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धान में बढ़ा तना छेदक कीट का प्रकोप
Updated Mon, 03 Sep 2018 12:00 AM IST
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धान में बढ़ा तना छेदक कीट का प्रकोप
सहारनपुर। मौसम में हो रहे बदलाव के चलते धान की फसल पर तना छेदक कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इस कीट के प्रभावित पौधे की गोभ सूख जाती है। उसे बाहर निकालने पर काफी बदबू भी आती है। समय से उपचार नहीं होने पर उत्पादन प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा कई स्थानों पर पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप भी दिखाई दे रहा है।
धान की फसल पर कई जगह तना छेदक यानी स्टेम बोरर का प्रकोप बढ़ रहा है। यह कीट धान के पौधे के तने को अपनी चपेट में ले लेता है। इससे प्रभावित पौधे की गोभ सूख जाती है। जो खींचने पर आसानी से बाहर निकल जाती है और इससे काफी बदबू भी आती है। इसके अलावा कई स्थानों पर धान पर पत्ती लपेटक का प्रकोप दिखाई दे रहा है। यह कीट धान के ऊपरी चोटी वाले हिस्से को लपेट देता है। जो पत्तियों के हरे भाग को खुरचकर खा जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ आईके कुशवाहा ने बताया कि तना छेदक के प्रकोप से निजात पाने के लिए खेत में पांच ट्राईकोग्रामा कार्ड प्रति हेक्टेयर की दर से लगाना चाहिए। यदि प्रकोप अधिक हो तो कारटेप हाइड्रो क्लोराइड दानेदार को 10 किलो प्रति एकड़ की दर से खेत में डालना चाहिए। यह दोनों कीटों की रोकथाम में प्रभावी होता है।
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सहारनपुर। मौसम में हो रहे बदलाव के चलते धान की फसल पर तना छेदक कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इस कीट के प्रभावित पौधे की गोभ सूख जाती है। उसे बाहर निकालने पर काफी बदबू भी आती है। समय से उपचार नहीं होने पर उत्पादन प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा कई स्थानों पर पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप भी दिखाई दे रहा है।
धान की फसल पर कई जगह तना छेदक यानी स्टेम बोरर का प्रकोप बढ़ रहा है। यह कीट धान के पौधे के तने को अपनी चपेट में ले लेता है। इससे प्रभावित पौधे की गोभ सूख जाती है। जो खींचने पर आसानी से बाहर निकल जाती है और इससे काफी बदबू भी आती है। इसके अलावा कई स्थानों पर धान पर पत्ती लपेटक का प्रकोप दिखाई दे रहा है। यह कीट धान के ऊपरी चोटी वाले हिस्से को लपेट देता है। जो पत्तियों के हरे भाग को खुरचकर खा जाता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ आईके कुशवाहा ने बताया कि तना छेदक के प्रकोप से निजात पाने के लिए खेत में पांच ट्राईकोग्रामा कार्ड प्रति हेक्टेयर की दर से लगाना चाहिए। यदि प्रकोप अधिक हो तो कारटेप हाइड्रो क्लोराइड दानेदार को 10 किलो प्रति एकड़ की दर से खेत में डालना चाहिए। यह दोनों कीटों की रोकथाम में प्रभावी होता है।
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