। इस रोग का संक्रमण सामान्यतया बचपन में ही होता है। यद्यपि यह बीमारी वर्षों बाद सामने आती है। इस रोग में टांगों, हाथों, अंडकोश एवं शरीर के अन्य भागों में अत्यधिक सूजन होने लगती है। मगर बाद में यह सूजन स्थायी और लाइलाज हो जाती है। हाथी पांव खानदानी रोग नहीं है। अन्य रोगों की तरह फाइलेरिया (हाथी पांव) रोग की रोकथाम की जा सकती है तथा इसका उपचार संभव है। सहारनपुर में अभी तक कोई फाइलेरिया (हाथी पांव) से ग्रसित कोई रोगी नहीं पाया गया है।
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फाइलेरिया रोग के मुख्य लक्षण
फाइलेरिया रोग के मुख्य लक्षण बुखार, सिर दर्द, बदन दर्द, उल्टी आना, चक्कर आना, चकत्ते एवं खुजली का होना आदि हैं। इन लक्षणों के होने पर तुरंत अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में संपर्क करें। साथ ही इस बीमारी से बचने के लिए घरों के आसपास गंदगी व कूड़ा इकट्ठा न होने दें। नालियों और गड्ढों में पानी जमा न होने दें। मच्छरों से बचने के सभी उपाय करें।